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घड़ी का आविष्कार कब, कैसे और कहाँ?
 

 
 
टिक-टिक घड़ी
घड़ी ने लंबा सफ़र तय किया है
घड़ी का इस्तेमाल हम रोज़ करते हैं, सांचोर जालौर से नरेश कुमार पँवार पूछते हैं कि घड़ी का आविष्कार किसने, कब और किस देश में किया?

सूरज की छाया का उपयोग कर समय बताने वाली घड़ियाँ शायद हमने भारत में लंबे समय से देखी हैं. लगभग सवा दो हज़ार साल पहले प्राचीन यूनान यानी ग्रीस में पानी से चलने वाली अलार्म घड़ियाँ हुआ करती थीं जिममें पानी के गिरते स्तर के साथ तय समय बाद घंटी बज जाती थी. लेकिन आधुनिक घड़ी के आविष्कार का मामला कुछ पेचीदा है. घड़ी की मिनट वाली सुई का आविष्कार किया वर्ष 1577 में स्विट्ज़रलैंड के जॉस बर्गी ने अपने एक खगोलशास्त्री मित्र के लिए. उनसे पहले जर्मनी के न्यूरमबर्ग शहर में पीटर हेनलेन ने ऐसी घड़ी बना ली थी जिसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया सके. लेकिन जिस तरह हम आज हाथ में घड़ी पहनते हैं वैसी पहली घड़ी पहनने वाले आदमी थे जाने माने फ़्राँसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज़ पास्कल. ये वही ब्लेज़ पास्कल हैं जिन्हें कैलकुलेटर का आविष्कारक भी माना जाता है. लगभग 1650 के आसपास लोग घड़ी जेब में रखकर घूमते थे, ब्लेज़ पास्कल ने एक रस्सी से इस घड़ी को हथेली में बाँध लिया ताकि वो काम करते समय घड़ी देख सकें, उनके कई साथियों ने उनका मज़ाक भी उड़ाया लेकिन आज हम सब हाथ में घड़ी पहनते हैं.

बरम्यूडा ट्राऐंगिल

मॉन्ट्रिएल कनाडा से बॉबी ने और कैलिफ़ोर्निया अमरीका से नवनीत सिंह ने सवाल भेजा है. वे पूछते हैं कि बरम्यूडा ट्राऐंगिल क्या है.

यह अटलांटिक महासागर का एक काल्पनिक क्षेत्र है जहां बहुत से जहाज़, नौकाएं और विमान रहस्यमय परिस्थितियों में ग़ायब होते रहे हैं. अगर आप विश्व का मानचित्र देखें और बरम्यूडा द्वीप, पोर्तो रिको और अमरीका के फ़्लोरिडा राज्य के दक्षिणी कोने को सीधी रेखाओं से जोड़ें तो कोई चालीस लाख किलोमीटर का एक त्रिकोणीय क्षेत्र बनता है. इसी को बरम्यूडा त्रिकोण कहते हैं. ऐसे दावे किए गए हैं कि यह ख़तरनाक क्षेत्र है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यहां हुई दुर्घटनाओँ की संख्या किसी अन्य क्षेत्र से अधिक नहीं है और इन्हें बढ़ा चढ़ाकर बताया गया है. जहां तक रहस्यम परिस्थितियों का सवाल है तो उसकी भी व्याख्या की गई है. अमरीका के भूविज्ञान सर्वेक्षण का कहना है कि यहां मीथेन हाइड्रेट्स के क्षेत्र हैं जिनसे जब-तब मीथेन गैस के विशाल बुलबुले निकलते हैं. इनका परिणाम यह होता है कि पानी झागदार हो जाता है जो जहाज़ों को तैरने देने योग्य नहीं रहता और जहाज़ बड़ी तेज़ी से डूब सकता है. मीथेन गैस से विमान दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं क्योंकि मीथेन का घनत्व हवा जितना नहीं होता और विमान टिका नहीं रह पाता. इसके अलावा समुद्र में कभी कभी सौ फ़िट ऊंची लहरें भी उठ सकती हैं जो किसी भी जहाज़ को डुबा सकती हैं.

होमियोपैथी

रहमान गंज, किशनगंज बिहार से नारायण कुमार और गीता देवी पूछते हैं कि होमियोपैथी के जनक का पूरा नाम क्या है और वे कहां के निवासी थे.

होमियोपैथी के जनक का पूरा नाम है क्रिस्चियन फ़्रैड्रिक सैम्युअल हानेमेन. उनका जन्म 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी के सैक्सनी इलाक़े में एक साधारण परिवार में हुआ. छोटी उम्र में ही उन्होंने ग्रीक, लैटिन, फ़्रांसीसी, अंग्रेज़ी और इतालवी भाषाएँ सीख ली थीं. उसके बाद उन्होंने लाइपज़िग विश्वविद्यालय से चिकित्सा की पढ़ाई की. सन 1810 में हानेमेन ने द ऑरगेनन ऑफ़ मैडिकल आर्ट पुस्तक प्रकाशित की जिसमें होमियोपैथी के सिद्धांत प्रतिपादित किए.

