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सोमवार, 18 सितंबर, 2006 को 18:41 GMT तक के समाचार
 
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अब पराया नहीं लगता लंदन
 

 
 
करण जौहर और शाहरुख़ ख़ान
कई बड़ी हिंदी फ़िल्मों का स्पेशल प्रीमियर लंदन में होता है
जब मैं पहली बार लंदन आई तो मुझे बीबीसी के हॉस्टल में ठहराया गया. यह हॉस्टल केंद्रीय लंदन के बेज़वॉटर इलाक़े में स्थित है.

मेरा कमरा पहली मंज़िल पर था. कमरे की खिड़की सड़क की तरफ़ खुलती थी. सामने दिखाई पड़ता था एक पार्क और उस पार्क के चारों ओर दिखती थीं हमारे हॉस्टल जैसी और कई भव्य इमारतें.

इनमें से कुछ तो होटल हैं. एक दिन मुझे कहीं दूर से कुछ पहचानी सी आवाज़ सुनाई दी. मैंने खिड़की से गर्दन बाहर निकाल कर इधर-उधर देखा लेकिन कुछ नज़र नहीं आया.

अब आवाज़ कुछ और साफ़ आने लगी थी. मैंने पहचान लिया वह बेगम अख़्तर की आवाज़ थी. कहीं कोई ग़ज़लों का शौक़ीन उनका कैसेट बजा रहा होगा.

मैं बता नहीं सकती कि उस आवाज़ को सुनकर मेरे दिल में कैसी टीस उठी और अचानक एहसास हुआ इस बेगाने, अनजाने माहौल का.

आज तो यहाँ हिंदी के रेडियो स्टेशन हैं जिनसे चौबीसों घंटे आप नए और पुराने गीत सुन सकते हैं. लंदन के सिनेमा घरों में अब हिंदी की फ़िल्में दिखाई जाती हैं. आज लंदन उतना पराया नहीं लगता.

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इंग्लिश तहज़ीब

इंग्लिश ऐटीकेट के बारे में आपने सुना होगा. वर्षों पहले इसके नियम क़ायदे काफ़ी सख़्त हुआ करते थे और अगर कोई उनका उल्लंघन करता तो उसकी समाज में प्रतिष्ठा घट जाती और उसे नीची नज़र से देखा जाता.

आज के सामाजिक परिवेश में उतनी औपचारिकता नहीं बरती जाती लेकिन फिर भी बहुत से नियमों का पालन आज भी किया जाता है.

जैसे बात-बात में प्लीज़ और थैंक यू का प्रयोग, किसी के लिए दरवाज़ा खोलना, किसी महिला से पहले दरवाज़े से दाख़िल न होना, किसी की निजी ज़िंदगी के बारे में सवाल न करना, मुंह में खाना भरकर न बोलना, ज़ोर से न बोलना, किसी को न घूरना.

एक सुबह मैं होस्टल की कैंटीन में नाश्ता करने पहुँची तो मैंने काउंटर पर खड़ी एक महिला से टोस्ट और उबला अंडा मांगा. उसने मेरी बात सुनकर अनसुनी कर दी और दूसरों की फ़रमाइश पूरा करने में लग गई.

मुझे बड़ा अटपटा लगा. मैंने एक बार फिर कोशिश की तो वह मुझे कुछ पल देखती रही. मैंने सोचा कि मेरी अंग्रेज़ी ठीक-ठाक है, फिर इसे मेरी बात समझ में क्यों नहीं आ रही.

इस बार मैंने धीरे-धीरे अपनी बात कही. कुछ रुककर वह बोली प्लीज़....तब मेरी समझ में आया कि वह क्या चाहती है. मुझे कहना चाहिए था क्या आप मुझे टोस्ट और उबला अंडा देंगी...प्लीज़..

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'टेम्स यानी तमस'

दुनिया के सभी प्रमुख शहरों की तरह लंदन भी एक नदी किनारे बसा है. इस नदी को टेम्स कहा जाता है.

टेस्म कभी व्यस्त जलमार्ग हुआ करता था

यह चैल्थनम में सेवेन स्प्रिंग्स से निकलती है और ऑक्सफ़र्ड, रैडिंग, मेडनहैड, विंड्सर, ईटन, लंदन जैसे शहरों से होती हुई 346 किलोमीटर की यात्रा पूरी करके इंगलिश चैनल में जा गिरती है.

अठ्ठारहवीं शताब्दी में यह दुनिया का सबसे व्यस्त जल मार्ग हुआ करता था. यहाँ तक कि इसमें जहाज़ तक चला करते थे. लेकिन जानते हैं इसका नाम टेम्स कैसे पडा.

अधिकांश विद्वानों का मानना है कि टेम्स शब्द कैल्टिक भाषा के तमस शब्द से बना जिसका अर्थ है काला या अंधकारमय. संस्कृत में भी तमस का यही अर्थ है. हैरान हो गए न.....मैं भी हुई थी.

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