उत्तराधिकारी के लिए गोद लेने का रास्ता

Image caption जेंगोरो होशु दुनिया के सबसे पुराने व्यापारिक परिवार के प्रमुख हैं

जापान में एक प्राचीन परंपरा ने वृद्धावस्था की एक समस्या को सुलझा दिया है कि बेटे के पारिवारिक व्यापार का उत्तराधिकार किसे सौंपा जाए.

दरअसल इस कहानी की शुरुआत हुई सन 717 से जब बौद्ध भिक्षु ताइचो डैशी को सपने में भगवान माउंट हकुसन ने दर्शन दिए और कहा कि वो अवाजु गाँव के पास गर्म झरने की खोज करें. अवाजु गाँव वर्तमान समय में इशिकावा प्रांत में स्थित है.

डैशी ने इस जगह की खोज की और अपने शिष्य गैरियो होशी को वहां एक अतिथि गृह बनवाने का आदेश दिया.

गैरियो होशी ने यहां आने वालों को प्रवचन देना शुरू किया और अपने उत्तराधिकारी के तौर पर एक बच्चे को गोद ले लिया. इस बच्चे का नाम रखा गया- जेंगोरो.

और गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के मुताबिक इसी से शुरुआत हुई दुनिया के सबसे पुराने व्यापारिक परिवार की.

तब से, यानी करीब 13 सौ साल से ये होटल और जेंगोरो होशु नाम की 46 पीढ़ियां गुजर चुकी हैं.

उत्तराधिकार

लेकिन सवाल उठता है कि एक ऐसे देश में जहां सिर्फ बेटा ही पारिवारिक नाम को आगे बढ़ाता है, वहां लगातार इतने वर्षों तक बेटे का प्रबंध करना कैसे संभव हुआ.

इस सवाल के जवाब में मौजूदा जेंगोरो होशी कहते हैं, “जब हमारे परिवार में सिर्फ लड़कियाँ होती हैं तो हम दामाद को गोद ले लेते हैं. मेरे पिता की भी शादी होशी परिवार में हुई थी और बाद में उन्हें गोद ले लिया गया.”

दरअसल, गोद लेने का ये विशिष्ट जापानी तरीका है जिसे 'मुकोयोशी' कहा जाता है.

गोद लेने की दर के हिसाब से जापान का पूरी दुनिया में दूसरा स्थान है जहां हर साल करीब 80 हजार लोग गोद लिए जाते हैं. और इनमें से ज्यादातर वयस्क पुरुष होते हैं जिनकी उम्र बीस साल से ज्यादा होती है.

इतिहास

जापान के 'हाकुहुदो इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ ऐंड लिविंग' के समाजशास्त्री मारिको फ़ुजीवारा कहती हैं, “ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो ये परंपरा दक्षिणी जापान में ज्यादा पाई जाती है जहां व्यापारिक परिवारों ने गोद लेने के लिए ऐसे लोगों का चुनाव किया जो कि सर्वाधिक सक्षम उत्तराधिकारी थे.”

मारिको कहती हैं कि जिनके पास उत्तराधिकारी के तौर पर सक्षम पुत्र नहीं थे उन्होंने अपनी किसी बेटी की शादी ऐसे किसी व्यक्ति से कर दी और फिर उसे गोद ले लिया.

Image caption सुजुकी कंपनी के चेयरमैन और सीईओ ओसामु सुजुकी इस कंपनी के चौथे दत्तक पुत्र हैं.

उनका कहना है कि हालांकि ये निर्णय इतना आसान नहीं होता लेकिन परिवार के कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए लोग ऐसा करते हैं.

यहां तक कि आज भी जापान की ज्यादातर बड़ी कंपनियों के पारिवारिक व्यापार हैं. इनमें से कई के नाम भी उनके परिवार के ही नाम पर हैं. जैसे- कार बनाने वाली कंपनियां टोयोटा और सुज़ुकी.

सुज़ुकी कंपनी तो इसीलिए मशहूर है कि इसका नेतृत्व काफी समय से दत्तक पुत्र ही करते रहे हैं. इस कंपनी के मौजूदा चेयरमैन और सीईओ ओसामु सुजुकी इस कंपनी के चौथे दत्तक पुत्र हैं.

जापान की मैत्सुई सिक्योरिटीज कंपनी के चौथे अध्यक्ष मिशियो मैत्सुई को भी परिवार में गोद लिया गया था, लेकिन यहां उनका नाम कंपनी के नाम छिप गया है.

वो कहते हैं, “मैं अपने माँ-बाप का सबसे बड़ा बेटा था, इसलिए किसी दूसरे परिवार का दत्तक पुत्र बनने में मुझे कुछ हिचक थी. लेकिन मेरे माँ-बाप ने मुझसे कहा कि ये मान लो कि तुम्हारे भाग्य में यही है.”

हालांकि ऐतिहासिक तौर पर देखें तो लगता है कि नाम बदलना कोई बड़ा मुद्दा नहीं रहा और कई लोगों ने ऐसा किया भी नहीं.

वेबसाइट

चीको दाते ने एक वैवाहिक वेसाइट शुरू की है जिसमें कि महिलाएं ऐसे पुरुषों का चुनाव कर सकती हैं जो कि किसी दूसरे परिवार में दत्तक बनना चाहते हों.

दाते कहते हैं, “निश्चित रूप से इसकी मांग है क्योंकि जापान में जन्म दर कम हो रही है और बहुत से लोगों के पास सिर्फ एक बेटी ही है.”

दाते की वेबसाइट में अपना नाम दर्ज कराने वाले त्सुनेमारु तानाका कहते हैं कि उनका खुद का व्यापार था लेकिन उनकी पहली पत्नी जो कि उनकी बिजनेस पार्टनर भी थी, उसकी वजह से वो ठप हो गया.

तानाका कहते हैं कि अब वो इस वेबसाइट के जरिए ऐसी पत्नी ढूंढ़ना चाहते हैं जिसके जरिए वो किसी व्यावसायिक घराने के मालिक बन सकें.

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