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सोमवार, 31 जुलाई, 2006 को 19:16 GMT तक के समाचार

आकाश सोनी
बीबीसी संवाददाता, लंदन

चंदा रे मेरी बहना से कहना....

राखी क़रीब है. परदेस में राखी कितनी कष्टकारी हो सकती है, उस अप्रवासी भारतीय से पूछिए जिसकी बहन भारत में हो.

याद आता है – कैसे चुपके से बहन किसी दिन राखी लेकर आती थी, छुपाकर रखती थी, राखी के दिन 'सरप्राइज़' देती थी, शादी के बाद जहाँ भी हो, राखी ज़रूर भेजती थी और साथ में एक प्यारी सी चिट्ठी.

फिर बहन ई-मेल करने लगी. अब हाथ से लिखी चिट्ठी सिर्फ़ एक आती है – राखी के साथ.

राखी के आसपास पुरानी यादें उमड़ने-घुमड़ने लगती हैं, आँखों में आँसू भी ले आती हैं. लेकिन उन्हीं सूनी आँखों में चमक आ जाती है जब भारत से चिट्ठी में आती है – राखी, चंदन, रोली और अक्षत के साथ.

बहरहाल, इस बार राखी के साथ मेरी बहन ने एक चेतावनी भी भेजी है. चेतावनी का विषय है – “पुरुषों को चेतावनी.”

आगे लिखा है –"एक विशेष सूचना .......... अगर आप बस, रेल या कही से भी आ जा रहे हो और किसी लडकी के हाथ मे फूल, धागा, चेन या ऐसी ही कोई चमकती वस्तु नज़र आए तो आप तुरंत वहाँ से दूर हो जाएं. ये चमकती वस्तु राखी भी हो सकती है. आपकी थोड़ी सी लापरवाही आपको भाई बना सकती है."

(आप परदेस में राखी कैसे मनाते हैं. अपने अनुभव हमें साथ में दिए फ़ॉर्म का इस्तेमाल करते हुए लिख भेजिए.)

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चोर ने दिया चरित्र प्रमाणपत्र

लंदन जा रहे हो तो एक बात का ध्यान रखना, कभी भी 20 पाउंड से कम जेब में मत रखना और 30 पाउंड से ज़्यादा नहीं- ये बात मुझे कही गई थी जब मैं लगभग पाँच साल पहले बीबीसी में नौकरी करने आया था.

मुझे ये बात तब तक समझ में आई भी नहीं जब तक मुझे एक व्यक्ति ने गले पर चाकू अड़ाकर ये नहीं कहा– जेब में जो कुछ है निकाल दो.

मुझे लगा जैसे मैं किसी नाटक का पात्र हूँ. लंदन के बीचों-बीच था, नॉटिंग हिल के इलाक़े में, समय था शाम के पाँच बजे और यही आदमी दस मिनट पहले मुझसे सड़क चलते ऐसे बात कर रहा था जैसे कि मेरा पुराना दोस्त हो.

बहरहाल, मुझे ये भी याद आया कि बताया गया था कि अगर कोई माँगे तो लड़े बगैर सारे पैसे दे देना वरना और पिटाई होती है.

मैंने उस सवा छह फ़ुट लंबे अफ़्रीकी मूल के आदमी और उनके मित्र को देखा, उनके पीछे खड़े दो और लोगों को देखा, चाकू की धार देखी और फिर चुपचाप अपनी जेब से मोबाइल निकालकर उसे दे दिया. घड़ी भी दे दी.

दूसरी जेब से निकले 20 पाउंड और दो क्रेडिट कार्ड लेकिन फिर उसके बाद उस अफ़्रीकी ने जो कहा उसके लिए मैं भी तैयार नहीं था.

वो अपने मित्र से कहता है- यार ये अच्छा आदमी लगता है. मैं मोबाइल वापस कर देता हूँ.फिर यही कहकर घड़ी और दोनों क्रेडिट कार्ड भी दे दिए. फिर मुझसे पूछा, “घर कैसे जाओगे?” मैंने कहा, “पता नहीं, सारे पैसे तो आपके पास हैं.”

उसने अपना नाम बताया जेरी और फिर जेब से निकालकर 5 पाउंड लौटा दिए और कहा, “इससे घर चले जाना. लेकिन मैं आपके 15 पाउंड नहीं लौटा सकता क्योंकि मैं नशीले पदार्थों का सेवन करता हूँ, ड्रग एडिक्ट हूँ और अभी मुझे पैसे की ज़रूरत है. दोस्त, आप अच्छे आदमी हो इसीलिए जो लौटा सकता था, वो लौटा दिया.”

वहाँ से मैं चला गया. पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखवाई. पुलिस की गाड़ी में बैठकर तीन बार उस चोर 'जेरी' को ढूंढा लेकिन वह नहीं मिला.

अब सोचता हूँ 15 पाउंड में चोर से ही सही कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट तो मिला– आप एक अच्छे आदमी हो.

छह महीने बाद पुलिस ने उस आदमी को गिरफ़्तार किया, मेरे 15 पाउंड लौटाए और बताया कि ये लोग तभी लूट-पाट या चोरी करते थे जब इन्हें ड्रग्स की ज़्यादा तलब होती थी. तब अगर इन्हें किसी के पास पैसे नहीं मिलते थे तो ये उस आदमी की पिटाई तक कर डालते थे.