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शुक्रवार, 15 जून, 2007 को 04:24 GMT तक के समाचार

'कुछ भी' पीकर जान गँवा रहे हैं रूसी

एक अध्ययन से पता चला है कि रुसी लोग नशे के लिए कुछ भी पीकर अपनी जान ख़तरे में डाल रहे हैं. इसमें आफ़्टरशेव और यूडी कोलोन शामिल है.

ब्रितानी शोधकर्ताओं के अध्ययन के अनुसार मरने वाले कामकाजी लोगों में से लगभग आधे लोगों की मौत किसी हानिकारक पदार्थ पीने से होती है.

शोध में पाया गया कि लोग जो कुछ पी रहे हैं उनमें औषधि के रुप में मिलने वाले घोल भी शामिल हैं. ये दवाई की दुकानों में मिलते हैं. ये सस्ते होते हैं और इनमें अल्कोहल की मात्रा बहुत अधिक होती है. कभी-कभी 97 प्रतिशत तक.

हालांकि यह बहुत कम ज़हरीला होता है लेकिन अल्कोहल की मात्रा अधिक होने के कारण ख़तरनाक होता है.

उल्लेखनीय है कि रूस में पुरुषों की औसत आयु 59 साल है जबकि महिलाओं की औसत आयु 72 वर्ष है.

एक तथ्य यह भी है कि ब्रिटेन की तुलना में रुस में कामकाजी पुरुषों के मारे जाने की आशंका साढ़े तीन गुना ज़्यादा होती है.

इससे पहले शोध में यह ज़ाहिर हो चुका है कि रुसी लोगों में अल्कोहल की ख़पत बहुत अधिक है. इसके लिए सबसे लोकप्रिय वोदका है.

'लंदन स्कूल ऑफ़ हाईजीन एँड ट्रॉपिकल मेडिसिन' की एक टीम चाहती थी उन लोगों पर शोध किया जाए जो ऐसा अल्कोहल पीते हैं जिसे पेय के रुप में इस्तेमाल नहीं किया जाता.

टीम ने 1,750 मौतों का अध्ययन किया. मौत के वक़्त उनकी उम्र 25 से 54 साल के बीच थी.

यह शोध वर्ष 2003 से 2005 के बीच ऊरल के पहाड़ों में एक ठेठ रूसी शहर में किया गया.

मौत का कारण

शोध में पाया गया कि 43 प्रतिशत मौतों का कारण बीयर, वाइन या दूसरी शराब बहुत अधिक मात्रा में पीना था. इसमें ग़ैर-पेय अल्कोहल भी शामिल है.

पाया गया कि ऐसे लोग जो बहुत अधिक शराब या ग़ैर-पेय अल्कोहल पी रहे थे, उनके मरने की आशंका शराब न पीने वाले या सीमित मात्रा में पीने वालों से छह गुना अधिक थी.

ग़ैर-अल्कोहल पीने वालों के मरने की आशंका न पीने वालों की तुलना में नौ गुना अधिक पाई गई.

प्रमुख शोधकर्ता डेविड लियोन का कहना है, "जब हम न पीने लायक़ अल्कोहल की बात करते हैं तो हमारा मतलब होता है यूडी कोलोन और आफ़्टरशेव आदि से."

उनका कहना है, "ये पदार्थ आसानी से मिलते हैं और सस्ते होते हैं क्योंकि इन पर टैक्स नहीं लगता."

शोधकर्ताओं का कहना है कि मरने वालों की संख्या और अधिक भी हो सकती है क्योंकि अध्ययन में सिर्फ़ परिवार के साथ रहने वाले पुरुषों को शामिल किया गया था.

इंस्टीट्यूट ऑफ़ अल्कोहल स्टडीज़ के निदेशक एंड्यू मैकनील का कहना है कि वैसे भी शराबखोरी पूर्वी यूरोप की आम समस्या है.

"कम्युनिस्ट शासन के दौरान शराब ही इतनी सस्ती चीज़ थी जिसे सब लोग ख़रीद सकते थे. गोर्बाचोव ने शराब की ख़पत को नियंत्रित करने की कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं हो सके."

उनका कहना है कि हाल के बरसों में अल्कोहल की खपत बढ़ी है और इसका संबंध आर्थिक विकास से भी है.