ऑस्ट्रेलिया में कामयाबी के झंडे गाड़ते एशियाई

 रविवार, 23 सितंबर, 2012 को 10:24 IST तक के समाचार

शर्मिला लोध ऑस्ट्रेलिया में एक डांस स्कूल चलाती हैं

जिनी डे ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली उस युवा एशियाई पीढ़ी की नुमाइंदगी करती हैं, जो वहां के बदलते समाज और परिवेश का चेहरा है.

जिनी पेशे से कोरियोग्राफर हैं और उनका जन्म भारत में हुआ. अब वो सिडनी में नुपुर डांस ग्रुप चलाती हैं. सिडनी के ओलंपिक पार्क में उनसे हमारी मुलाकात हुई जहां वो भारत-ऑस्ट्रेलिया उत्सव में अपनी डांस टीम के साथ हिस्सा ले रही थीं.

खास कर अपने बॉलीवुड डांस स्टाइल से वो तेजी से ऑस्ट्रेलिया की सांस्कृतिक हलचलों का हिस्सा बन रही हैं.

जिनी का कहना है, “जब मैं जूनियर स्कूल में थी तो मुश्किल था क्योंकि क्लास में सिर्फ मैं ही एशियाई मूल की थी. लेकिन जब मैं बड़ी हो गई और सीनियर क्लास में गई तो ये समस्या दूर हो गई क्योंकि तब मेरे जैसे कई लोग वहां थे.”

"मुझे भारतीय समुदाय के साथ रहना होता है. मैं ऑस्ट्रेलिया में ही पैदा हुई हूं, मैंने अपने माता-पिता से भारतीय संस्कृति के बारे में काफी कुछ सुना है. ऑस्ट्रेलिया मेरा घर है"

शर्मिला लोध, भारतीय मूल की ऑस्ट्रेलियाई नागरिक

ये पूछने पर कि जिनी दिल या दिमाग या फिर दोनों से खुद को क्या महसूस करती हैं, ऑस्ट्रेलियाई या भारतीय? उनका कहना था, “जब मैं ऑस्ट्रेलिया में होती हूं तो खुद को भारतीय महसूस करती हूं और जब भारत जाती हूं तो खुद को ऑस्ट्रेलियाई महसूस करती हूं.”

वहीं जिनी की साथी शर्मिला लोध का कहना है कि अब ऑस्ट्रेलियाई समाज में घुलना मिलना कोई मुद्दा नहीं रहा है.

वो कहती हैं, “मुझे भारतीय समुदाय के साथ रहना होता है. मैं ऑस्ट्रेलिया में ही पैदा हुई हूं, मैंने अपने माता-पिता से भारतीय संस्कृति के बारे में काफी कुछ सुना है. ऑस्ट्रेलिया मेरा घर है.”

इस बात से ऑस्ट्रेलिया का राजनीतिक वर्ग अनभिज्ञ नहीं है.

राजनीतिक महत्व

हालांकि ये कार्यक्रम रविवार दोपहर बाद हो रहा है, बावजूद इसके ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गेरार्ड और विपक्ष के नेता टोनी ऐबट भी यहां मौजूद हैं.

गैरी चीनी हैं लेकिन उन्हें व्यवसाय स्थापित करने में कोई दिक़्कत नहीं आई

मैंने गेलार्ड से कुछ सवाल पूछे, उन्होंने मेरी ओर देखा और कहा, “एशियाई समुदाय ऑस्ट्रेलिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.” जवाब देते वक्त ‘बेहद’ शब्द पर उनका काफी जोर था.

दूसरी तरफ गैरी चीनी मूल के ऑस्ट्रेलियाई हैं और उनकी अपनी कंपनी है जिसका नाम है ई.वेब मार्केटिंग. इस कंपनी में लगभग 40 लोग काम करते हैं जिनमें आधे से ज्यादा एशियाई हैं.

हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में गैरी की कंपनी को काम करने के लिहाज से चौथी सबसे अच्छी जगह बताया गया है.

गैरी का कहना है, “अब चीनी लोग यहां सिर्फ रेस्त्रां नहीं चलाते हैं.”

गैरी बताते हैं कि उन्हें अपना कारोबार जमाने में कोई खास दिक्कत नहीं आई. वो कहते हैं, “मैंने महसूस किया कि मुझे व्यापारिक समुदाय ने स्वीकार कर लिया. उन्हें मेरी नस्ल से कोई मतलब नहीं है.”

समुदाय

दरअसल ऑस्ट्रेलिया में साल 1901 में संघीय व्यवस्था लागू होने के तुरंत बाद वहां पहला आव्रजन कानून पारित हुआ. इसके बाद से द्वितीय विश्व युद्ध तक ऑस्ट्रेलिया में श्वेत नस्ल के लोगों को वहां बसने के लिए प्रेरित किया गया.

लेकिन भेदभाव को बढ़ावा देने वाले इस कानून का साल 1973 में अंत हो गया और तब से ऑस्ट्रेलियाई समुदाय में विभिन्न नस्लों के लोग शामिल हो गए हैं.

"मैंने महसूस किया कि मुझे व्यापारिक समुदाय ने स्वीकार कर लिया. उन्हें मेरी नस्ल से कोई मतलब नहीं है."

गैरी न्ग, चीनी मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक

इस समय ऑस्ट्रेलिया में एशियाई समुदाय के लोगों की संख्या 24 लाख के करीब है जो कि वहां की कुल आबादी का 12 फीसदी है.

वहां हर दस एशियाई लोगों में से तीन विश्वविद्यालय जाते हैं, ऑस्ट्रेलिया के कुल डॉक्टरों में से बीस फीसदी एशियाई हैं और संगठित खेलों में एशियाई मूल के लोगों की भागीदारी 37 फीसदी है.

ऑस्ट्रेलिया में इस समय भारतीय और चीनी लोगों की आबादी की तीसरी पीढ़ी रह रही है.

ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े शहर सिडनी में चीनी मूल के लोगों की संख्या अंग्रेजों की तुलना में ज्यादा हो गई है.

जबकि मेलबर्न में भारतीय मूल के लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

वहीं देश भर में चीनी भाषा में मैंडारिन ने दूसरी भाषा के रूप में इटालियन को पीछे कर दिया है.

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