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ऑपरेशन पोलो क्या है?
 

 
 
ऑपरेशन पोलो क्या है?
ऑपरेशन पोलो क्या है. यह जानना चाहते हैं दुर्गापुर, अंगुल उड़ीसा से ज्योतिरंजन बिस्वाल.

ऑपरेशन पोलो उस सैनिक अभियान को कहा जाता है जिसके बाद हैदराबाद और बराड़ की रियासत भारतीय संघ में शामिल हुई. इसकी ज़रूरत इसलिए पड़ी क्योंकि हैदराबाद के निज़ाम उस्मान अली ख़ान आसिफ़ जाह सातवें ने देश के बंटवारे के बाद स्वतंत्र रहने का फ़ैसला किया. भारत के बीच एक स्वतंत्र रियासत का बने रहना सरकार को स्वीकार्य नहीं था. भारत के राजनीतिक एकीकरण के प्रमुख वास्तुकार सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इसे अपनी प्राथमिकता बनाया. निज़ाम को मनाने की कोशिशें की गईं लेकिन उन्होंने संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया. हारकर सेना भेजी गई और हैदराबाद 12 सितंबर 1948 को भारतीय संघ में शामिल हो गया.

हिसार हरियाणा से सुभाष, आई आई टी खड़कपुर से राजीव शुक्ला और दुर्गापर अंगुल उड़ीसा से ज्योतिरंजन बिस्वाल ने पूछा है कि भारत और अमरीका के बीच हुए असैनिक परमाणु समझौते के संबंध में जिस 123 एग्रीमेंट की चर्चा होती है वह क्या है और हाइड एक्ट क्या है.

अमरीका भारत से परमाणु सहयोग कर सके इस उद्देश्य से अमरीका के आण्विक ऊर्जा अधिनियम 1954 की धारा 123 में संशोधन किया गया है. इसलिए आम ज़ुबान में इसे 123 समझौता कहा जाने लगा है. लेकिन असल में यह दोनों देशों के बीच हुए परमाणु सहयोग समझौते का प्रलेख है जिसमें लिखा हुआ है कि यह समझौता कैसे लागू होगा, कैसे आगे बढ़ेगा और दोनों देशों की क्या ज़िम्मेदारियां होंगी. जहां तक हाइड ऐक्ट का सवाल है, अब तक अमरीका आण्विक ऊर्जा अधिनियम 1954 और 1978 के परमाणु अप्रसार अधिनियम की वजह से भारत के साथ सहयोग नहीं कर सकता था क्योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही वह परमाणु हथियार क्लब का सदस्य है. लेकिन इन प्रतिबंधों को हटाकर भारत के साथ सहयोग करने का जो अधिकार अमरीका को मिला है वह इसी हाइड ऐक्ट के द्वारा मिला है. इसमें कुछ ख़ास बाते हैं जैसे अगर भारत परमाणु परीक्षण करे तो अमरीकी क़ानून कहता है कि सहयोग रोक दें लेकिन हाइड एक्ट राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वो इसे न मानें. इसी तरह कुछ और अधिकार भी दिए गए हैं. इस तरह हाइड एक्ट अमरीका को भारत के साथ परमाणु सहयोग करने की अनुमति देता है और 123 समझौता उसकी व्याख्या करता है.

हिन्गोली महाराष्ट्र से थोरट वसंत पूछते हैं कि विश्व का पहला एफ़ ऐम रेडियो स्टेशन कब और कहाँ शुरू हुआ और भारत में इसकी शुरूआत कब और कहाँ की गई.

सबसे पहला एफ़ एम रेडियो स्टेशन, अमरीका के मैसेयच्यूसैट राज्य के, पैक्सटन शहर में 1937 में शुरू हुआ था. अमरीकी अन्वेषक ऐडविन हावर्ड आर्मस्ट्रॉंग ने 1935 में इस फ़्रीक्वैन्सी मॉड्यूलेशन या ऐफ़ ऐम प्रणाली को तैयार किया था. इसलिए उन्हें एफ़ एम रेडियो का जनक कहा जा सकता है. इस प्रणाली की विशेषता यह थी कि इसमें आवाज़ बहुत साफ़ सुनाई पड़ती थी. जहां तक भारत का सवाल है भारत में निजी एफ़ एम रेडियो की शुरुआत हुई सन 2001 से. रेडियो सिटी बंगलौर पहला निजी एफ़ एम रेडियो स्टेशन है जो 3 जुलाई 2001 को शुरू हुआ.

फ़रूख़ाबाद उत्तर प्रदेश के कुलदीप मिश्रा पूछते हैं कि जब हम साइकिल चलाते हैं तो वह संतुलित अवस्था में रहती है परंतु ज्यों ही हम साइकिल को रोकते हैं तो हमारा संतुलन बिगड़ जाता है और हम गिर पड़ते हैं. ऐसा क्यों.

