सोहराबुद्दीन मामले की सुनवाई अब गुजरात से बाहर

 गुरुवार, 27 सितंबर, 2012 को 11:47 IST तक के समाचार
अमित शाह

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमित शाह के लिए राहत देने वाली खबर माना जा रहा है

सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले में गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीकी माने जाने वाले अमित शाह को ज़मानत दिए जाने के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है.

साथ ही अदालत ने मामले को गुजरात से बाहर भेज दिया है. मामले की सुनवाई अब मुंबई में होगी जिससे गुजरात सरकार के आलोचकों को एक और हथियार मिलेगा.

भाजपा ने इस फैसले का स्वागत किया है, उधर सरकार की ओर से कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि वो आदेश पढ़ने के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे.

सोहराबुद्दीन मामले में सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में अमित शाह पर हत्या, अपहरण, फिरौती और साज़िश रचने का आरोप लगाया है. सीबीआई ने अमित शाह और अन्य को इस मामले में अभियुक्त बनाया है.

अमित शाह को गिरफ्तार कर वर्ष 2010 में जेल भेज दिया गया था.

ज़मानत

सोहराबुद्दीन शेख़ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले की जांच सीबीआई कर रही है

तीन महीने अहमदाबाद की साबरमती जेल में बिताने के बाद उन्हें ज़मानत मिल गई थी लेकिन उन्हें गुजरात से बाहर रहने के लिए कहा गया था.

सीबीआई ने ज़मानत का विरोध किया था क्योंकि उसका मानना है कि अमित शाह गवाहों और सुबूतों को प्रभावित कर सकते हैं.

गुरुवार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भाजपा और नरेंद्र मोदी के लिए राहत की खबर के तौर पर देखा जा रहा है. गौरतलब है कि गुजरात में नवंबर अंत या दिसंबर की शुरुआती दिनों में चुनाव होने हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक वकील ने पत्रकारों को बताया, “आज सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील को खारिज कर दिया है. उच्च न्यायालय ने उन्हें जो ज़मानत दी थी वो जारी रहेगी. मामले को गुजरात से बाहर भेज दिया गया है. वो वापस गुजरात जाने को आजाद हैं. सुप्रीम कोर्ज ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है.”

फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा, “पूरी गुजरात की जनता और लोकतंत्र में आस्था रखने वाले लोग फैसले का स्वागत करेंगे.”

सोहराबुद्दीन शेख़ की हत्या एक फ़र्ज़ी पुलिस मुठभेड़ में नवंबर 2005 में कर दी गई थी. इस मामले में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों समेत कई पुलिसकर्मी जेल में हैं.

सोहराबुद्दीन एक अपराधी थे लेकिन पुलिस ने उन्हें लश्कर ए तैयबा का चरमपंथी करार देते हुए एक मुठभेड़ में मार गिराया था.

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