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बुधवार, 03 अक्तूबर, 2007 को 13:14 GMT तक के समाचार
 
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ऊँटनी का दूध कितना पौष्टिक!
 

 
 
ऊँट-ऊँटनी
ऊँटनी का दूध ज़्यादा नमकीन होता है
ऊंटनी का दूध स्वास्थ्य के लिए कितना लाभदायक है और इसमें कौन कौन से पोषक तत्व होते हैं. यह पूछते हैं गांव कानोड़ बाड़मेर राजस्थान से कुरनाराम गोदारा.

ऊंटनी के दूध में कैल्शियम, विटामिन बी और सी बड़ी मात्रा में होते हैं और इसमें लौह तत्व गाय के दूध की अपेक्षा दस गुना होता है. इसके अलावा इसमें रोग प्रतिकारक तत्व होते हैं जो कैंसर, ऐचआईवी एड्स, अल्ज़ाइमर्स और हैपेटाइटिस सी जैसे रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा करते हैं. संयुक्त राष्ट्र का खाद्य और कृषि संगठन (एफ़एओ) चाहता है कि जिन देशों में ऊँटनी का दूध होता है वो इसे पश्चिमी देशों को निर्यात करें. लेकिन हर साल कोई 54 लाख टन दूध का उत्पादन होता है जो दुनिया भर में निर्यात के लिए काफ़ी नहीं. एक मुश्किल और है कि दूध को लम्बे समय तक चलाने के लिए अति उच्च तापमान से गुज़ारना पड़ता है जबकि ऊंटनी का दूध इसे बर्दाश्त नहीं कर पाता. और फिर हो सकता है लोगों को इसका स्वाद भी अच्छा न लगे क्योंकि ऊंटनी का दूध, गाय या भैंस के दूध के मुक़ाबले कुछ ज़्यादा नमकीन होता है.

वाराणसी उत्तर प्रदेश से रितिका दुबे लिखती हैं कि वो ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा हूँ. क्या आप सरल भाषा में बता सकते हैं कि मुद्रा स्फीति क्या है. इसी से जुड़ा एक सवाल चतरा झारखंड से हर्षदेव गुप्ता ने भी पूछा है.

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में जितना माल होता है उसकी मांग और आपूर्ति का मामला होता है. अगर बाज़ार में माल कम हो जाए और मांग बढ़े तो दाम बढ़ते हैं. और अगर माल उतना ही रहे और मांग बढ़े तो भी दाम बढ़ेंगे. मान लीजिए सरकार ने नोट अधिक छाप दिए और सीमेन्ट ज़्यादा ख़रीद लिया उससे मांग बढ़ी और इस दबाव से दाम बढ़ते हैं. दूसरी तरफ़ यदि सूखा पड़ जाए या माल की आपूर्ति कम हो जाए तो माल कम है और मांग पूर्ववत है तो उससे भी दाम बढ़ते हैं. मुद्रास्फीति का मुख्य कारण यहै है कि माल कम होने और मांग बढ़ने से दाम बढ़ते हैं. मुद्रास्फीति को बढ़ने से रोका जा सकता है. मान लीजिए सूखा पड़ने से माल कम हो गया तो अगर सरकार अपनी मांग घटा ले तो मुद्रास्फीति रुक जाएगी. या अगर सप्लाई बढ़ गई है तो सरकार मांग बढ़ा दे.

मानव के सिर पर कितने बाल होते हैं. क्या बालों की किसी ने गिनती की है. यह सवाल किया है गुड़ामालानी, बाड़मेर राजस्थान से जगदीश मेहरा ने.

