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मंगलवार, 16 अक्तूबर, 2007 को 12:40 GMT तक के समाचार

ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
लंदन

ऊँची एड़ी के जूतों से क्या फ़ायदा?

दुनिया भर में महिलाएं ऊंची एड़ी के जूते पहनती हैं. इसका चलन कहाँ और कैसे शुरू हुआ और इनसे महिलाओं को क्या फ़ायदा होता है. ये सवाल किया है जोधपुर राजस्थान से हिम्मत सिंह ने.

यह कह पाना तो मुश्किल है कि ऊँची एड़ी के जूतों का चलन कब शुरु हुआ, लेकिन प्राचीन मिस्र की क़ब्रों और मंदिरों में मिले भित्ति चित्रों में ऐसे जूते देखने को मिलते हैं. हम ईसा से कोई चार हज़ार साल पहले की बात कर रहे हैं. प्राचीन रोम में भी दुखांत नाटक खेलने वाले अभिनेता ऊंची एड़ी के जूते पहनते थे. सोलहवीं शताब्दी में यूरोपीय अभिजात्य वर्ग के पुरुष ऊँची एड़ी के जूते पहनते थे जिससे घोड़े की सवारी करते हुए रक़ाब पर से पैर न फिसले. लेकिन ऊँची एड़ी का पहला आधिकारिक संदर्भ मिलता है 1533 में, जब ओरलींस के ड्यूक और कैथरिन डि मैडीची की शादी हुई. कैथरिन ने इस अवसर पर दो इंच ऊँची एड़ी के जूते पहने थे और बस इनका रिवाज़ चल पड़ा. इनसे फ़ायदा यह है कि एक तो आपकी लंबाई बढ़ जाती है दूसरा आपके पैर लंबे दिखाई देते हैं और तीसरा आपकी चाल संयत हो जाती है क्योंकि आपको संतुलन बनाए रखना पड़ता है.

खाबड़ा खुर्द, जोधपुर राजस्थान से सुरेश बेनिवाल यह जानना चाहते हैं कि नारको टेस्ट क्या होता है.

अगर अभियुक्त बहुत चालाक हो, पुलिस या जांच एजेंसियों के साथ सहयोग न करे या सवालों का सीधा जवाब न दे तो नारको टेस्ट की मदद से उससे असलियत उगलवाई जा सकती है. इसमें उसे सरकारी प्रयोगशाला में ले जाया जाता है जहाँ उसे नशे का इंजेक्शन दिया जाता है. इस इंजेक्शन से वह पूरी तरह बेहोश नहीं होता बल्कि नीम बेहोशी की हालत में पहुँच जाता है लेकिन उसका दिमाग़ सक्रिय रहता है. इससे लाभ यह होता है कि वह नशे की हालत में अपने जवाब को तोड़-मरोड़ या छिपा नहीं पाता. अगर उसकी जानकारी में कुछ है तो वह उसे उगल देता है. यह नारको टेस्ट केवल उन परिस्थितियों में किया जाता है जब अपराध बहुत गंभीर हो या बहुत जटिल हों या उस मामले में पर्याप्त सबूत न मिल पा रहे हों.

सबसे ज़्यादा सोना किस देश में होता है. बनारस उत्तर प्रदेश से यह सवाल किया है ओज़ैर ने.

सबसे अधिक सोना निकाला जाता है दक्षिण अफ़्रीका में उसके बाद नंबर आता है अमरीका और ऑस्ट्रेलिया का लेकिन सबसे अधिक सोने का भंडार अमरीका के पास है और दूसरे नंबर पर है जर्मनी. हाँ, अगर गहनों को भी शामिल किया जाए तो भारत में सबसे अधिक सोना है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार सन 2001 तक कोई एक लाख पैंतालीस हज़ार टन सोना निकाला जा चुका था.

