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सोमवार, 13 अक्तूबर, 2008 को 10:19 GMT तक के समाचार

ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
बीबीसी संवाददाता, लंदन

सूर्य की पहली किरण कहाँ?

फ़रीदाबाद से पीयूष का सवाल है कि सूर्य की रोशनी सबसे पहले पहाड़ों पर पड़ती है, फिर भी पहाड़ों पर बर्फ़ क्यों जमी रहती है.

हमसे पूछिए का यह अंक

पहाड़ों पर ज़मीन की अपेक्षा ठंड इसलिए रहती है क्योंकि पहाड़ों पर हवा का दबाव कम होता है. जब सूर्य की किरणें वायुमंडल से होती हुई धरती पर पड़ती हैं तो वहाँ मौजूद हवा उनकी गर्माहट को जज़्ब कर लेती है. लेकिन जैसे-जैसे हवा ऊपर की ओर उठती है तो फैलती जाती है और हल्की हो जाती है इसलिए उसकी गर्माहट भी कम होती जाती है. धरती की सतह के पास की हवा सबसे गर्म होती है. हर 1000 फ़िट की ऊँचाई पर तापमान एक से दो डिग्री सेल्सियस गिर जाता है. पहाड़ जितना ऊँचा होगा तापमान उतना ही कम होता जाएगा. इसीलिए पर्वत शिखरों पर प्राय बर्फ़ जमी रहती है. वहाँ बर्फ़ जमे रहने का एक कारण ये भी है कि बर्फ़ आइने की तरह काम करती है और सूर्य की रौशनी को परावर्तित कर देती है.

पश्चिमी हिसाब से आधी रात के बाद के समय को ए एम कहते हैं यानी आधी रात के बाद तारीख़ बदल जाती है. लेकिन चित्तौड़ गढ़ राजस्थान से गोपाल कृष्ण काबरा पूछते हैं कि भारतीय पंचांग के अनुसार दिवस और तिथि कब बदलते हैं.

भारतीय पंचांग के अनुसार सूर्योदय से दिन बदलते हैं. जिन्हें सावन दिन कहते हैं, मतलब सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक. जहाँ तक तिथि का प्रश्न है तो वह सूर्य और चंद्रमा के अंतर से तय की जाती है लेकिन उसकी गणना भी सूर्योदय से ही की जाती है. उसी तिथि को मुख्य माना जाता है जो उदय काल में हो. प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष में 15 तिथियाँ होती है. लेकिन क्योंकि सौर दिन से चंद्र दिन छोटा होता है इसलिए कई बार एक दिन में दो या तीन तिथियाँ भी पड़ सकती हैं. इसमें तिथियों की तीन स्थितियाँ बनती हैं. जिस तिथि में केवल एक बार सूर्योदय होता है उसे सुधि तिथि कहते हैं, जिसमें सूर्योदय होता ही नहीं यानी वह सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है उसे छह तिथि कहते हैं, इसमें एक दिन में तीन तिथियाँ हो जाती है और तीसरी स्थिति वो जिसमें दो सूर्योदय हो जाए उसे तिथि वृद्धि कहते हैं.

चींटी की कितनी आँख होती हैं. ग्राम पलियाँ, ग़ाज़ीपुर उत्तर प्रदेश से शशिकांत प्रजापति.

चींटी की दो आँखे होती हैं जो उसके सिर के दोनों तरफ़ होती हैं. दरसल इन्हें यौगिक आँख कहना चाहिए क्योंकि इनमें नन्हें-नन्हे ढेरो लैंस होते हैं. इससे लाभ ये होता है कि चींटी हल्की से हल्की हरकत को भी देख लेती है. इन दो आँखों के अलावा अधिकतर चींटियों के, नन्हीं-नन्ही तीन आँखे और होती हैं जो उनके सिर के ऊपरी हिस्से में त्रिकोण के रूप में स्थित होती हैं. इनका काम रौशनी के स्तर को पहचानना होता है. कुछ चींटियाँ ऐसी भी होती हैं जो बिल्कुल नहीं देख सकतीं.

ओपेक का पूरा नाम क्या है. ये कैसे काम करता है और क्या कोई भी देश इसका सदस्य बन सकता है. भिवानी हरियाणा से नवीन सहारन.

ओपेक का पूरा नाम है ऑरगेनाइज़ेशन ऑफ़ द पैट्रोलियम ऐक्सपोर्टिंग कंट्रीज़ यानी तेल का निर्यात करने वाले देशों का संगठन. इसके 12 सदस्य देश हैं, ईरान, इराक़, कुवैत, क़तर, सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, लिबिया, अल्जीरिया, नाईजीरिया, अंगोला, वैनेज़ुएला और ऐक्वाडोर. इंडोनेशिया ने संगठन छोड़ने का फ़ैसला कर लिया है. ओपेक का मुख्यालय वियना में है जहाँ सदस्य देशों की नियमित बैठकें होती हैं. ओपेक का मुख्य उद्देश्य है सदस्य देशों के हितों की रक्षा करना, यह सुनिश्चित करना कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में क़ीमतों में भारी उतार चढ़ाव न आए और तेल उपभोक्ता देशों को तेल की नियमित आपूर्ति होती रहे. दुनिया में और भी कई तेल उत्पादक देश हैं लेकिन वो सब ओपेक के सदस्य नहीं. इसकी सदस्यता पाने के लिए 20 लाख डॉलर का सदस्यता शुल्क देना पड़ता है और ओपेक द्वारा तय किए गए कोटे के हिसाब से तेल का उत्पाद करना पड़ता है.