साइकिल चालन
साइकिल चालन अच्छी कसरत है

इसे दो उदाहरणों से समझाना ठीक होगा. अगर हम लाठी को अपने हाथ पर संतुलित करना चाहें तो हमें अपने हाथ को हिलाते रहना पड़ता है. उसी तरह जब हम लट्टू को घुमाकर धरती पर छोड़ते हैं तो वह सीधा घूमता रहता है और जब उसकी गति कम हो जाती है तो लुढ़क जाता है. साइकिल चलाते समय हम ये दोनों काम करते हैं एक तो हैंडल को दाएं बाएं घुमाकर उसे संतुलित रखते हैं और दूसरा गति पकड़ कर उसे लुढ़कने नहीं देते. ये दोनों क्रियाएं गुरुत्वाकर्षण शक्ति का मुक़ाबला करती हैं और संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं.

मुकेश रंजन ने पूछा है कि पैरालिसिस क्या होता है.

शरीर की एक या एक से अधिक मांसपेशियों के काम न करने को पैरालिसिस कहते हैं. आमतौर से शरीर के जिस हिस्से में पैरालिसिस होता है वहां चेतना भी नहीं रहती. इसे आम भाषा में लकवा मार जाना या पक्षाघात भी कहते हैं. यह आमतौर पर स्नायु तन्त्र या मस्तिष्क को हुई किसी क्षति के कारण होता है. यह क्षति किसी चोट की वजह से हो सकती है या मस्तिष्क में रक्त के बहाव से या ख़ून का थक्का बन जाने से या फिर रीढ़ की हड्डी में चोट लग जाने से हो सकती है. पैरालिसिस कई तरह का होता है. चेहरे के एक हिस्से में हुए पैरालिसिस को बैल्स पॉल्सी कहते हैं, शरीर के एक हिस्से में हुए पैरालिसिस को हैमिप्लीगिया कहते हैं और रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से हुए पैरालिसिस को क्वाड्रिप्लीगिया कहते हैं.

दिल्ली से मुकेश प्रसाद ने फ़्रांस और इंगलैंड को जोड़ने वाली सुरंग के बारे में पूछा है कि ये कब बनी और क्या ये सड़क और रेल दोनों से जुड़ी है.

चैनल टनल समुद्र के नीचे बनी सुरंग है जिसकी लम्बाई 50.45 किलोमीटर है और ये इंगलैंड के फ़ोक्सटन शहर को फ़्रांस के कोकैल शहर से जोड़ती है. यह दुनिया की दूसरी सबसे लम्बी रेल सुरंग है और समुद्रतल से औसतन 150 फ़िट नीचे बनी हुई है. इसमें तीन सुरंगे साथ साथ चलती हैं. दो सुरंगो में ट्रेनें चलती हैं जबकि इन दोनों के बीच में बनी सुरंग, मुख्य सुरंगों से बीच-बीच में जुड़ी हुई है जिससे मरम्मत कर्मचारी अपना काम कर सकें और साथ ही आपात काल में यात्रियों को इसके ज़रिए निकाला जा सके. 6 मई 1994 को ब्रिटन की महारानी ऐलिज़ाबेथ द्वितीय और फ़्रांस के राष्ट्रपति फ़्रान्सुआ मितरां ने इसका उद्धाटन किया था.

छबीला नगर सारण बिहार से रीना ये जानना चाहती हैं कि रावण के पिता कौन थे. और अगर वे ऋषि परिवार के थे तो राक्षस कैसे हो गए.

रावण का पुतला
रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है

रावण, विश्रवा नामक ब्राह्मण ऋषि के पुत्र थे. लेकिन उनकी मां दैत्य राजकुमारी कैकेसी थीं. रावण कैकेसी के सबसे बड़े बेटे थे और उनका नाम दशानन रखा गया था. जिसका अर्थ ये हुआ कि उनमें दस लोगों जितनी बौद्धिक क्षमता थी. उन्होने अपने पिता विश्रवा के अधीन वेदों का अध्ययन किया और क्षत्रियों के तौर तरीक़े सीखे लेकिन उनके नाना सुमाली ने उन्हे दैत्यों के मूल्य भी सिखाए. रावण को राक्षस इसलिए कहा गया क्योंकि उनका आचरण अनैतिक माना जाता है.

ऑस्ट्रेलिया से आकाश लिखते हैं कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता मिल गई है. क्या भारत ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को दोहरी नागरिकता देता है.

जी नहीं. भारत दोहरी नागरिकता नहीं देता. लेकिन अब भारतीय मूल के लोगों को ओसीआई या ओवरसीज़ सिटिशनशिप ऑफ़ इंडिया कार्ड जारी किए जा रहे हैं. यह देखने में पासपोर्ट जैसे होते हैं, उसमें आपकी फ़ोटो होती है आपकी सारी जानकारी होती है लेकिन नागरिकता के कॉलम में आपकी नागरिकता उसी देश की लिखी होती है जहां का पासपोर्ट आपके पास है. इस ओआईसी कार्ड प्राप्त कर लेने के बाद आपको भारत जाने के लिए अलग से वीज़ा नहीं लेना पड़ता और अगर आप जितने लम्बे समय भारत में बिताना चाहें बिता सकते हैं. और जानकारी के लिए आपको भारतीय उच्चायोग या दूतावास की वैबसाइट पर जाना होगा क्योंकि इसका पंजीकरण वैबसाइट पर ही होता है.

 
 

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