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शनिवार, 08 मार्च, 2008 को 16:50 GMT तक के समाचार

ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
बीबीसी संवाददाता, लंदन

पृथ्वी में कितनी गर्मी?

गुड़ामालानी बाड़मेर राजस्थान से जगदीश नेहरा ने पूछा है कि पृथ्वी का भीतरी भाग गर्म क्यों होता है.

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इसके दो कारण हैं. आज से कोई साढ़े चार अरब साल पहले पृथ्वी का निर्माण बहुत सारे कणों से मिलकर हुआ था. इन कणों के एक दूसरे के पास आने से बहुत ऊर्जा पैदा हुई जिसे आदिकालीन गर्मी कहा जाता है. यह गर्मी अब भी मौजूद है लेकिन क्योंकि पिछले साढ़े चार अरब सालों में पृथ्वी धीरे धीरे ठंडी हुई है इसलिए उसकी ऊपरी परत ठंडी है लेकिन भीतर की परतों में तापमान अब भी बहुत है. इस भीतरी गर्मी का दूसरा कारण हैं रेडियोधर्मी तत्व. जब पृथ्वी बनी थी तो उसमें ऐल्युमीनियम 26, ज़ैनॉन 129 जैसे तत्व थे जो अब नहीं मिलते, लेकिन इनके अलावा पोटाशियम 40, थोरियम 232, यूरेनियम 235 ये सभी तत्व अब भी मौजूद हैं जिनसे परमाणु रिऐक्शन होते रहते हैं और पृथ्वी इतनी गर्म रहती है.

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पाली भाषा की लिपि कौन सी है. क्या वर्तमान में यह भाषा कहीं प्रचलन में है या यह अतीत की भाषा बनकर रह गई है. यह सवाल किया है गाँव रावतसर, बाड़मेर राजस्थान से जसवंत सिंह ने.

पाली भारोपीय भाषा है जो थेरवाद बौद्ध धर्म की प्राचीनतम भाषाओं में गिनी जाती है. यह कई लिपियों में लिखी जाती थी लेकिन मुख्य रूप से इसे लिखने के लिए ब्राह्मी लिपि का प्रयोग होता था. जैसे जैसे थेरवाद बौद्ध धर्म दक्षिण पूर्वी एशिया में फैला तो इसे लिखने के लिए स्थानीय लिपियों का प्रयोग होने लगा. कहते हैं कि गौतम बुद्ध, पूर्वी भारत में बोली जाने वाली मगधी भाषा बोलते थे. प्राचीन बौद्धों का मानना है कि पाली या तो पुरानी मगधी भाषा है या उसके जैसी भाषा है. आज यह प्रचलन में नहीं है लेकिन बौद्ध धर्मग्रन्थों को समझने के लिए इसका अध्ययन किया जाता है. पाली का अर्थ है मूल पाठ. पाली में बहुत से शब्द संस्कृत से लिए गए हैं लेकिन उनका अर्थ कुछ अलग है. जैसे पाली का एक प्रमुख शब्द है धम्म जिसका अर्थ है बुद्ध के विचार. जबकि उससे मिलता जुलता संस्कृत शब्द धर्म है जिसका अर्थ बड़ा व्यापक है.

फोगेरा, बाड़मेर राजस्थान से गणपत सिंह पूछते हैं कि भारत का राष्ट्रगीत मूल रूप से किस भाषा में लिखा गया है.

गणपत जी जन गण मन मूल रूप से बँगला भाषा में लिखा गया है जिसकी रचना रबींद्र नाथ टैगोर ने की थी. इस गीत के पाँच बंद हैं लेकिन राष्ट्रगीत में केवल पहला बंद ही लिया गया है. सबसे पहले इसे 27 दिसंबर 1911 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था और 24 जनवरी 1950 को इसे संविधान सभा द्वारा राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया गया. लेकिन इसे लेकर काफ़ी विवाद भी रहा है कि यह गीत ब्रिटेन के महाराजा जॉर्ज पंचम के सम्मान में लिखा गया था. विवाद अधिनायक शब्द को लेकर है. अधिनायक का अर्थ है अधिपति. रबींद्र बाबू ने इस गीत की रचना दिसंबर 1911 में की थी ठीक उस समय जब जॉर्ज पंचम का दरबार लगा था. उस समय के कई अंग्रेज़ी अख़बारों में यह ख़बर छपी कि रबींद्र बाबू ने महाराज के स्वागत में यह गीत गाया. हालाँकि बाद में यह कहा गया कि रबींद्र बाबू ने अधिनायक शब्द का प्रयोग ईश्वर के लिए किया था.

फ़ुटबॉल से जुड़ा एक सवाल. बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के ज़रिए जंगबहादुर सिंह और उमा सिंह ने पूछा है कि डैड बॉल क्या होती है.

डैड बॉल तीन तरह की होती है. फ़्री किक, कॉर्नर किक और गोल किक के लिए गेंद को एक स्थान पर रखा जाता है और इस तरह रखा जाता है कि वह बिल्कुल स्थिर रहे. अगर गेंद हिल जाएगी तो रैफ़री फिर से किक लेने को कहेगा. इसीलिए इसे डैड बॉल कहते हैं.