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बिजली की कड़कड़ाहट...
 

 
 
बिजली का कड़कना
बिजली का कड़कना कभी-कभी बेहद ख़तरनाक भी हो सकता है
आसमान में जो बिजली कड़कती है ये कैसे पैदा होती है, कितने वोल्ट की होती है और इसमें आवाज़ कब पैदा होती है. यह सवाल पूछा है कमलेश कुमार ने ग्राम लोहापीपर, औरंगाबाद बिहार से.

बिजली आमतौर से गरजदार तूफ़ान के दौरान पैदा होती है. बादल जब काफ़ी ऊँचाई पर पहुंच जाते हैं तो वहां तापमान बहुत कम होता है. उस समय आधे जमे पानी के कणों का घनात्मक और ऋणात्मक चार्ज बदलने लगता है. इस बदलाव की प्रक्रिया में ये कण आपस में टकराते हैं और चिंगारी पैदा होती है. इसी को हम बिजली कहते हैं. ये 10 करोड़ वोल्ट तक की हो सकती है. ये बिजली बादलों के बीच में पैदा हो सकती है, बादलों और हवा के बीच या फिर बादलों और ज़मीन के बीच. इस बिजली का तापमान 50 हज़ार डिग्री फ़ैरनहाइट तक का हो सकता है. जो सूर्य की सतह के तापमान से भी अधिक है. इसलिए अगर यह ज़मीन पर किसी से टकरा जाए तो उसे तुरंत भस्म कर देती है. बिजली बहुत तेज़ी से हवा को गर्म करती है जिससे वह अचानक फैलती है और फिर सिकुड़ती है. इससे विस्फोट होता है और ध्वनि तरंगें पैदा होती हैं. इसी को हम बादलों के गर्जन के रूप में सुनते हैं. प्रकाश एक लाख 86 हज़ार मील प्रति सैकेंड की रफ़्तार से चलता है जबकि ध्वनि एक सैकेंड में 352 गज़ की गति से, इसलिए हमें बिजली कड़कती पहले दिखाई देती है और गरज उसके बाद सुनाई देती है.

गंगा की सफ़ाई

नागपुर से अजित कुमार लिखते हैं कि क्या कोई ग़ैर सरकारी संस्था है जो गंगा की सफ़ाई के लिए काम कर रही है. अगर हां तो उसका क्या नाम है.

अजित कुमार जी गंगा करोड़ों का जीवन स्रोत है और कई ग़ैर सरकारी संगठन उसकी सफ़ाई के अभियान में किसी न किसी रूप में लगे हैं. इन्ही में से एक है वाराणसी का संकट मोचन फ़ाउंडेशन, जिसने 1982 में सरकार के सामने गंगा के प्रदूषण की समस्या रखी.

होलोकॉस्ट

ग्राम खालिसपुर, आज़मगढ़ उत्तर प्रदेश से मोहम्मद अशहद ख़ान आज़मी ने पूछा है कि होलोकॉस्ट से क्या अभिप्राय है.

दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान नात्ज़ी जर्मनी और उसके सहयोगियों द्वारा, यूरोप और उत्तरी अफ़्रीका के अल्पसंख्यकों की सामूहिक हत्या के लिए, इस शब्द का प्रयोग किया जाता है. इस जाति संहार के सबसे बड़े शिकार हुए यूरोप के यहूदी. जर्मनी के शासक हिटलर और उनकी नात्ज़ी पार्टी ने, यहूदियों की समस्या के अंतिम हल के रूप में, उनका सफ़ाया किया. यह कहा जाता है कि कोई 60 लाख यहूदी मारे गए. जबकि इतिहासकारों ने, स्वयं नात्ज़ी सरकार के रेकार्डों के आधार पर यह संख्या 50 से 70 लाख के बीच बताई है. यहूदियों के अलावा दो लाख बीस हज़ार सिन्ती और रोमा जाति के लोग भी मारे गए. नात्ज़ी सत्ता जिन्हे जातीय स्तर पर हीन समझती थी उन्ही की छंटनी हुई. इनमें 60 लाख पोलिश, कोई 5 लाख सर्ब, मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम लोग, समलैंगिक, काले, साम्यवादी, ईसाई पादरी भी शामिल थे.

