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शनिवार, 23 फ़रवरी, 2008 को 16:43 GMT तक के समाचार

ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
बीबीसी संवाददाता, लंदन

क्या कोई टाइम मशीन है दुनिया में?

वीरेन्द्र जायसवाल ने सवाल किया है कि टाइम मशीन क्या है और क्या इसे वैज्ञानिक बना रहे हैं?

हमसे पूछिए

समय की सीमाएं लांघकर अतीत और भविष्य में पहुंचने की परिकल्पना तो मनुष्य करता रहा है लेकिन जब 1895 में इंगलैंड के मशहूर लेखक ऐच जी वेल्स ने द टाइम मशीन उपन्यास प्रकाशित किया, तो अचानक लोग इसके बारे में सोचने लगे. इस उपन्यास से प्रेरित होकर इस विषय पर और कथा साहित्य भी रचा गया लेकिन इसका एक गंभीर पक्ष भी है. मशहूर वैज्ञानिक आइंस्टाइन के सापेक्षता के सिद्धान्त से पहले, यह माना जाता था कि समय निरपेक्ष और सार्वभौम है यानी सबके लिए एक समान है चाहे कोई कहीं भी हो. लेकिन आइंस्टाइन ने कहा कि दो घटनाओं के बीच का मापा गया समय इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें देखने वाला किस गति से जा रहा है.

मान लीजिए एक जुड़वां बहन भाई हैं मीना और महेश. मीना एक अत्यन्त तीव्र गति के अंतरिक्ष यान से किसी ग्रह पर जाती है और कुछ समय बाद पृथ्वी पर लौट आती है जबकि महेश घर पर ही रहता है. मीना के लिए यह सफ़र हो सकता है एक वर्ष का रहा हो लेकिन जब वह पृथ्वी पर लौटती है तो 10 साल बीत चुके होते हैं. उसका भाई उससे 9 वर्ष बड़ा है जबकि दोनों का जन्म एक ही दिन हुआ था. यानी मीना 10 साल भविष्य में पहुंच गई है. कुछ ब्रह्मांडीय किरणें प्रकाश की गति से चलती हैं. उन्हें एक आकाशगंगा पार करने में कुछ क्षण लगते हैं लेकिन पृथ्वी के समय के हिसाब से ये दसियों हज़ार वर्ष हुए. भौतिकशास्त्र की दृष्टि से यह सत्य है लेकिन अभी तक ऐसी कोई टाइम मशीन नहीं बनी जिससे हम अतीत या भविष्य में पहुँच सकें.

गाँव जोकाहा ज़िला बहराइच उत्तर प्रदेश से दिलीप कुमार मौर्य यह जानना चाहते हैं कि टीसीपी और आईपी क्या है और उसका इंटरनैट में क्या प्रयोग होता है.

ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल और इंटरनैट प्रोटोकॉल. ये एक तरह से कम्प्यूटरों के बीच में ऑपरेटिंग सिस्टम में डेटा स्थानान्तरित करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला सॉफ़्टवेयर है जो मापदंड के रूप में इस्तेमाल होता है. इंटरनैट के ज़रिए जितना भी डेटा एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर पर भेजा जाता है वह इसी प्रोटोकॉल के ज़रिए भेजा जाता है. जैसे कोई फ़ाइल अटैचमैंट हो या ईमेल हो यह सभी इसके ज़रिए स्थानान्तरित होता है.

महनार, वैशाली बिहार से हरिनारायण प्रसाद जायसवाल ने पूछा है कि ब्रिटिश शासन काल के सीलोन का नाम श्रीलंका किसने और कब दिया.

प्राचीन काल में श्रीलंका कई नामों से जाना जाता था. ग्रीस के भूगोलज्ञों ने इसे तापरोबेन कहा जबकि अरबों ने इसे सेरेनदीब कहा. सन 1505 में जब पुर्तगाली इस द्वीप पर पहुँचे तो उन्होंने इसका नाम रखा सीलाओ. इसी से अंग्रेज़ी में सीलोन बना. 1948 में इसे ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली लेकिन नाम सीलोन बना रहा. लेकिन जब 1972 यह गणतंत्र बना तो इसका नाम बदलकर श्रीलंका रख दिया गया. लंका संस्कृत शब्द लंका से बना है जिसका अर्थ है देदीप्यमान भूमि. और श्री का अर्थ है पूजनीय. यानी पूजनीय देदीप्यमान भूमि. प्राचीन भारतीय महाकाव्यों महाभारत और रामायण में भी यह नाम मिलता है.

दुनिया का सबसे बड़ा जीवित पेड़ कौन सा है, कहाँ है और उसकी कितनी उम्र है. यह पूछा है आलवाड़ा जालौर राजस्थान से रामा राम पटेल और तिकमाराम पटेल ने.

जनरल शरमन, दुनिया का सबसे विशाल पेड़ है. यह अमरीका के कैलिफ़ोर्निया राज्य के सैकोआ नेशनल पार्क में है और लगभग 2200 वर्ष पुराना है. यानी ईसा से भी 200 साल पहले का. यक़ीन नहीं होता न....प्रकृति वैज्ञानिक जेम्स वुल्वर्टन ने 1879 में अमरीकी गृहयुद्ध के नेता जनरल विलियम शरमन के नाम पर इसका नाम रखा था. इसकी उँचाई 274.9 फ़िट है और इसके तने का घेरा 102.6 फ़िट है.