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मंगलवार, 11 सितंबर, 2007 को 10:45 GMT तक के समाचार
 
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ख़ासा पौष्टिक है 'ग़रीब का मेवा'
 

 
 
ग़रीब का मेवा - मूंगफली
मूंगफली में अनेक विटामिन भी होते हैं
क्या मूंगफली में विटामिन और खनिज होते हैं. नई दिल्ली से शिल्पा ने यह सवाल पूछा है.

मूंगफली को ग़रीब की मेवा कहा जाता है. इसमें प्रोटीन और मोनो सैच्युरेटेड चर्बी बड़ी मात्रा में पाई जाती है. इसके अलावा कुछ ऐसे रसायन भी पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं. सौ ग्राम मूंगफली में 22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 50 ग्राम चर्बी और 24 ग्राम प्रोटीन होता है. यूं तो 50 ग्राम चर्बी बहुत हुई लेकिन इसमें सैच्युरेटिड चर्बी मात्र 7 ग्राम होती है, जबकि मोनो सैच्युरेटिड चर्बी 25 ग्राम और पॉली सैच्युरेटिड 16 ग्राम होती है. सैच्युरेटेड चर्बी दिल के लिए नुकसानदेह है क्योंकि इससे ख़राब कोलैस्टरॉल बढ़ता है जबकि मोनो सैच्युरेटिड और पॉली सैच्युरेटिड चर्बी अच्छा कोलैस्टरॉल बढ़ाती है.

डायबेटीज़ या मधुमेह बीमारी के क्या मुख्य कारण हैं और क्या अधिक मीठा खाने से व्यक्ति को डायबटीज़ हो सकती है. यह जानना चाहते हैं नेहरू विहार दिल्ली से राजू कुमार.

डायबटीज़ वह रोग है जिसमें ख़ून में ग्लूकोज़ की मात्रा बहुत बढ़ जाती है. और ये तब होता है जब शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो. हमारे पेट के पीछे एक ग्रंथि होती है पैन्क्रियाज़ या अग्न्याशय जो इंसुलिन पैदा करती है. इंसुलिन का काम होता है ग्लूकोज़ को नियंत्रित करना. डायबटीज़ दो प्रकार की होती है -एक वह जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना लगभग बंद कर देता है और दूसरी, जिसमें इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनती. इस दूसरे प्रकार की डायबटीज़ का सीधा संबंध मोटापे से होता है. वैसे अधिक मीठा खाने से डायबटीज़ नहीं होती लेकिन अगर आपके परिवार में यह रोग है तो आपको सावधान रहना चाहिए. जिनके माता-पिता को डायबटीज़ होती है उनके बच्चों में इसकी संभावना 50 प्रतिशत बढ़ जाती है. इससे बचने के लिए भरपूर शारीरिक श्रम करना और वज़न कम रखना ज़रूरी है.

कंप्यूटर कीबोर्ड के अक्षरों की सैटिंग कब और किसने की थी. यह सवाल छा है उमेश दुबे ने.

कंप्यूटर कीबोर्ड

आपने कभी QWERTY का नाम सुना होगा. अपने कंप्यूटर कीबोर्ड पर नज़र डालिए. अंग्रेज़ी अक्षरों की पहली पंक्ति के पहले छह अक्षर यही हैं. जानते हैं कीबोर्ड के अक्षरों को जानबूझकर इस तरह सैट किया गया है जिससे टाइप करना कठिन हो. सबसे पहला सफल टाइपराइटर क्रिस्टोफ़र लेथम शोल्स ने 1873 में बनाया था. उन्होंने शुरू में अक्षरों की सैटिंग सिलसिलेवार ढंग से की थी. यानी ए बी सी डी से. लेकिन इससे एक मुश्किल सामने आई. जब टाइप करने वाले तेज़ी से टाइप करते तो कई चाबियां अटक जाती थीं इसलिए शुल्ज़ ने अक्षरों को इस तरह सैट किया जिससे टाइपिंग की गति धीमी हो सके. और तब बना QWERTY कीबोर्ड. वैसे इसके बाद ऑगस्ट ड्वोरक ने 1930 में एक और सैटिंग निकाली जो कहीं बेहतर है. इसमें उन्होंने अंग्रेज़ी भाषा में इस्तेमाल होने वाले नौ अक्षरों को कीबोर्ड के बीच में रखा जिससे टाइप करने वाला बिना अपनी उंगलियों को इधर उधर घुमाए 3000 शब्द लिख सकता है. लेकिन इस कीबोर्ड को बहुत कम इस्तेमाल किया जाता है.

अल जज़ीरा टेलीविज़न चैनल का अध्यक्ष कौन है और उसके सबसे लोकप्रिय संवाददाता कौन हैं. यह पूछा है गोड्डा, झारखंड से शाहनवाज़ ने.