उल्टी गिनती

दिल्ली के कैलाश चंद,पिथौरागढ़ उत्तरांचल से हर्षवर्द्धन पांडेय और झंझरपुर पुवारी टोला बिहार से बाघेश्वर रॉय ने पूछा है कि किसी अंतरिक्ष यान या किसी मिसाइल के प्रक्षेपण से पहले उल्टी गिनती क्यों गिनी जाती है.

चीन का अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र
अंतरिक्ष में यान भेजने के लिए उल्टी गिनती होती है

किसी भी अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण से पहले कई चरणों में जांच की जाती है. लगभग तीस-चालीस घंटे पहले से यह उलटी गिनती शुरु हो जाती है. कुछ ऐसी चीज़ें हैं जो अगर तीस घंटे पहले ठीक से नहीं चल रहीं तो प्रक्षेपण को वहीं रोक देना उचित होता है. इसी तरह कुछ चीज़ें प्रक्षेपण के तीन घंटे पहले, बारह मिनट पहले, दो मिनट पहले जांची जाती हैं. कुछ ऐसी चीज़ें होती है जो दो सैकेंड पहले चलनी चाहिए और कई बार ऐसा हुआ है कि एक सैकैन्ड पहले प्रक्षेपण रोक दिया गया. क्योंकि अगर उस समय वह ठीक से काम नहीं कर रही तो प्रक्षेपण करना सुरक्षित नहीं होगा.

वन डे मैच

क्रिकेट का वन डे मैच कब शुरु हुए और सबसे पहले किन दो टीमों के बीच खेला गया. सिरसा हरियाणा से सुरेश बरनवाल.

वन डे क्रिकेट की शुरुआत इंगलैंड की काउन्टी टीमों के बीच 2 मई 1962 में हुई, जिसमें 65 ओवरों के मैच में लैस्टरशैयर ने डार्बिशैयर को हराया और नौर्थहैम्प्टनशैयर ने नौटिंघमशैयर को मात दी. लेकिन सीमित ओवरों के अन्तर्राष्ट्रीय मैचों की शुरुआत 1971 में मैल्बोर्न ऑस्ट्रेलिया में हुई.

हाशिया

कॉपी के पन्ने पर बाईं तरफ़ हाशिया क्यों छोड़ा जाता है. ग्राम पांडेयपुर, बलिया उत्तर प्रदेश से राजीव कुमार पांडेय.

इसलिए जिससे उस जगह में कोई टिप्पणी लिखी जा सके. और ये हाशिया बाईं तरफ़ इसलिए होता है क्योंकि हम बाईं से दाईं ओर लिखते हैं. जो भाषाएँ दाईं से बाईं ओर लिखी जाती हैं जैसे उर्दू, फ़ारसी और अरबी उनके लिए हाशिया दाईं तरफ़ रहता है.

चैक

चैक बाउंस होने का क्या मतलब है. जानना चाहते हैं भिरदौल अररिया बिहार से धीरेन्द्र मंडल.

मान लीजिए एक व्यक्ति ने अमुक राशि की अदायगी के लिए आपको चैक दिया. आपने उसे अपने खाते में जमा कराया लेकिन वह वापस आ गया यानि आपके खाते में पैसा जमा नहीं हो पाए. इसे चैक बाउन्स होना कहते हैं. ऐसा कई परिस्थितियों में हो सकता है. उदाहरण के लिए जिस व्यक्ति ने चैक दिया उसके हस्ताक्षर उसके खाते में दिखाए गए हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते, चैक पर तारीख़ सही नहीं है या आपका नाम ठीक से नहीं लिखा है या जो राशि लिखी है वह अक्षरों में कुछ और संख्या में कुछ और है या चैक पर बैंक खाते का नंबर नहीं है. ये सब तो हुए तकनीकी कारण लेकिन एक बहुत बड़ा कारण ये होता है कि जिस व्यक्ति ने चैक दिया है उसके खाते में पर्याप्त धन ही नहीं है.

 
 
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