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रविवार, 29 मार्च, 2009 को 13:48 GMT तक के समाचार

ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
बीबीसी संवाददाता, लंदन

खट्टेपन का ज़ायक़ा, मुँह में पानी!

खट्टी चीज़ें देखकर मुंह में पानी क्यों आने लगता है. यह सवाल किया है इंदासी, चुरु राजस्थान से बाबूलाल परिहार.

हमसे पूछिए का यह अंक

बाबूलाल जी इसका संबंध हमारी सीखने की प्रक्रिया से है. जब हम कोई चीज़ खाते हैं तो हमारे मुँह में लार बनती है. यह लार हमारी लाला ग्रंथियों के स्राव के कारण बनती है. लार में पानी के अलावा इलैक्ट्रोल्यूट्स, जीवाणु विरोधी यौगिक और बहुत से ऐंज़ाइम्स होते हैं. इस लार का मुख्य काम होता है भोजन को पचाना. होता ये है कि जब हम कोई चीज़ खाते हैं तो हमारे मस्तिष्क को तुरंत इसकी सूचना मिलती है और मस्तिष्क लाल ग्रंथियों को आदेश देता है और मुँह में लार पैदा हो जाती है. इस तरह हमारे मस्तिष्क में खाने की वस्तु और लार का एक तरह से संबंध बन जाता है. इसे मनोविज्ञान में अनुबंधन या कंडीशनिंग कहते हैं. अब हम जब भी खाने की वह चीज़ देखते हैं तो मुंह में लार पैदा होने लगती है. इसी को मुंह में पानी आना कहा जाता है.

सोन नदी की उत्पत्ति कहाँ से होती है और कहाँ जाकर ख़त्म होती है. यह जानना चाहते हैं डेहरी आनसोन, रोहतास बिहार से बिश्वनाथ भद्र, प्रतिमा भद्र और कौशिक भद्र.

सोन नदी मध्य प्रदेश के अमरकंटक क्षेत्र से निकलती है. यह वह स्थान है जहाँ विंध्याचल, सतपुरा और मैकल पहाड़ियाँ मिलती हैं. यही नर्मदा, सोन और जोहिला नदियों का उदगम स्थान है. सोन नदी का उदगम स्थान है सोनमुडा जो नर्मदाकुंड से डेढ़ किलोमीटर दूर मैकल पहाड़ियों के सिरे पर है. यहाँ से एक झरना बहता है जो कई सौ फ़ुट नीचे गिरता है सोन नदी बनकर बहता है. यहाँ से सोन नदी उत्तर पश्चिम की ओर बहती हुई कैमुर पहाड़ियों के बीच से उत्तर प्रदेश और बिहार से होती हुई पटना से कुछ ऊपर गंगा में जा मिलती है. सोन नदी 784 किलोमीटर लंबी है और इसका पाट 3 से 5 किलोमीटर चौड़ा है.

अब तक कितने भारतीय लेखकों को बुकर पुरस्कार मिल चुका है यह जानना चाहते हैं पंजाब से मोहित.

साहित्य का बुकर पुरस्कार भारत के तीन लेखकों को मिल चुका है. 1981 में सलमान रुशदी को उनके उपन्यास मिडनाइट्स चिल्ड्रन के लिए दिया गया. हालाँकि रुशदी ब्रिटिश नागरिक हैं. फिर 1997 में द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स के लिए अरुंधति रॉय को बुकर पुरस्कार मिला और 2006 में द इनहैरिटैंस ऑफ़ लॉस के लिए किरण देसाई को.

किन परिस्थितियों में 1962 में बर्मा में सैनिक शासन की स्थापना हुई. सुल्तान पोखर, अररिया बिहार से कमलेश शर्मा ने यह सवाल लिख भेजा है.