अल जज़ीरा एक सैटलाइट टैलीविज़न नैटवर्क है जो 1996 में शुरू हुआ था. इसका मुख्यालय मध्यपूर्व के देश क़तर की राजधानी दोहा में है और इसके अध्यक्ष हैं शाहज़ादा हमद बिन थामेर अल थानी. इसे शुरू करने के लिए क़तर के अमीर ने 15 करोड़ डॉलर की राशि दी थी. इस चैनल के आने से पहले मध्यपूर्व के दर्शक सरकारी टेलिविज़न ही देखा करते थे. अल जज़ीरा ने स्पष्ट पत्रकारिता और विवादास्पद विषय उठाकर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का परिचय दिया जिसकी वजह से वह कई बार मुश्किल में भी पडा. अल जज़ीरा का खेल चैनल, बच्चों का चैनल और अंग्रेज़ी चैनल भी है. अल जज़ीरा का सबसे लोकप्रिय संवाददाता कौन है यह कहना तो मुश्किल है लेकिन तयस्सिर अलूनी इसके एक लोकप्रिय संवाददाता थे, जिन्होंने 11 सितम्बर को अमरीका पर हुए हमलों से पहले अल क़ायदा के नेता ओसामा बिन लादेन का इंटरव्यू किया था. लेकिन सीरिया में जन्मे और स्पेन के नागरिक अलूनी को आतंकवादी संगठन से सांठ-गांठ के लिए सात साल की जेल की सज़ा दी गई.

बैडमिंटन के खेल में नैट की, ज़मीन से कितनी ऊँचाई रहती है. चाईबासा झारखंड से विनय ठाकुर ने सवाल किया है.

बैडमिंटन का नेट

बैडमिंटन के अंतरराष्ट्रीय नियमों के अधीन, नैट की लंबाई छ दशमलव एक मीटर और चौड़ाई 760 मिलीमीटर होती है. इसे कोर्ट पर इस तरह बांधा जाता है जिससे नैट का ऊपरी सिरा कोर्ट के मध्य में ज़मीन से 1 दशमलव 524 मीटर और किनारों पर 1 दशमलव 55 मीटर ऊँचा हो. अगर आप इसमें से नैट की कुल चौड़ाई जो 760 मिलीमीटर है घटा दें तो पता चल जाएगा कि नैट ज़मीन से कितना ऊँचा रहता है. मेरे हिसाब से यह कोर्ट के मध्य में 760 मिलीमीटर या 76 सेंटीमीटर और किनारों पर 790 मिलीमीटर या 79 सेंटीमीटर ऊँचा होना चाहिए.

मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब की मृत्यु कैसे हुई. मोतीलाल नगर से यह सवाल किया है स्वाति लोंडे ने.

औरंगज़ेब की मृत्यु 3 मार्च 1707 को, 89 साल की आयु में ख़ुल्दाबाद में हुई. औरंगज़ेब छठे मुग़ल बादशाह थे जिन्होंने 48 साल तक राज किया. उनका शासन दक्षिण भारत तक फैला हुआ था. वो बड़े धर्मपरायण व्यक्ति थे लेकिन उनमें अपने पूर्वजों जैसी धार्मिक सहिष्णुता नहीं थी. इसीलिए भारतीय इतिहास में उन्हें काफ़ी विवादास्पद व्यक्ति माना जाता है. इस्लाम के प्रसार के लिए उन्होंने व्यर्थ ही कई शत्रु बनाए. वो निरंतर लड़ाइयों में लगे रहे. उनके इसी राजनीतिक और धार्मिक विस्तारवाद और ग़ैर मुसलमानों के ख़िलाफ़ भेदभाव पूर्ण क़ानूनों के कारण उन्हें विद्रोह का सामना करना पडा. उन्होंने अंतिम दो दशक दकन में गुज़ारे. कहते हैं कि औरंगज़ेब बड़ा सादा जीवन व्यतीत करते थे. उन्होंने सारी ज़िंदगी हज की टोपियां बुनी और क़ुरआन की हस्तलिखित प्रतियां बनाईं जिन्हें बेचकर जो धन इकट्ठा हुआ उससे ख़ुल्दाबाद (महाराष्ट्र) में उनका सादा सा मक़बरा बनाया गया. यही उनकी इच्छा थी.

भदोई उत्तर प्रदेश से दस्तगीर आलम ने पूछा है कि आमेर के क़िले के बारे में बताइए.

जयपुर से ग्यारह किलोमीटर दूर आमेर प्राचीन ढूंढार रियासत की राजधानी रहा है. जयपुर की स्थापना से पहले यहां के कच्छावार राजवंश ने सैकड़ों वर्षों तक आमेर से ही अपना राजकाज चलाया. आमेर क़िले का निर्माण सोलहवीं सदी में राजा मानसिंह ने किया था. बाद में राज जयसिंह और सवाई जयसिंह ने इसे और विस्तार दिया. यह काम कोई दो शताब्दी तक चला. माओठा झील के किनारे बने इस क़िले को राजपूत और मुग़ल शैली की वास्तुकला का अदभुत नमूना माना जाता है. इसमें लाल पत्थर और संगमरर से बने महल गुज़रे दौर के वैभव की याद दिलाते हैं. इसके भव्य परिसर में शीशमहल, दीवाने आम, दीवाने ख़ास और रानियों के लिए सुखनिवास महल बने हैं. सूरजपोल क़िले का मुख्यद्वार है जो जलेब चौक तक जाता है यह वह जगह है जहां युद्ध से लौटती सेना का स्वागत किया जाता था और जीत में हासिल सामग्री की नुमाइश की जाती थी. मुख्यद्वार के पास ही कच्छावार राजवंश की कुलदेवी शीतला माता का राजमंदिर है. इतिहासकार कहते हैं शीला माता की प्रतिमा राजा मानसिंह बंगाल में अपने अभियान की कामयाबी के बाद जस्सोर से लाए थे.

 
 
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