बाल
बाल आनुवंशिक जींस पर निर्भर करते हैं

एक औसत मानव सिर में कोई एक लाख कूपक होते हैं. ये कूपक हमारी त्वचा का हिस्सा हैं. यूं समझ लीजिए कि ये संकरी जेबों की तरह होते हैं जिसमें से बाल निकलते हैं. इन कूपकों के अंदर तेल पैदा करने वाली नन्ही-नन्ही ग्रन्थियां भी होती हैं. जितनी अधिक ग्रन्थियां होंगी उतने ही घने बाल निकलेंगे. इन कूपकों की संख्या कितनी होगी, इसका निर्धारण आनुवांशिक आधार पर होता है यानी हमारे जीन्स पर निर्भर करता है. यहां ये भी बता दूं कि एक कूपक, व्यक्ति के जीवन काल में कोई 20 बाल उगा सकता है. जबकि हर रोज़ हमारे कोई 100 बाल गिर जाते हैं. एक औसत व्यक्ति के सिर की खाल 120 वर्ग इंच की होती है और बालों की संख्या और रंग जाति वर्ग पर निर्भर करते हैं. उदाहरण के लिए गोरे लोगों के बालों की औसत संख्या 86 हज़ार से 1,46000, अफ़्रीकी मूल के लोगों की 50 हज़ार से लेकर 1,10000 और एशियाई लोगों की 80 हज़ार से 1,40000 तक होती है.

रुकुंडी सीवान बिहार से राजेश कुमार अभय यह जानना चाहते हैं कि विश्व में कितने बौद्ध देश हैं.

दुनिया में केवल पाँच देश हैं जहां बौद्ध धर्म को सरकारी धर्म माना जाता है. ये हैं तिब्बत, भूटान, बर्मा, थाईलैंड और कंबोडिया. यह धर्म मुख्य रूप से एशिया और दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों में फैला है. बौद्ध धर्म मानने वालों की सबसे अधिक संख्या है मंगोलिया में जहां 98 प्रतिशत लोग इसका अनुकरण करते हैं. थाईलैंड में 96.5 प्रतिशत, कंबोडिया में 96 प्रतिशत, ताईवान में 94 प्रतिशत, जापान में 92, भूटान में 91, बर्मा में 90 प्रतिशत, हांगकांग में 87 प्रतिशत, वियतनाम में 86.3, लाओस में 85 प्रतिशत.... सूची ख़ासी लंबी है.

भारतीय संसद कितने स्तम्भों पर टिकी है. यह सवाल किया है फ़तेहपुर, भोजपुर बिहार से राजीव कुमार राय ने.

संसद भवन का गोलाकार वरांडा 144 स्तम्भों पर टिका है. हर स्तंभ 27 फ़ुट ऊँचा है. इस भवन का डिज़ाइन दो विख्यात वास्तुकारों, सर ऐडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर ने किया था. इसकी नींव 12 फ़रवरी 1921 में ड्यूक ऑफ़ कनॉट ने रखी थी. निर्माण में छह साल लगे और 18 जनवरी 1927 को भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने इसका उदघाटन किया. संसद भवन एक विशाल गोलाकार इमारत है जिसका व्यास 560 फ़ुट है और यह कोई छग एकड़ ज़मीन में फैला है.

मोना लीसा कौन है और क्यों मशहूर है. जानना चाहती हैं मधु सुंद्रीयाल.

मोनालीसा की पेंटिंग
मोनालीसा की मुस्कान मशहूर है

मोना लीसा एक महिला का तैल चित्र है जिसे इटली के मशहूर चित्रकार लियोनार्डो डा विंची ने सोलहवीं शताब्दी में बनाया था. यह फ़्रांस की राजधानी पेरिस के विश्वविख्यात लूव्र संग्रहालय में रखा है, और इसे दुनिया भर से लोग देखने आते हैं. लियोनार्डो की मृत्यु के 31 साल बाद उनकी जीवनी लिखने वाले जिऑर्जियो वसारी ने लिखा था कि यह चित्र फ़्लोरैंस के एक धनी व्यापारी की पत्नी लीसा गैरारडीनी का है लेकिन इसकी ख़ासियत इसकी रहस्यमयी मुस्कान में है जिसकी तरह-तरह से व्याख्या की गई है.