गोवाहाटी, असम से बितोपान बराह लिखते हैं कि 1962 में चीन ने भारत पर हमला क्यों किया था. उसकी सेना तवांग पास पारकर के तेज़पुर तक आ गई थी फिर लौटी क्यों.

भारत और चीन के बीच हिमालय के दो इलाक़ों को लेकर युद्ध हुआ. एक है पश्चिमी अकसाई चिन इलाक़ा और दूसरा पूर्वी नेफ़ा क्षेत्र. भारत अकसाई चिन को कश्मीर का हिस्सा मानता है जबकि चीन उसे शिंजियांग प्रांत का. यहाँ से एक सड़क मार्ग है जो शिंजियांग को तिब्बत से जोड़ता है. इस सड़क का निर्माण भी युद्ध का एक कारण बना. 20 अक्तूबर 1962 को लड़ाई शुरू हुई. लड़ाई के बहुत से क्षेत्र 14 हज़ार फ़िट की ऊँचाई पर थे. जिसने दोनों सेनाओं के लिए भारी समस्याएँ खड़ी कीं. 20 नवंबर को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपनी सेना की हालत देखकर अमरीका से मदद की गुहार लगाई. अमरीका ने अपना युद्धपोत बंगाल की खाड़ी भेजने के आदेश दिए. बस चीन ने एक तरफ़ा युद्धविराम घोषित कर दिया. उसकी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा से पीछे हट गई और उसने युद्ध में जीता सभी इलाक़ा वापस कर दिया. हां, उस इलाक़े पर नियंत्रण बनाए रखा जो युद्ध से पहले भी उसके नियंत्रण में था. इस तरह अकसाई चिन उसके पास रहा और नेफ़ा भारत के पास आ गया जिसे बाद में भारत ने अपना राज्य घोषित करके उसे नाम दिया अरूणाचल प्रदेश.

गाउट कौन सी बीमारी है. इसके कारण और लक्षण क्या हैं. यह जानना चाहते हैं हीरापुर धनबाद झारखंड से नरेश हंसदा बाबू.

गाउट एक तरह का गठिया रोग है जिससे शरीर के छोटे जोड़ प्रभावित होते हैं विशेषकर पैर के अंगूठे का जोड़. हालाँकि इससे एड़ी, टख़ने, घुटने, उंगली, कलाई और कोहनी के जोड़ भी प्रभावित हो सकते हैं. इसमें बहुत दर्द होता है, जोड़ पर सुर्ख़ी और सूजन आ जाती है और बुख़ार भी आ जाता है. यह शरीर में यूरिक ऐसिड के बढ़ने से पैदा होती है. अगर यूरिक ऐसिड बढ़ जाए तो वह बहुत नन्हें-नन्हे क्रिस्टलों के रूप में जमा हो जाता है ख़ासतौर से जोड़ों के आस पास. ये क्रिस्टल इतने धारदार होते हैं कि जोड़ों की चिकनी झिल्ली में चुभते हैं और दर्द पैदा करते हैं. इसका एक लक्षण और भी है कि कानों के पास गांठे बन जाती हैं. शरीर में यूरिक ऐसिड बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, गुर्दे का ठीक से काम न करना, भोजन में टमाटर, पालक, प्याज़, लाल गोश्त और चाय का अधिक प्रयोग और पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं या डायबटीज़ की दवाओं के प्रयोग से भी यूरिक ऐसिड बढ़ सकता है. गाउट का इलाज संभव है. सूजन दूर करने वाली दवाएं, स्टैरॉइड के इंजेक्शन, गुर्दे के ज़रिए अतिरिक्त यूरिक ऐसिड को निकालने वाली दवाएँ आदि से लाभ होता है लेकिन ये दवाएँ लंबे समय तक लेनी पड़ती हैं. कभी कभी डायलैसिस से गाउट ठीक हो जाता है.

सेड़िया सांचोर राजस्थान से तुलासराम पटीर का सवाल कि अब तक कितनी बार इंगलैंड ने क्रिकेट विश्व कप जीता है.

एक बार भी नहीं. यह प्रतियोगिता 1975 से शुरू हुई थी. 1975 और 1979 में इसे वेस्ट इंडीज़ ने जीता, 1983 में भारत ने, 1987 में ऑस्ट्रेलिया ने, 1992 में पाकिस्तान ने, 1996 में श्रीलंका ने, 1999, 2003 और 2007 में लगातार ऑस्ट्रेलिया ने.