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आपका दिल कितना भारी?
 

 
 
आपका दिल कितना भारी?
दिल पर बहुत से मुहावरे भी हैं जैसे दिल दुखना या दुखाना, दिल खोलना, दिल ख़ुश होना, दिल भारी होना, दिल देना-लेना...
ग्राम बकोरी, मुज़फ़्फ़रपुर बिहार से नन्द किशोर यादव जानना चाहते हैं कि दिल का कितना वज़न होता है.

नन्दकिशोर जी एक औसत व्यक्ति के दिल का वज़न 11 आउंस या 310 ग्राम के आस-पास होता है. दिल का आकार हमारी बंद मुट्ठी से कुछ ही बड़ा होता है और ये एक मिनट में 70 से 80 बार और एक दिन में कोई एक लाख बार धड़कता है.

दिल पर बहुत से मुहावरे भी हैं जैसे दिल दुखना या दुखाना, दिल खोलना, दिल ख़ुश होना, दिल भारी होना, दिल देना-लेना...

पाकिस्तान का राष्ट्रीय चिन्ह क्या है, चाँद-तारा या चमेली का फूल. ग्राम खेकसाही पलामूं बिहार से संतोष प्रसाद.

संतोष जी चाँद-तारा इस्लाम का पारम्परिक प्रतीक है जो पाकिस्तान के झंडे के साथ-साथ पाकिस्तान के राष्ट्रीय चिन्ह पर भी बना है. लेकिन इस चिन्ह में चाँद-तारे के नीचे एक ढाल है जो चार भागों में विभाजित है, एक में कपास, दूसरे में गेंहूं, तीसरे में चाय और चौथे में पटसन दिखाई गई है जो पाकिस्तान की प्रमुख फ़सलें हैं. इस ढाल के चारों ओर फूलमाला सजी है और सबसे नीचे लिखा है ईमानदारी, एकता और अनुशासन. जहां तक चमेली का सवाल है वो पाकिस्तान का राष्ट्रीय फूल है.

परमाणु

परमाणु बम का आविष्कार कब और किसने किया और इसका पहला परीक्षण कहां हुआ. पूछते हैं ग्राम नन्दलालपुर बिहार से रामनारायण और वासुकी जायसवाल.

दो अगस्त 1939 को दूसरे विश्वयुद्ध के ठीक पहले जाने-माने वैज्ञानिक ऐल्बर्ट आइन्स्टाइन ने अमरीका के राष्ट्रपति फ़्रैंकलिन डी रूज़वैल्ट को एक पत्र लिखा. उन्होने और अन्य वैज्ञानिकों ने राष्ट्रपति को बताया कि नात्ज़ी जर्मनी में यूरेनियम संवर्धन का कोशिश हो रही है जो अणु बम बनाने के काम आ सकता है. उसके बाद अमरीकी सरकार ने अणु बम बनाने का फ़ैसला किया. इसे मैनहैटन परियोजना के नाम से जाना जाता है. जे रॉबर्ट ओपनहाइमर के नेतृत्व में इस परियोजना पर 1939 से लेकर 1945 के बीच कई वैज्ञानिकों ने काम किया और इसपर दो अरब डॉलर का ख़र्च आया. इसका पहला परीक्षण 16 जुलाई 1945 को न्यू मैक्सिको की जेमेज़ पहाड़ियों की घाटी में सुबह साढ़े पाँच बजे किया गया. कहते हैं कि इतनी तेज़ रोशनी हुई कि दूर दराज़ की बस्तियों में रहने वाले लोगों को लगा कि आज दो बार सूरज उगा. कोई 120 मील दूर एक अंधी बच्ची को भी प्रकाश दिखाई दिया.

मोम

मोम कैसे बनता है. ग्राम करहारा, पटना बिहार से प्रभात राज सुमन.

