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हवा कैसे चलती है...
 

 
 
हवा कैसे चलती है...
कभी-कभी हवा की रफ़्तार विनाशकारी तूफ़ान की शक्ल ले लेती है
हवा कैसी चलती है. यह सवाल किया है पुणे महाराष्ट्र से उत्कर्ष गुप्ता ने.

हमारी पृथ्वी, गैस के अणुओं की परतों से घिरी हुई है, जिसे वायुमंडल कहा जाता है. यह वायुमंडल मुख्य रूप से नाइट्रोजन और ऑक्सीजन गैसों से मिलकर बना है. जब इन गैसों के अणु गति पकड़ते हैं तो उसे हवा कहा जाता है. अब सवाल कि हवा चलती कैसे है. सूर्य पृथ्वी की सतह को गर्म करता है तो इससे वायुमंडल भी गर्म होता है. जिन हिस्सों पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं वह गर्म हो जाते हैं और जिन हिस्सों पर तिरछी किरणें पड़ती हैं वह ठंडे रहते हैं. पृथ्वी की सतह गर्म होने से हवा भी गर्म हो जाती है. गर्म हवा ठंडी हवा की अपेक्षा हल्की होती है इसलिए ऊपर उठती है और फैलती है. उसकी जगह लेने के लिए ठंडी हवा आ जाती है. इस तरह चलती है हवा.

गांव दीवड़ा छोटा, ज़िला डूंगरपुर राजस्थान से शैलेश कुमार जोशी ने पूछा है कि स्टैम सैल उपचार क्या होता है.

पहले यह समझ लें कि हर जीव, सैल या कोशिकाओं से मिलकर बनता है. एक वयस्क व्यक्ति के शरीर में कोई 1000 खरब कोशिकाएं होती हैं. अधिकांश वयस्क कोशिकाओं का एक निश्चित उद्देश्य होता है जो बदलता नहीं. उदाहरण के लिए जिगर की कोशिकाएं दिल की कोशिकाओं की भूमिका नहीं निभा सकतीं लेकिन स्टैम सैल ऐसी कोशिकाएं होती हैं जो अभी विकास के आरंभिक चरण में हैं और अन्य प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इन स्टैम कोशिकाओं को, मरम्मत के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. मतलब ये कि अगर शरीर के किसी अंग की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं तो इन स्टैम कोशिकाओं को स्वस्थ कोशिकाएं विकसित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. यह माना जाता है कि इससे पार्किन्सन्स, अल्ज़ाइमर्स, हृदय रोग, पक्षाघात, मधुमेह जैसी बीमारियों का इलाज किया जा सकेगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि अधिकांश स्टैम कोशिकाएं भ्रूण से प्राप्त होती हैं. हालांकि ये वयस्क अंगों में भी पाई जाती हैं जिनका काम होता है क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत करते जाना.

महात्मा गांधी ने फ़ीनिक्स आश्रम की स्थापना कहां की थी. जानना चाहते हैं ग्राम राजपुतटोला, वैशाली बिहार से अमोल कुमार आदित्य.

महात्मा गांधी सेठ दादा अब्दुल्लाह के निमंत्रण पर एक मुक़दमे के सिलसिले में 23 मई 1893 को दक्षिण अफ़्रीका पहुंचे थे. गांधी जी पर जॉन रस्किन की पुस्तक अन्टू दिस लास्ट का बड़ा प्रभाव पडा जिसमें समाजवादी अर्थव्यवस्था पर बल दिया गया था. सन 1904 में उन्होंने डरबन शहर से कोई 25 किलोमीटर दूर सौ एकड़ ज़मीन ली और फ़ीनिक्स आश्रम बनाया. इसमें एक प्रिंटिंग प्रैस और आटे की चक्की लगाई, खेती-बाडी़ कराई. उनके साथ आए सभी लोग सब काम अपने हाथों से करते थे.

कुछ सप्ताह पहले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का निधन हो गया. बेलगांव महाराष्ट्र से राघवेंद्र हेगड़े पूछते हैं कि उन्हें यंग टर्क के नाम से क्यों पुकारा जाता था. क्या इस शब्द का संबंध तुर्की या तुर्कमेनिस्तान से है.

चंद्रशेखर समाजवादी नेता थे
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और समाजवादी नेता चंद्रशेखर

इसका संबंध तुर्क साम्राज्य या ऑटोमन साम्राज्य से है. इस साम्राज्य में सुधार लाने के लिए 1889 में सैन्य कैडेटों और विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक आंदोलन शुरू किया जिसमें प्रगतिशील विचारधारा वाले कलाकार, प्रशासक और वैज्ञानिक भी शामिल हुए. इस आंदोलन को सुल्तान अब्दुल हामिद द्वितीय की राजशाही के ख़िलाफ़ हुई यंग टर्क क्रांति कहा गया. ये लोग लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करते थे यानी राजतंत्र और धर्मतंत्र के ख़िलाफ़ थे. यंग टर्क आंदोलन से विद्रोह की परंपरा शुरू हुई और इसी ने तुर्की गणतंत्र के संस्थापक मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क के नेतृत्व में हुई क्रांति की नींव रखी. जहाँ तक चंद्रशेखर का सवाल है उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत समाजवादी विचारधारा से हुई. साठ के दशक में वे आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के क्रांतिकारी विचारों के साथ कांग्रेस से जुड़े थे. इन्हीं क्रांतिकारी विचारों के कारण उन्हें उनके सहयोगियों मोहन धारिया, कृष्ण कांत और चंद्रजीत यादव सहित यंग टर्क के नाम से जाने जाने लगा.