पहला बजट

चौहटन, ज़िला बाढ़मेर राजस्थान से हीराराम शाम्भू और रेखाराम सियाग पूछते हैं कि भारत का पहला वित्त बजट किसने पेश किया था और बजट में लगाए गए कर किस तारीख़ से लागू होते हैं?

भारत का पहला बजट 26 नवम्बर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आर के षणमुखम शेट्टी ने पेश किया था. 15 अगस्त को भारत को आज़ादी मिलने के बाद का यह एक अन्तरिम बजट था और इसकी विशेषता यह थी कि इसमें अंग्रेज़ों से मिले हिसाब का मात्र लेखा-जोखा था, इसमें भविष्य की कोई योजना नहीं थी. दूसरे सवाल का जवाब ये है कि नया बजट हर साल एक अप्रेल से लागू होता है और इस तरह बढ़ाए गए कर भी उसी दिन लागू होते हैं.

कंप्यूटर

कंप्यूटर का आविष्कार किसने किया – ये पूछते हैं प्रभात कुमार महाराज ग्राम अजनौली मधुबनी बिहार से.

लैपटॉप कंप्यूटर
अब तो तरह-तरह के कंप्यूटर प्रयोग किए जा रहे हैं

आधुनिक कंप्यूटर का आविष्कार किसने किया इसका कोई सीधा सरल उत्तर नहीं है क्योंकि बहुत से आविष्कारकों ने इस तकनीक के विकास में योगदान किया. कंप्यूटर के विकास की शुरुआत 1936 में कॉनरैड ज़ूस नामक एक जर्मन वैज्ञानिक ने की. तब कंप्यूटर काफ़ी बड़ा था इससे एक कमरा भर जाता था. धीरे-धीरे वैज्ञानिकों ने इसे छोटा बनाया और आज ऐसे कंप्यूटर भी हैं जिन्हें आप अपने हाथ में लेकर इस्तेमाल कर सकते हैं.

मैक्स म्युलर

नई दिल्ली से प्रभात चंद्र बोस लिखते हैं – मैक्स म्युलर के बारे में बताइए. ऐसा कहा जाता है कि भारत के बारे में उन्होंने बहुत लिखा, लेकिन वे कभी भारत नहीं आए.

मैक्स म्युलर जर्मनी के थे और इनके बारे में स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि पश्चिमी दुनिया में अगर किसी ने वेदांत के मर्म को समझा है तो वो हैं मैक्स म्युलर. मैक्स म्युलर 6 दिसंबर 1823 को पैदा हुए थे और उनकी मौत हुई वर्ष 1900 में लेकिन 16 साल की उम्र से ही उनकी संस्कृत में गहरी रुचि पैदा हो गई थी और इसी की वजह से मैक्स म्युलर ने सेक्रेड बुक्स ऑफ़ द ईस्ट के नाम से 50 खंड लिखे हैं जिनमें शामिल है ऋग्वेद का भाष्य और उपनिषदों के अनुवाद. मैक्स म्युलर के पिता विल्हेम म्युलर श्रंगार रस के कवि थे और उनकी माँ जर्मनी के एक प्रांत के मुख्यमंत्री की बेटी थीं. मैक्स म्युलर ने संस्कृत के अलावा फ़ारसी और अरबी भी पढ़ी. उन्होंने भारतीय धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटेन लाए गए दस्तावेज़ों, ब्रह्मसमाज के भारतीय सदस्यों और ऑक्सफ़ोर्ड जैसे जाने माने विश्वविद्यालयो में अन्य यूरोपीय विद्वानों के साथ मिलकर किया. कुछ हिंदू लेखकों ने मैक्स म्युलर की ईसाई धर्म को हिंदू धर्म से बेहतर बताने की कोशिश करने वाला कहकर आलोचना की है तो कई ईसाई धर्मगुरुओं ने उनके जीवनकाल में उन्हें ईसाइयों के ख़िलाफ़ बताया था. लेकिन भारत के बारे में मैक्सम्युलर ने लिखा है, “अगर कोई मुझसे पूछे कि प्रकृति प्रदत्त गुणों का किस मानव मस्तिष्क ने सबसे बेहतर उपयोग किया है, किसने जीवन की सबसे बड़ी समस्याओं का गहराई से अध्ययन किया है – और वो कौन है जिसके साहित्य और ज्ञान को प्लेटो और कांट के दर्शन को समझने वालों को भी पढ़ना चाहिए, तो मैं उसे भारत का रास्ता बताऊँगा.”

 
 
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