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क़दमचाल
स्वस्थ रहने के लिए एक दिन में दस हज़ार क़दम चलना चाहिए
पीडोमीटर क्या होता है. यह किस सिद्धांत पर और कैसे काम करता है और कहां से मिल सकता है. जानना चाहते हैं ग्राम जाफ़रख़ानी शेरवां, मिर्ज़ापुर उत्तर प्रदेश से प्रभाकर विश्वकर्मा.

पीडोमीटर एक ऐसा उपकरण है जो यह मापता है कि आप कितने क़दम चले यानी इसे क़दम चाल मापने वाला उपकरण भी कहा जा सकता है. शुरू में इसका प्रयोग खिलाड़ी किया करते थे लेकिन अब और लोग भी इसका प्रयोग करने लगे हैं. यह एक छोटा सा उपकरण होता है जिसे कमरबंद या पतलून में खोंस लिया जाता है और दिन भर पहना जाता है. एक दिन में एक औसत व्यक्ति तीन से चार हज़ार क़दम चलता है. जबकि कहते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए उसे 10 हज़ार क़दम चलना चाहिए जो क़रीब चार पाँच किलोमीटर के बराबर हुआ. अधिकांश पीडोमीटरों में स्प्रिंग से जुड़ी एक नन्ही सी समतल सुंई लगी रहती है जो व्यक्ति के चलने पर ऊपर नीचे होती है और उसके क़दम दर्ज करती जाती है. जबकि इलैक्ट्रॉनिक पीडोमीटर यह काम व्यक्ति के पैर ज़मीन पर पड़ने से ही कर लेता है. आमतौर पर जिन दुकानों पर खेल कूद का सामान मिलता है वहां पीडोमीटर मिल जाना चाहिए. नहीं तो इंटरनेट के ज़रिए भी इसे ख़रीदा जा सकता है.

भारतीय रिज़र्व बैंक में सीआरआर या नक़द आरक्षण अनुपात क्या होता है. यह सवाल लिख भेजा है बीकानेर राजस्थान से बलराम गोदारा ने.

सीआरआर या कैश रिज़र्व रेशो वह आनुपातिक राशि है जो बैंको से ली जाती है. जिससे खातेदार के पैसे की सुरक्षा बनी रहे. इस समय सीआरआर 15 प्रतिशत है जिसका मतलब ये हुआ कि अगर बैंक के पास सौ रुपए जमा होते हैं तो उसमें से पंद्रह रुपए वह भारतीय रिज़र्व बैंक के पास जमा करा देता है. यानी इन पंद्रह रुपए का निवेश नहीं होता वे वित्तीय बाज़ारों से बाहर हो जाते हैं. अगर बैंक सौ रुपए लेता है तो उससे कई गुना अधिक निवेश कर सकता है इसलिए अगर किसी समय बैंक मुश्किल में आ जाए तो ये पंद्रह रुपए तो सुरक्षित रखे ही हैं. हालांकि खातेदार के एक लाख रुपए का बीमा होता है. जहां तक देश की अर्थ व्यवस्था का सवाल है अगर मुद्रास्फीति बढ़ जाती है तो भारतीय रिज़र्व बैंक कैश रिज़र्व रेशो भी बढ़ा देता है ताकि और अधिक रुपया सुरक्षित हो सके और बैंक उसी अनुपात में कम उधार दे सकें. इससे मुद्रा स्फीति अपने आप कम हो जाती है.

कानपुर उत्तर प्रदेश की प्रतिभा शर्मा ने पूछा है कि वादा बाज़ार क्या होता है.

ऐसा बाज़ार जो किसी भावी वादे पर आधारित हो उसे वादा बाज़ार कहते हैं. बाज़ार दो तरह का होता है एक वह जिसमें आप जिस समय कोई सौदा करते हैं उसी समय उसकी रक़म अदा करके माल ले लेते हैं. दूसरा वह जिसमें ख़रीदार और विक्रेता भविष्य की किसी तारीख़ के लिए निश्चित राशि पर किसी उत्पाद, मुद्रा या अन्य पदार्थ का सौदा तय करते हैं. इससे उत्पादकों और उपभोक्ताओं को भावी योजना बनाने में सहूलियत होती है और वे भविष्य में दाम बढ़ने या घटने के ख़तरे से बच जाते हैं.

गरम मसाले में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी क्या किसी पेड़ या पौधे की छाल होती है. ये कहां पाए जाते हैं. पूछते हैं रामनगर, चतरा झारखंड से डॉ हर्षदेव गुप्ता.

भारतीय मसाले
भारतीय मसालों में दालचीनी की भी ख़ास जगह है

जी हां दालचीनी, Lauraeae जाति के एक छोटे सदाबहार पेड़ की भीतरी छाल से बनती है. सबसे अच्छी दालचीनी श्रीलंका से आती है लेकिन यह पेड़ दक्षिण भारत, जावा, सुमात्रा, वियतनाम, मैडागास्कर, ज़न्ज़ीबार, मिस्र, वेस्ट इंडीज़ और ब्राज़ील में भी होते हैं. यह पेड़ जब बड़ा होता है तो इसकी जड़ से दर्जनों डालियां निकलती हैं. उनकी ऊपरी छाल उतार दी जाती है और उसे सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है. इस छाल के भीतरी हिस्से से ही बनती है दालचीनी. दालचीनी का प्रयोग तरह-तरह के खानों में किया जाता है. प्राचीन सभ्यताओं से ही दालचीनी का इस्तेमाल होता रहा है. ईसा से कोई 2000 साल पहले चीन से इसे मिस्र ले जाया गया. प्राचीन रोम में इसका इस्तेमाल जलती चिता में किया जाता था. कहते हैं रोम के राजा नीरो ने अपनी पत्नी की चिता में ढेरों दालचीनी जलाई थी. उस समय यह सोने से ज़्यादा क़ीमती मानी जाती थी. बाइबिल में भी इसका ज़िक्र मिलता है. दालचीनी के ओषधीय गुण भी बहुत हैं. यह सर्दी और पेचिश में उपयोगी समझी जाती है. हाल के अध्ययन कहते हैं कि दालचीनी के नियमित प्रयोग से डायबेटीज़ और कोलैस्टरॉल पर नियन्त्रण किया जा सकता है.

इटली से गौतम ने पूछा है कि दुनिया के कितने हिस्से में पानी है और कितने में घर बने हैं.

पृथ्वी के 70 प्रतिशत हिस्से में पानी है और बाक़ी 30 प्रतिशत ज़मीन है. लेकिन सब जगह घर नहीं बने हुए हैं.

संयुक्त अरब अमीरात से रहीश सिंह राणा पूछते हैं कि सूरज पृथ्वी से कितना बड़ा है.

पृथ्वी का व्यास है 7900 मील जबकि सूर्य का व्यास 862400 मील है. इस हिसाब से सूर्य का आकार पृथ्वी से 100 गुना से भी ज़्यादा हुआ.

सबसे ज़्यादा गहराई किस समुद्र की है. पूछते हैं फ़रीदाबाद हरियाणा से कपिल मित्तल.

सबसे गहरा समुद्र प्रशान्त महासागर है जिसकी औसत गहराई 12925 फ़िट है. और इसका सबसे गहरा हिस्सा है मरिआना ट्रैन्च जिसकी गहराई 35839 फ़िट है. यूं समझिए कि अगर ऐवरैस्ट पर्वत को इसमें खड़ा कर दिया जाए तो उसके कोई सवा मील ऊपर तक पानी होगा.

 
 
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