मेरठ, उत्तर प्रदेश से अब्दुल वहीद पूछते हैं कि जज़िया कर क्या है.

इस्लामिक क़ानून के तहत जज़िया कर उन लोगों पर लगाया जाता है जो ग़ैर मुस्लिम हैं. यह कर उन्हें देना पड़ता है जो इस्लाम को तो स्वीकार नहीं करते लेकिन इस्लामी सल्तनत के संरक्षण में रहने को तैयार हैं. इससे उन्हें एक सीमा तक स्वायत्तता मिलती है, कुछ रियायतें भी मिलती हैं लेकिन वे हथियार नहीं उठा सकते और न ही सेना में भर्ती हो सकते हैं. क़ुरआन के अनुसार ग़ुलामों, महिलाओं, बच्चों, बूढ़ों, बीमारों और ग़रीबों पर जज़िया नहीं लगाया जाना चाहिए लेकिन बाद में इन प्रावधानों को छोड़ दिया गया और सभी ग़ैर मुसलमानों पर जज़िया लगाया जाने लगा.

केंचुए का वैज्ञानिक नाम क्या है. द्विलिंगी होने के कारण क्या सभी केंचुए बच्चे पैदा करते हैं. यह सवाल किया है ग्राम बिशुनपुरा कुशीनगर उत्तर प्रदेश से बीर बहादुर यादव ने.

आम केंचुए का वैज्ञानिक नाम है Lumbricus terrestri. यह तो आप जानते ही हैं कि केंचुए द्विलिंगी होते हैं यानी उनमें नर और मादा दोनों प्रजनन कोशिकाएं होती हैं लेकिन उन्हें शुक्राणु की अदला-बदली के लिए साथी की ज़रूरत पड़ती है.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शाहनवाज़ अंसारी पूछते हैं कि लातीनी अमरीका को लातीनी अमेरिका क्यों कहा जाता है?

अमरीका महाद्वीप के उस समूचे क्षेत्र को लातीनी अमरीका कहा जाता है जहां प्रमुख रूप से स्पेनिश और पुर्तगाली भाषाएं बोली जाती हैं और किसी सीमा तक फ़्रांसीसी भी. क्योंकि ये सभी भाषाएं रोमन काल में लैटिन से पनपी थीं. लैटिन अमरीकी देशों में मैक्सिको, मध्य अमरीका, दक्षिण अमरीका और कैरिबियाई देश शामिल हैं. कहते हैं कि यह शब्दावली सबसे पहले 1860 के दशक में फ़्रांस के सम्राट नैपोलियन तृतीय ने इस्तेमाल की थी जो समूचे क्षेत्र को अपने नियंत्रण में करना चाहते थे.

छपरा बिहार से मोहम्मद इमरान अंसारी लिखते हैं कि एड्स के लक्षण बताएं.

 एड्स जागरूकता अभियान
एड्स के लिए काफ़ी जागरूकता चलाई जा रही है

ये तो आप जानते हैं कि एड्स रोग एचआईवी वायरस से होता है. यह वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद हमारी रोक प्रतिरोधक प्रणाली को नष्ट कर देता है, जिससे हम छोटी बड़ी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं. कुछ लोगों में वायरस के प्रवेश करने के कुछ सप्ताह के भीतर फ़्लू जैसे आरंभिक लक्षण दिखाई देने लगते हैं. ग्रंथियां सूज जाती थीं और त्वचा पर ददोरे उभर आते हैं लेकिन कुछ सप्ताह के अंदर ये लक्षण ग़ायब हो जाते हैं. हाँ, जब एड्स हो जाता है तो बहुत से लक्षण दिखाई देते हैं जैसे कमज़ोरी, वज़न घटना, बार-बार बुख़ार आना, ज़बान पर सफ़ेद परत, थकावट, चक्कर आना, लंबे समय तक अतिसार होना, ग्रंथियों का सूजना, सूखी खांसी, सांस उखड़ना, हाथों और पैरों का सुन्न पड़ना आदि.

शंख की ध्वनि तीन बार ही क्यों की जाती है. यह जानना चाहते हैं बसंतपुर, सपौल बिहार के सुखदेव नारायण.

हिंदू संस्कृति में पूजा और अनुष्ठान के समय शंख बजाने की परंपरा है जो बहुत पुरानी है. शंख ध्वनि किसी का ध्यान आकर्षित करने या कोई संकेत देने के लिए की जाती है. दूसरी बात ये कि क्योंकि शंख पानी से निकलता है और पानी को जीवन से जोड़ा जाता है इसलिए इसे जीवन का प्रतीक भी माना जाता है. तीसरा ये कि किसी राजदरबार में राजा के आगमन की सूचना शंख बजाकर दी जाती थी और सबसे प्रचलित शंख ध्वनि युद्ध के प्रारंभ और अंत की सूचना के लिए की जाती थी. महाभारत युद्ध में शंख ध्वनि की विशद चर्चा है. कई योद्धाओं के शंखों के नाम भी गिनाए गए हैं जिसमें कृष्ण के पांचजन्य शंख की विशेष महत्ता बताई गई है. जहां तक तीन बार शंख बजाने की परंपरा है वह आदि, मध्य और अंत से जुड़ी है.

भारत में सबसे अधिक समय तक शासन करने वाला मुग़ल बादशाह कौन था. यह सवाल किया है बोरगांव से सैय्यद एजाज़ अली मीरसाहब ने.

सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले दो मुग़ल बादशाह थे अकबर और औरंगज़ेब. अकबर ने सन 1556 से 1605 तक राज किया और औरंगज़ेब ने 1658 से 1707 तक. यानी दोनों ने ही 49 सालों तक सत्ता संभाली.

 
 

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