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इस्लामी वेबसाइटों पर साप्ताहिक बुलेटिन
 
इस्लामी वेबसाइट
बुलेटिन में एक लोगो भी इस्तेमाल किया गया
कुछ कट्टरपंथी इस्लामी कार्यकर्ताओं ने अमरीका और पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ अपने प्रचार अभियान के तहत अब इंटरनेट पर अपना ख़ुद का साप्ताहिक समाचार बुलेटिन शुरू किया है.

इन इस्लामी वेबसाइटों पर समाचार देने के तरीक़ों के तहत वीडियो भी रखा गया है.

यह समाचार सामग्री ख़ुद को ग्लोबल इस्लामिक मीडिया फ्रंट बताने वाले एक गुट ने तैयार की है.

पहला बुलेटिन सितंबर के आख़िर में सामने आया है जिसमें नक़ाब पहने एक प्रस्तुतकर्ता समाचार पढ़ता है और पृष्ठभूमि में एक वीडियो भी दिखाया जाता है.

उसका पहला वाक्य बुलेटिन का अंदाज़ बयाँ करता है - "सबसे पहले सौत अल ख़लीफ़ा टीम फ़लस्तीनी ज़मीन पर यहूदी क़ब्ज़े को शिकस्त देने पर इस्लामी राष्ट्र को मुबारकबाद देती है."

ग़ज़ा पट्टी से इसराइली वापसी की कहानी के अलावा इस बुलेटिन में जो अन्य कहानियाँ हैं उनमें इराक़ में ताज़ा हमलों का ज़िक्र है.

साथ ही इन हमलों में जिस व्यक्ति का हाथ होने का संदेह किया जाता है यानी अबू मुसाब अल ज़रक़ावी के बयान भी हैं.

बुलेटिन में तीसरी कहानी है अमरीका में समुद्री तूफ़ान कैटरीना से हुई तबाही. समाचार वाचक कैटरीना तूफ़ान से हुई तबाही को 'दैवी सज़ा' बताता है.

इस बुलेटिन के निर्माता कहते हैं कि इसे वे हर सप्ताह प्रस्तुत करेंगे.

'वॉयस ऑफ़ केलीफ़ेट' यानी ख़लीफ़ा की आवाज़ नाम की एक वेबसाइट का विज्ञापन भी दिखाया जाता है जिसमें सीएनएन और फ़ॉक्स चैनलों की ही तरह एक लोगो भी है.

चैनल

इस्लामी वेबसाइटों का अध्ययन करने वाले एक ब्रितानी विश्लेषक नील डोयली ने बीबीसी से कहा कि ग्लोबल इस्लामिक मीडिया फ्रंट नाम के इस गुट का मक़सद इस्लामी चरमपंथियों की तरफ़ से जारी होने वाले बयानों और वीडियों के लिए एक चैनल के तौर पर काम करना है.

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह गुट कहाँ से काम कर रहा है, ऐसे संदेह हैं कि यह किसी अरब देश के बजाय किसी पश्चिमी देश से अपना काम कर रहा है.

ख़ुफ़िया एजेंसियाँ भी अभी यह पता नहीं लगा सकी हैं कि इस तरह के वीडियो कहाँ तैयार किए जाते हैं, हालाँकि चरमपंथियों के बयानों को जगह देने वाली अनेक वेबसाइटों को हाल ही में निशाना बनाया गया और उन्हें बंद कर दिया गया.

बीबीसी के मीडिया मामलों के संवाददाता सेब्सटेन अशर का कहना है कि ख़लीफ़ा की आवाज़ नाम की यह वेबसाइट इस्लामी कट्टरपंथियों की सीमा से आगे जाकर व्यापक मुस्लिम समुदाय को संबोधित करने की कोशिश कर रही है.

लेकिन ब्रिटेन में 'मुस्लिम न्यूज़' नाम की एक पत्रिका के संपादक अहमद वर्सी ने बीबीसी से कहा कि वह नहीं मानते कि ऐसी वेबसाइटें चलाने वाले अपने इस मक़सद में कामयाब होंगे.

अहमद वर्सी ने कहा कि ऐसी वेबसाइटों का मुख्य मक़सद अपने विचारों को फैलाना है और इसमें वे काफ़ी हद तक कामयाब हुए हैं क्योंकि पश्चिमी देशों के मीडिया में बहुत से लेख लिखे गए हैं.

 
 
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