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शनिवार, 01 दिसंबर, 2007 को 17:05 GMT तक के समाचार

ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
बीबीसी संवाददाता, लंदन

अंकल सैम का क्या राज़ है...

अरविन्द जोशी पूछते हैं कि अमरीकी राष्ट्रपति को अंकल सैम क्यों कहा जाता है.

अरविंद जी अमरीकी राष्ट्रपति को नहीं, स्वयं अमरीका को अंकल सैम कहा जाता है. यह नाम पड़ा कैसे पड़ा ठीक-ठीक तो नहीं कहा जा सकता लेकिन जो दंतकथाएं प्रचलित हैं उनके अनुसार इसका प्रयोग अमरीका और ब्रिटेन के बीच 1812 में हुए युद्ध के दौरान शुरू हुआ. कहते हैं कि न्यूयॉर्क राज्य में तैनात सैनिकों के पास मांस के पीपे आया करते थे जिन पर अंग्रेज़ी भाषा के दो अक्षर, यू एस लिखे रहते थे. सैनिकों ने मज़ाक में यह कहना शुरू किया कि यह सैम्युल विलसन ऑफ़ ट्रॉय के नाम का संक्षिप्त रूप है, जो मांस सप्लाई किया करता था. सैम्यु्ल को संक्षेप में सैम कहा जाता है. बस इसी से अंकल सैम नाम चल निकला. एक और दंतकथा भी प्रचलित है कि इसका प्रयोग आयरलैंड से अमरीका आ बसे लोगों ने शुरू किया. यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका को उनकी मूल गेलिक भाषा में जो कहा जाता है उसका संक्षिप्त रूप बनता है एस ए ऐम यानी सैम. बहरहाल अमरीका की 87 वीं संसद ने 15 सितंबर 1961 को एक प्रस्ताव पास किया जिसमें कहा गया कि संसद अमरीका के राष्ट्रीय चिन्ह अंकल सैम के जनक, न्यूयॉर्क के अंकल सैम विलसन ऑफ़ ट्रॉय को सलाम करती है. यानी अंकल सैम अमरीका के राष्ट्रीय चिन्ह बन गए.

बिहार के गोपालगंज ज़िले के चौरांव गांव से अरशद जुनैद लिखते हैं कि नेत्रहीन क्रिकेट किस तरह खेला जाता है. और क्या इनके अंपयर भी नेत्रहीन होते हैं.

अक्सर यह सवाल किया जाता है कि जो नेत्रहीन क्रिकेट खेलते हैं क्या वो वाक़ई नेत्रहीन होते हैं लेकिन सच तो यह है कि इन खिलाड़ियों को थोड़ा बहुत नज़र आता है ये पूरी तरह दृष्टिहीन नहीं होते. पिछले कुछ सालों में नेत्रहीनों में क्रिकेट में दिलचस्पी इतनी बढ़ गई है कि आई सी सी ने भी इसके टूरनामेंट शुरू करवा दिए हैं. इसमें गेंद फुटबाल के बराबर होती है और उसमें घुंघरू होता है और खिलाड़ी उस आवाज़ का पीछा करते हैं. इस क्रिकेट के क़ायदे कानून भी कुछ अलग होते हैं. लेकिन अंपायर उसी को बनाते हैं जो सारा खेल पूरी तरह देख सके.

सिनेमा हाल में लगे पर्दे का रंग सफ़ेद ही क्यों होता है. यह सवाल पूछा है ग्राम मड़मो, हज़ारीबाग़ झारखंड से रामचन्द्र महतो ने.

इसलिए जिससे जब फ़िल्म प्रोजेक्टर से रील, पर्दे पर दिखाई जाए, तो सारी तस्वीरें और रंग साफ़ दिखाई दे सकें. सिनेमा का पर्दा आमतौर से विनायल का बना होता है और इसमें नन्हें-नन्हें छेद होते हैं जिससे इनके पीछे लगे स्पीकरों से आवाज़ बाहर आ सके. सिनेमा के पर्दे चार तरह के होते हैं. मैट सफ़ेद पर्दा जो पाँच प्रतिशत रौशनी परावर्तित करता है, मोतिया रंग का पर्दा जो 15 प्रतिशत रोशनी परावर्तित करता है, रुपहला पर्दा जो 30 प्रतिशत रोशनी परावर्तित करता है और कांच का पर्दा जो 40 प्रतिशत रोशनी परावर्तित करता है. मैट सफ़ेद पर्दे का इस्तेमाल छोटे थियेटर में होता है जिसमें कोई 100 दर्शक बैठ सकते हों. मोतिया और रुपहला पर्दा सबसे अधिक इस्तेमाल होता है. कांच के पर्दे की सतह पर हज़ारों कांच के मोती घुसाए जाते हैं लेकिन इस पर्दे का इस्तेमाल बहुत कम होता है.

गुड़ामालानी, ज़िला बाड़मेर राजस्थान के जगदीश नेहरा यह जानना चाहते हैं कि यूरेशिया कौन से महाद्वीप को कहा जाता है.

यूरेशिया पृथ्वी का एक विशाल भूभाग है जो पाँच करोड़, 39 लाख, नव्वे हज़ार किलोमीटर में फैला है. इसमें रूस से लेकर सभी यूरोपीय देश, अरब प्रायद्वीप, चीन जापान और सभी एशियाई देश शामिल हैं. इस भूभाग में कोई चार अरब इक्सठ करोड़ लोग रहते हैं जो दुनिया की कुल आबादी का इकहत्तर प्रतिशत हुआ.

रायगढ़ छत्तीसगढ़ से मोहम्मद शरीक़ पूछते हैं कि पृथ्वी से आसमान की दूरी कितनी है और आसमान कितना बड़ा है.

आसमान, पृथ्वी से दिखने वाला वायुमंडल या अंतरिक्ष है. अंतरिक्ष में हमारी आकाशगंगा जैसी अनगिनत आकाशगंगाएं हैं और हरेक आकाशगंगा में खरबों तारे और उनके ग्रह उपग्रह हैं. कोई नहीं जानता अंतरिक्ष कितना विशाल है बस यूं समझ लीजिए कि हमारी पृथ्वी उसमें धूल के एक कण के बराबर है.

दुनिया का सबसे बड़ा फूल कौन सा है. यह पूछा है बेतिया, पश्चिमी चम्पारण बिहार से आनंद ने.

दुनिया का सबसे बड़ा फूल है रैफ़लेशिया आरनॉल्डी. यह दक्षिण पूर्वी एशिया के जंगलों में पाया जाता है. खिले हुए फूल का व्यास कोई एक मीटर तक होता है और उसका वज़न लगभग दस किलोग्राम. इसकी एक ख़ासियत यह भी है कि इसमें सड़े हुए मांस की सी बू आती है. यह टैट्रास्टिग्मा बेल पर एक परजीवी की तरह पनपता है. इसकी न जड़ होती है न टहनियां बस फूल होता है जिसे खिलने में महीनों लगते हैं और फिर कुछ ही दिन में यह मुरझा जाता है.