असली और नक़ली ऐश्वर्या राय
मोम से बहुत कुछ बनने लगा है

मोम का प्रयोग कब शुरु हुआ कहना कठिन है, लेकिन प्राचीन सभ्यताओं में मोम का प्रयोग हुआ करता था. मिस्र में मोम के बने देवी देवताओं की प्रतिमाएं अंतिम संस्कार में इस्तेमाल की जाती थीं. ऐसे उल्लेख अन्य सभ्यताओं में भी मिलते हैं. लेकिन पिछले 150 साल से मोम बनाने के लिए पैराफ़िन का इस्तेमाल किया जा रहा है. कच्चे तेल में से गैस, ईंधन, चिकनाई और पैट्रोकैमिकल पदार्थ निकालने के बाद जो बाकी बचता है उसे पैराफ़िन कहते हैं. इसका और शोधन करके मोम बनाया जाता है.

क्रिकेट

ग्राम तीरा खारदह, अररिया बिहार से चैतन्य कुमार बबलू और प्रियव्रत अजय ने पूछा है कि क्रिकेट में साइड स्क्रीन क्या होता है.

साइट स्क्रीन बल्लेबाज़ के सामने बाउन्ड्री के बाहर लगी होती है. ये सफ़ेद रंग की होती है जिससे जब क्रिकेट की लाल गेंद बल्लेबाज़ की तरफ़ आए तो उसे देखने में सुविधा हो. जब दिन रात के मैच होते हैं तो रात के समय खेले जाने वाले मैच में सफ़ेद गेंद प्रयोग की जाती है. तब साइट स्क्रीन काले रंग की होती है.

समुद्री जीव

सबसे तेज़ तैरने वाला समुद्री जीव कौन है. कुरुमपोलिल, अलैप्पी, केरल से राजन ऐलैक्ज़ैंडर.

सेल फ़िश सबसे तेज़ तैरने वाला समुद्री जीव है. कहते हैं कि ये 114 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़तार से तैर सकती है. सेल फ़िश प्रशान्त महासागर और अन्य महासागरों में पाई जाती हैं. इनकी चोंच बहुत लम्बी और पैनी होती है और आमतौर पर इनकी लम्बाई 6 से 8 फ़िट होती है, लेकिन 10 फ़िट लम्बी सेल फ़िश भी मिली हैं.

युग

दरगाह बेला चौक, वैशाली बिहार से दरोगी राउत और उनके मित्रों ने पूछा है कि युग क्या है और ये कितने दिनों का होता है. हम लोग मात्र ये जानते हैं कि सत्युग, त्रेता, द्वापर और कलयुग होते हैं.

पुराणों में काल को चार युगों में बांटा गया है लेकिन इनके दिन रात और वर्षों का हिसाब कुछ अलग है. मानव का एक वर्ष दो अयन के बराबर होता है और एक अयन देवता का एक दिन होता है. 360 अयन एक देवता का वर्ष बन जाता है. और बारह हज़ार देवता के वर्ष चार युग का काल होता है. इसमें सतयुग में चार हज़ार देवता के वर्ष होते हैं, त्रेता में तीन हज़ार देवता के वर्ष, द्वापर में दो हज़ार और कलयुग में एक हज़ार देवता के वर्ष होते हैं. ये चारों मिलाकर हुए दस हज़ार देवता के वर्ष. बाक़ी बचे दो हज़ार.

जब युग शुरु होता है तो उसे संध्या और युग समाप्ति को संध्यांश कहते हैं. सतयुग में संध्या और संध्यांश चार चार सौ वर्ष के, त्रेता में तीन तीन सौ वर्ष के, द्वापर में दो दो सौ वर्ष के और कलयुग में सौ सौ वर्ष के होते हैं. इससे बारह हज़ार वर्षों के ये चार युग पूरे हो जाते हैं. चार युगों को कल्प कहा जाता है. और जब एक हज़ार कल्प होते हैंतो उसे ब्रह्मा का एक दिन होता है. कहते हैं कि ब्रह्मा की कुल आयु है सौ वर्ष और अभी उनकी आधी आयु हुई है और जब पूरी होगी तो उसे कहते हैं महाकल्प. माना ये जाता है कि जब चार युग पूरे होते हैं तो प्रलय होती है. इस समय ब्रह्मा सो जाते हैं और जब जागते हैं तो संसार का निर्माण करते हैं और युग शुरु होता है.

 
 
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