सीरिया: सड़ती लाशों के साथ रातें गुज़ारते बच्चे

सीरिया
Image caption हुला शहर पर हुए एक हमले में 32 बच्चों की मौत हो गई थी.

बच्चों के लिए काम करने वाली ब्रितानी संस्था सेव द चिल्ड्रन ने कहा है कि सीरिया में बच्चे भारी यातनाओं का शिकार हो रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र को इस मामले पर ग़ौर करना चाहिए.

संस्था ने सीरिया में पिछले 18 महीनों से जारी लड़ाई के दौरान बच्चों की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें इस तरह के गंभीर मामले सामने आए हैं. कई मामलों में बच्चों को सिगरेट से दाग़ा गया, और उन्हें बिजली के झटके दिए गए.

पंद्रह साल के एक बच्चे ने सेव द चिल्ड्रन से कहा कि उसे उसके स्कूल में क़ैद करके रखा गया जहां उसके शरीर को जलते सिगरेट से दाग़ा गया.

एक दूसरे बच्चे का कहना था कि उसे बिजली के झटके दिए गए.

'शव निकालने का काम'

बच्चों को क़ैद के दौरान एक ऐसे कमरे में रखा गया था जहां कई दिन लाशें पड़ी थीं. ये लाशें सड़ रही थी.

सोलह साल के वायल का कहना था कि एक छह साल के बच्चे को इतने दिन तक खाना नहीं दिया गया कि भूख से उसकी मौत हो गई.

संस्था की प्रवक्ता कैट कार्टर ने कहा, "मैंने जो कुछ भी सुना है वो डरावना है. मैंने सुना कि 10 साल की कम आयु के बच्चों को यातनाएं दी जा रही हैं. मुझे बताया गया है कि कई ऐसे बच्चे भी हैं जिन्हें मलबों से शव निकालने का काम सौंपा गया है."

सेव द चिल्ड्रन की ये रिपोर्ट ठीक ऐसे समय आई है जब संयुक्त राष्ट्र की सालाना बैठक शुरू होने वाली है. हालांकि सीरिया का मामला औपचारिक तौर पर संगठन के एजेंडे पर नहीं है लेकिन कहा जा रहा है कि वो बैठक के दौरान होने वाली बातचीत में छाया रहेगा.

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