पारा कैसी धातु है? मनुष्य को पारे का ज्ञान कैसे और कब हुआ? इसका क्या उपयोग है और क्या आयुर्वेद और ऐलोपैथिक दवाओं में इसका क्या उपयोग है? यह सवाल किया है ग्राम शेरवां, मिर्ज़ापुर उत्तर प्रदेश से प्रभाकर विश्वकर्मा ने.

पारा एक रासायनिक धातु है जो कमरे के सामान्य तापमान में तरल रहती है. इसका प्रयोग थर्मामीटर, बैरोमीटर और अन्य वैज्ञानिक उपकरणों में किया जाता है. पारा खनिज सिंदूर से प्राप्त होता है. पारे की जानकारी चीन, भारत और प्राचीन मिस्र के लोगों को थी. और यह लंबी आयु, टूटी हड्डी जोड़ने और स्वास्थ्य वर्द्धन के लिए इस्तेमाल किया जाता था. कहते हैं कि चीन के पहले सम्राट की समाधि में पारे की नदी बहती थी. पारे और इसके मिश्रण सदियों से दवाओं में प्रयोग होते रहे हैं. हालांकि अब इनका प्रयोग कम हो गया है क्योंकि यह विषैला होता है. इसे बड़ी सावधानी से प्रयोग करना चाहिए. जिस बरतन में पारा हो उसे ठीक से बंद रखना चाहिए जिससे वह उड़ न सके क्योंकि पारा साँस और त्वचा से सोखा जा सकता है.

दुनिया का सबसे ऊँचा पठार कहाँ है. यह सवाल पूछा है गुड़ामालानी, बाड़मेर राजस्थान से जगदीश नेहरा ने.

दुनिया का सबसे ऊँचा पठार, चीन का चिंगघाई तिब्बत पठार है जिसकी समुद्र तल से औसत ऊँचाई 4500 मीटर है. इसे दुनिया की छत की संज्ञा दी जाती है. यह सबसे ऊँचा पठार ही नहीं बल्कि सबसे बड़ा पठार भी है जो 25 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है. चीन की अधिकांश नदियाँ यहीं से निकलती हैं और यहाँ कोई एक हज़ार झीलें हैं.

दौलतगंज ग्वालियर मध्य प्रदेश से पुरुषोत्तम अग्रवाल ने पूछा है कि सोवियत संघ की गुप्तचर संस्था के जी बी, ब्रिटेन की एम आई-5 और इसराइल की मोसाद का पूरा नाम क्या है.

केजीबी सोवियत संघ की वह संस्था थी जिसमें सुरक्षा, ख़ुफ़िया पुलिस और गुप्तचर एजेंसी तीनों शामिल थीं. केजीबी का गठन 1954 में हुआ था और यह 1991 तक सक्रिय रही. रूसी भाषा में इसका पूरा नाम है कमीचियत गसुदार्स्येने बेज़ापार्सनत्स्या. जिसका हिंदी में अर्थ हुआ देश की सुरक्षा समिति. ब्रिटेन की सुरक्षा सेवा एम आई-5 का नाम मिलिट्री इंटैलिजेंस सेक्शन 5 का संक्षिप्त रूप है. ब्रिटेन की सुरक्षा सेवा का गठन 1909 में हुआ था. कालांतर में इसके दो भाग हो गए एक का काम था विदेशों में जासूसी और दूसरे का देश के भीतर हो रही जासूसी से निपटना. जब 1914 में पहला विश्व युद्ध शुरु हुआ तो इन दो विभागों में कई प्रशासनिक परिवर्तन हुए और घरेलू विभाग डाइरेक्टोरेट ऑफ़ मिलिटरी इंटेलिजैंस सेक्शन-5 या एम आई-5 के नाम से जाना जाने लगा. जहां तक इसराइल की गुप्तचर सेवा का सवाल है उसे मोसाद कहते हैं लेकिन हीब्रू भाषा में इसका पूरा नाम है हमोसाद ले मोदिईन वेलेतफ़्केदीम मयूखदीम. हिंदी में इसका अर्थ हुआ जासूसी और विशेष अभियान की संस्था. मोसाद का मतलब हुआ संस्था. इसका काम है ख़ुफ़िया जानकारी जुटाना, आतंकवाद से निपटना और गुप्त अभियान चलाना.

