क्या स्वीडन है 'बलात्कारियों का गढ़' ?

 मंगलवार, 18 सितंबर, 2012 को 10:23 IST तक के समाचार

जूलियन असांज के ख़िलाफ़ बलात्कार का आरोप है

अगर आँकड़ों का गिरेबान पकड़ें तो आपको दुनिया के सबसे शांत देशों में से एक स्वीडन में सबसे ज़्यादा बलात्कारी नज़र आने लगेंगे. पर क्या यह ठीक है?

आकंड़ों के हिसाब से स्वीडन में होने वाले बलात्कारों की संख्या भारत में होने वाले बलात्कारों की संख्या से 30 गुना ज़्यादा है.

विकीलीक्स के संस्थापक क्लिक करें जूलियन असांज के प्रत्यर्पण मामले ने क्लिक करें स्वीडन में होने वाले क्लिक करें बलात्कार के मामलों को सुर्खियों में ला दिया है.

अमरीकी लेखक नाओमी वॉल्फ ने बीबीसी से बातचीत में आंकड़ों को दिखाते हुए कहा कि यूरोपीय देशों में स्वीडन में सबसे ज्यादा बलात्कार होते हैं.

लेकिन आंकड़े हकीकत का हर पहलू नहीं बयान करते.

अलग हकीकत अलग फ़साना

स्टॉकहोम में अपराध नियंत्रण परिषद् की क्लारा सेलिन का कहना है कि स्वीडन में आंकड़े इतने डरावने इसलिए दिखते हैं क्योंकि वहां आँकड़ों को जमा करने का तरीका अलग है.

"अगर स्वीडन की कोई महिला जाकर कहती है कि उसका पति या पुरुष मित्र उसके साथ साल भर से लगभग रोज़ बलात्कार कर रहा है तो पुलिस बलात्कार के 300 मामले दर्ज करेगी ना कि एक"

क्लारा सेलिन, अपराध नियंत्रण परिषद, स्वीडन

क्लारा सेलिन कहती हैं, "अगर स्वीडन की कोई महिला जाकर कहती है कि उसका पति या पुरुष मित्र उसके साथ साल भर से लगभग रोज़ बलात्कार कर रहा है तो पुलिस बलात्कार के 300 मामले दर्ज करेगी ना कि एक. जैसा कि अन्य किसी भी देश में होगा."

स्वीडन में पुलिस का जोर इस तरह के अपराधों को ज़्यादा से ज़्यादा दर्ज करने पर होता है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि क्लिक करें बलात्कार में मामलों में दोषी को सज़ा देने में स्वीडन, यूरोपीय देशों में अपेक्षाकृत आगे है. लेकिन बावजूद इसके वहाँ दी जाने वाली सजाओं का अनुपात अन्य देशों से कहीं कम है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल की वर्ष 2010 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि क्लिक करें यौन हिंसा हर देश में होती है, लेकिन क्लिक करें हांगकांग और मंगोलिया जैसे कुछ देशों के सरकारी आंकड़ों में ऐसे मामलों की संख्या शून्य बताई गई है.

वहीं बोत्सवाना दुनिया का ऐसा देश है जहां महिलाओं पर हमले की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं. हालांकि 63 देशों ने इस संबंध में कोई आंकड़े नहीं दिए हैं.

कानूनी परिभाषा अलग-अलग

इन देशों में दक्षिण अफ्रीका भी शामिल है. यहां तीन वर्ष पहले हुए एक सर्वेक्षण में जितने लोगों से बात की गई, उनमें प्रत्येक चार में से एक पुरूष ने कभी न कभी बलात्कार करने की बात स्वीकार की थी.

स्वीडन में सबसे ज्यादा बलात्कार होने संबंधी अमरीकी लेखक नाओमी वॉल्फ के दावे की पुष्टि स्वीडन पुलिस के आंकड़ों से होती है, जहां प्रत्येक एक लाख व्यक्तियों पर 63 लोग बलात्कार का शिकार होते हैं.

महिलाओं के खिलाफ अपराध

  • बलात्कार के मामले: 24,206
  • अपहरण के मामले: 35,565
  • छेड़छाड़ के मामले: 42, 968
  • यौन हिंसा के मामले: 8,570

(नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो, वर्ष- 2011)

आंकड़ों के हिसाब से ये संख्या नॉर्वे, ब्रिटेन और भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा है. लेकिन स्टॉकहोम स्थित नेशनल काउंसिल फॉर क्राइम प्रिवेंशन में समाज शास्त्री क्लारा सेलिन इस तुलना को सही नहीं मानती हैं.

क्लारा सेलिन का तर्क है कि इस मामले में देशों के बीच तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि यहां पुलिस-प्रक्रिया और कानूनी-परिभाषा बहुत अलग-अलग हैं.

भारत का मामला

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में वर्ष 2011 में बलात्कार के कुल 24,206 मामले सामने आए. इनमें से लगभग 26 प्रतिशत मामलों में दोषी व्यक्ति को सजा हुई.

इसी तरह, लड़कियों और महिलाओं को अगवा करने के कुल 35,565 मामले दर्ज हुए. इनमें से लगभग 28 प्रतिशत मामलों में दोषी व्यक्ति को सजा मिली.

भारत में छेड़छाड़ और यौन हिंसा के मामले भी आए दिन सुर्खियों में बने रहते हैं. साल 2011 में छेड़छाड़ के 42,968 मामले और यौन हिंसा के 8570 मामले दर्ज हुए.

मध्यप्रदेश शीर्ष पर

आंकड़ों के हिसाब से बलात्कार के मामलों में मध्य प्रदेश सबसे आगे रहा जहाँ 1,262 मामले दर्ज हुए.

जबकि दूसरे और तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश (1,088) और महाराष्ट्र (818) रहे.

इन तीनों प्रदेशों के आंकड़े मिला दिए जाएँ तो देश में दर्ज बलात्कार के कुल मामलों का 44.5 प्रतिशत इन्हीं तीनों राज्यों में दर्ज किया गया.

आंकड़ों के मुताबिक, छेड़छाड़ के लगभग 27 प्रतिशत मामलों में ही दोषी को सजा हो पाई. जबकि यौन हिंसा के लगभग 45 प्रतिशत मामलों में दोषियों को सजा मिली.

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