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शुक्रवार, 15 जून, 2007 को 17:31 GMT तक के समाचार
 
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गाँधी जयंती अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस
 

 
 
महात्मा गाँधी
बापू के जन्मदिन हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाएगा
भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जन्मदिवस को संयुक्त राष्ट्र ने हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का फ़ैसला किया है.

बापू का जन्मदिन 2 अक्तूबर को मनाया जाता है.

अहिंसा की नीति के ज़रिए विश्व भर में शांति के संदेश को बढ़ावा देने के महात्मा गांधी के योगदान को सराहने के लिए ही इस दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का फ़ैसला किया गया है.

इस सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के रखे गए प्रस्ताव का भरपूर समर्थन किया गया.

 इस प्रस्ताव को भारी संख्या में सदस्य देशों का समर्थन मिलना विश्व में आज भी गांधी जी के प्रति सम्मान और उनकी अहिंसा की नीति की प्रासंगिकता को दर्शाता है
 
आनंद शर्मा

महासभा के कुल 191 सदस्य देशों में से 140 से भी ज़्यादा देशों ने इस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया. इनमें अफ़गानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान जैसे भारत के पड़ोसी देशों के अलावा अफ़्रीका और अमीरका महाद्वीप के कई देश भी शामिल हैं.

मौजूदा विश्व व्यवस्था में अहिंसा की सार्थकता को मानते हुए बिना वोटिंग के ही सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया.

गाँधी की प्रासंगिकता

भारत के विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रसताव पेश किया.

महासभा में अपने भाषण के दौरान मंत्री ने कहा, “इस प्रस्ताव को भारी संख्या में सदस्य देशों द्वारा सह-प्रायोजित किया जाना विश्व में आज भी गांधी जी के प्रति सम्मान और उनकी अहिंसा की नीति की प्रासंगिकता को दर्शाता है.”

उनका कहना था कि महात्मा गांधी की इस नीति ने साम्राज्यवाद को भारत से उखाड़ फेंकने में अहम भूमिका निभाई थी और मार्टिन लूथर किंग, बादशाह खान और नेलसन मंडेला जैसे मानवाधिकार की लड़ाई लड़ने वालों ने गांधी जी की इस नीति से सीख ली थी.

इस साल 2 अक्तूबर का दिन पहली बार अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाएगा.

यह प्रस्ताव इस बात पर ज़ोर देता है कि अहिंसा का मतलब सभी के मानवाधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रता का सम्मान करना है.

 हमें बड़ी खुशी है कि संयुक्त राष्ट्र ने ऐसा महत्वूपर्ण निर्णय लिया है. इससे बढ़ कर और कोई उचित निर्णय नहीं हो सकता था
 
निर्मला देशपांडे

इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों, गैर सरकारी संगठनों और आम लोगों को भी दावत दी गई है कि वह अहिंसा दिवस को धूमधाम से मनाएं और इस संदेश को शिक्षा और जनजागरण के ज़रिए लोगों में फैलाएं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव से भी अनुरोध किया गया है कि वह ऐसे संसाधन मुहैया कराएँ जिससे संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न विभागों के ज़रिए सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाने में आसानी हो.

सराहनीय फ़ैसला

गाँधीवादी नेता निर्मला देशपांडे ने संयुक्त राष्ट्र के इस फ़ैसले पर खुशी जताई है.

उन्होंने कहा, "हमें बड़ी खुशी है कि संयुक्त राष्ट्र ने ऐसा महत्वूपर्ण निर्णय लिया है. इससे बढ़ कर और कोई उचित निर्णय नहीं हो सकता था. इस युग में वो न सिर्फ़ अहिंसा के महीसा हैं बल्कि अहिंसा में उन्होंने नई जान डाल दी है."

उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले से विश्व पटल पर भारत का कद भी बढ़ गया है.

निर्मला देशपांडे ने कहा कि सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में ही बापू के जन्मदिन को अहिंसा दिवस के रुप में मनाने का प्रस्ताव आया था जिसे संयुक्त राष्ट्र ने स्वीकार कर लिया.

 
 
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