लखनऊ उत्तर प्रदेश से सुनील कुमार पंकज जानना चाहते हैं कि हमारे ख़ून का रंग तो लाल होता है फिर हमारी नसें नीली क्यों दिखाई देती हैं.

ये तो आप जानते ही होंगे कि हमारे शरीर में दो तरह की नलिकाएं होती हैं जो ख़ून ले जाने का काम करती हैं. धमनियाँ हमारे दिल से पूरे शरीर को ऑक्सीज़न युक्त ख़ून सप्लाई करती हैं जबकि नसें कार्बन डाइऑक्साइड युक्त ख़ून को वापस फेफड़ों और दिल में पहुंचाती हैं जिससे उसकी सफ़ाई हो सके. यह ज़रूरी होता है कि यह गंदा ख़ून दिल की तरफ़ ही जाए इसलिए इनमें वाल्व लगे होते हैं. ये एक तरफ़ खुलने वाले दरवाज़े की तरह होते हैं. अब आपका सवाल कि नसें नीली क्यों दिखाई देती हैं. नसों में क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड युक्त ख़ून होता है इसलिए उसका रंग गहरा लाल या उन्नाबी हो जाता है. और क्योंकि त्वचा के नीचे की चर्बी कम आवृत्ति की रोशनी को सोख लेती है और अधिक आवृत्ति की रोशनी को परावर्तित करती है इसलिए नसों का रंग हमें नीला दिखाई देता हैं. यह तो आप जानते हैं न कि इन्द्रधनुष के वर्णक्रम में लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, गहरा नीला और बैंगनी रंग होते हैं. कम आवृत्ति का प्रकाश परावर्तित होने से हमें लाल रंग दिखाई देता है जबकि अधिक आवृत्ति का प्रकाश परावर्तित होने से हमें नीला रंग दिखाई देता है.

हुसैनाबाद, बलिया उत्तर प्रदेश से संजीदा बानो पूछती हैं कि विश्वकप फ़ुटबॉल में गोल्डन बॉल पुरस्कार क्या होता है और सबसे पहला पुरस्कार किस खिलाड़ी को मिला था.

फ़ुटबॉल की विश्वकप प्रतियोगिता में गोल्डन बॉल पुरस्कार उस खिलाड़ी को दिया जाता है जो पूरी प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में चुना गया है. यह चयन मतदान के ज़रिए होता है जिसमें फ़ुटबॉल पत्रकार, समीक्षक और विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं और मतदान फ़ाइनल मैच के मध्यांतर से पहले किया जाता है. सबसे पहले यह सम्मान 1930 के विश्वकप में अर्जेंटीना के खिलाड़ी गिलैर्मो स्तबीले को मिला था. अर्जेंटीना की टीम फ़ाइनल में पहुँचने के बावजूद उरुग्वे से हार गई थी लेकिन क्योंकि गिलैर्मो का प्रदर्शन पूरी प्रतियोगिता में बहुत बढ़िया था उन्होंने पाँच मैचों में आठ गोल किए थे इसलिए गोल्डन बॉल पुरस्कार उन्हें ही मिला. दूसरे सबसे अच्छे खिलाड़ी को सिल्वर बॉल और तीसरे नंबर के खिलाड़ी को ब्रॉन्ज़ बॉल पुरस्कार दिया जाता है.

ब्रिटेन की सबसे लंबी नदी कौन सी है. ये सवाल लिख भेजा है आरा बिहार से राम कुमार नीरज ने.

ब्रिटेन की सबसे लंबी नदी है सैवर्न, जो वेल्स की कैम्ब्रियन पहाड़ियों से निकलकर इंगलैंड के कई इलाक़ों से होती हुई 354 किलोमीटर का सफ़र तय करके अटलांटिक महासागर में जा समाती है.