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शनिवार, 19 मई, 2007 को 10:53 GMT तक के समाचार
 
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'इराक़ हमले में शामिल होने का खेद नहीं'
 
जलाल तालबानी, टोनी ब्लेयर और नूरी अल मलिकी
टोनी ब्लेयर ने तालबानी का बचाव किया
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि उन्हें सद्दाम हुसैन को अपदस्थ करने के लिए अमरीका के नेतृत्व में हुए हमले में शामिल होने के फ़ैसले पर कोई खेद नहीं.

अगले महीने अपना पद छोड़ रहे ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर शनिवार को अचानक इराक़ पहुँच गए. बग़दाद में उन्होंने इराक़ी राष्ट्रपति जलाल तालबानी और प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी से बातचीत की.

ब्रितानी प्रधानमंत्री के रूप में टोनी ब्लेयर की ये आख़िरी इराक़ यात्रा है. ब्लेयर के बग़दाद पहुँचने के कुछ ही समय पहले अति सुरक्षित ग्रीन ज़ोन में तीन धमाके हुए.

इराक़ी नेताओं के साथ बातचीत के बाद ब्लेयर ने कहा कि उन्होंने इराक़ में शिया और सुन्नी गुटों के बीच मेल-मिलाप पर ज़ोर दिया.

जानकारों का कहना है कि ब्लेयर इराक़ी सरकार को ये भी भरोसा दिलाना चाहते हैं कि उनके प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद भी इराक़ को ब्रिटेन का समर्थन बंद नहीं होगा.

बदलाव

उन्होंने कहा, "मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि इराक़ी सरकार और इराक़ी जनता के लिए ब्रिटेन का समर्थन आगे भी जारी रहेगा." पत्रकारों से बात करते हुए इराक़ी राष्ट्रपति जलाल तालबानी ने कहा कि इराक़ की स्थिति पहले से बदतर नहीं हुई है.

 मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि इराक़ी सरकार और इराक़ी जनता के लिए ब्रिटेन का समर्थन आगे भी जारी रहेगा
 
टोनी ब्लेयर

लेकिन जब पत्रकारों ने तालबानी को इस मुद्दे पर घेरना शुरू किया तो ब्लेयर ने कहा, "आप लोग इस व्यक्ति को क्यों नहीं सुनना चाहते. ये इराक़ के राष्ट्रपति हैं. वे यह नहीं कह रहे कि इराक़ में हिंसा या आतंकवाद नहीं हैं, वे यह कहना चाह रहे हैं कि स्थिति में बदलाव भी हुआ है."

प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान टोनी ब्लेयर को इराक़ के मुद्दे पर सबसे ज़्यादा सवालों का सामना करना पड़ा है. हाल ही में ऑब्जर्वर अख़बार ने एक सर्वेक्षण करवाया था, जिसमें शामिल 58 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि इराक़ पर हमला करना ग़लती थी.

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने भी एक इंटरव्यू में टोनी ब्लेयर की इस बात के लिए आलोचना की कि उन्होंने इराक़ युद्ध को आँख मूँदकर समर्थन दिया.

इराक़ में ब्रितानी सैनिकों के नियंत्रण वाले बसरा शहर में भी हिंसा बढ़ने से सरकार पर सैनिकों को वापस बुलाने का दबाव बढ़ा है. सिर्फ़ अप्रैल में वहाँ 12 ब्रितानी सैनिक मारे गए.

 
 
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