बरकोड़ा शहडोल मध्य प्रदेश से सत्यनारायण तिवारी पूछते हैं कि क्रिकेट में थर्ड अम्पायर का सबसे पहले प्रयोग कब और किसके बीच किया गया और इसका क्या लाभ होता है.

इसका सबसे पहले प्रयोग 1992-93 में दक्षिण अफ़्रीका और भारत के बीच डरबन में हुए टैस्ट मैच में किया गया था और सचिन तेंदुलकर पहले खिलाड़ी बने जिन्हें रन आउट घोषित किया गया. थर्ड अंपायर पैवेलियन में बैठा टेलिविज़न पर मैच देखता है. अगर मैदान पर मौजूद दोनों अम्पायरों को कोई शक हो कि कोई रन आउट हुआ है या नहीं या विकेट कीपर ने सही स्टंपिंग की है या नहीं या किसी फ़ील्डर ने क्लीन कैच लिया है या नहीं, या किसी फ़ील्डर के चौक्का बचाने की कोशिश में उसके शरीर का कोई हिस्सा बाउंडरी लाइन से छू तो नहीं गया है, तो वे थर्ड अंपायर से वॉकी टॉकी पर बात करते हैं. थर्ड अंपायर टेलीविज़न पर अलग-अलग कोणों से उसे कई बार देखकर फिर तय करता है कि वास्तव में क्या हुआ.

माया सभ्यता क्या है और किस देश में है. यह सवाल किया है कोलंबो से नरेंद्र ने.

माया सभ्यता उत्तरी और मध्य अमरीका में फैली थी. आधुनिक ग्वाटेमाला, बैलीज़, हॉंडूरास, अल सल्वाडोर और दक्षिणी मैक्सिको के इलाक़े में. यूं तो इस इलाक़े में ईसा से दस हज़ार साल पहले से बसावट शुरु होने के प्रमाण मिले हैं और 1800 साल ईसा पूर्व से प्रशांत महासागर के तटीय इलाक़ों में गांव भी बसने शुरू हो चुके थे. लेकिन कुछ पुरातत्व वेत्ताओं का मानना है कि ईसा से कोई एक हज़ार साल पहले, माया सभ्यता के लोगों ने आनुष्ठानिक इमारतें बनाना शुरु कर दिया था और 600 साल ईसापूर्व तक बहुत से परिसर बना लिए थे. सन 250 से 900 के बीच विशाल स्तर पर भवन निर्माण कार्य हुआ, शहर बसे. इसे कलात्मक विकास का स्वर्ण युग कहा जाता है. कृषि का विकास हुआ और नगर प्रधान राज्य बने. उनकी सबसे उल्लेखनीय इमारतें पिरामिड हैं जो उन्होंने धार्मिक केंद्रों में बनाईं लेकिन फिर सन 900 के बाद माया सभ्यता के इन नगरों का ह्रास होने लगा और नगर ख़ाली हो गए. ऐसा क्यों हुआ इसपर बहुत से मत हैं. कुछ का मानना है कि विदेशी आक्रमण या विद्रोह के कारण इस सभ्यता का पतन हुआ और कुछ कहते हैं कि किसी प्राकृतिक विपदा या महामारी के कारण ऐसा हुआ.

स्पेन से बालकृष्ण कैली ने पूछा है कि पश्चिमी देशों में शौचालयों के बाहर डब्लू सी लिखा रहता है. इसका मतलब क्या हुआ.

डब्लू का मतलब है वॉटर और सी का मतलब है क्लॉज़ैट. यानि पानी की अल्मारी. जैसा आप जानते हैं पश्चिमी शैली के शौचालयों में पानी की टंकी होती है जिसकी ज़ंजीर खींचने से शौच की सफ़ाई हो जाती है.

 
 
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