बर्मा को 1948 में ब्रिटेन से आज़ादी मिली. लेकिन आज़ादी के साथ ही व्यापक आंतरिक संघर्ष होने लगे. राजनीतिक और जातीय समूहों में विभाजन और संवैधानिक विवाद गहराने लगे. इन संघर्षों के लिए ज़िम्मेदार थे, विभिन्न कम्युनिस्ट दल, सैनिक विद्रोही, अराकानी मुसलमान और कैरेन विद्रोही. सन् 1958 में प्रधानमंत्री यू नू ने व्यवस्था बहाल करने के लिए सेना की मदद मांगी. जब स्थितियाँ बेहतर हो गईं तो जनरल नी विन ने 1960 में आम चुनाव कराए और यू नू की यूनियन पार्टी बहुमत से चुनाव जीती. लेकिन कुछ समय बाद स्थितियाँ फिर बिगड़ने लगीं और 1962 में जनरल नी विन ने सैन्य विप्लव करके संविधान को रद्द कर दिया और सैन्य सरकार का गठन किया.

बर्मा की विपक्षी नेता ऑंग सान सू ची क्यों नज़रबंद कर रखा है. जानना चाहते हैं गोहदा रुपौली समस्तीपुर बिहार से गौतम कुमार.

1962 में सत्ता हथियाने के बाद जनरल नी विन ने 1974 तक इसे संभाला लेकिन फिर उन्होंने अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए सेना का पद छोड़कर बर्मा सोशलिस्ट प्रोग्राम पार्टी के माध्यम से सरकार चलाई. बर्मा के छात्र वर्ग ने सैन्य शासन का कई बार विरोध किया लेकिन हर बार उसका सख़्ती से दमन कर दिया गया. 1988 में एक बार फिर लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन शुरू हुए. आठ अगस्त को हुए एक बहुत बड़े प्रदर्शन पर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की जिसमें हज़ारों प्रदर्शनकारी मारे गए. इस जनसंहार के बाद आँग सान सू ची ने पहली बार एक रैली को संबोधित किया. सितंबर में उन्होंने नेशनल लीग फ़ॉर डैमोक्रेसी पार्टी का गठन किया. और सैनिक प्रशासन ने अगले साल ही उन्हें घर में नज़रबंद कर दिया. फिर मई 1990 में बर्मा में आम चुनाव कराए गए जिसमें आँग सान सू ची की नेशनल लीग फ़ॉर डैमोक्रेसी को भारी जीत मिली. लेकिन सैनिक सरकार ने यह परिणाम मानने से इनकार कर दिया और बहुत से राजनेताओं को जेलों में डाल दिया. आँग सान सू ची 1989 से लगातार किसी न किसी बहाने से नज़रबंद हैं.

लखनऊ, उत्तर प्रदेश से राजीव कुमार सिंह पूछते हैं कि क्रिकेट की पिच पर क्या हरी घास होती है या फिर से सूखी घास से पिच बनाई जाती है.

क्रिकेट के पिच पर घास का वही बीज इस्तेमाल होता है जो किसी आम बगीचे में होता है लेकिन जब पिच पर रोलर घुमाया जाता है तो वह भूरी हो जाती है. पिच अगर हरी है तो वह स्विंग गेंद बाज के लिए अच्छी है जबकि भूरी घास वाली पिचें बल्लेबाज़ों के लिए बेहतर होती हैं.

और अब डॉक्टर से पूछिए...

इटली से अंजू शर्मा ने ईमेल भेजा है जिसमें वो लिखती हैं कि उनकी तीन साल की बच्ची के दिल में जन्म से ही एक छोटा सा छेद है. क्या ऑपरेशन ही एक मात्र इलाज है.

यह तकलीफ़ काफ़ी बच्चों में देखी जाती है. लेकिन सवाल ये छेद है कि यह छेद है कहाँ. दिल हमारे शरीर का पम्पिंग स्टेशन है जहाँ से पूरे शरीर में ख़ून जाता है. दिल के चार कोष्ठ होते हैं. ऊपर वाले दो कोष्ठकों को ऐट्रिया कहते हैं जबकि नीचे वाले दो कोष्ठकों को वैन्ट्रिकल्स कहा जाता है. दोनों कोष्ठकों के बीच एक पर्दा सा होता है और छेद आमतौर पर इसी पर्दे में होता है. अगर यह छेद ऊपरी कोष्ठकों के बीच के पर्दे में है तो अधिक समस्या नहीं होती क्योंकि यह जन्म के कुछ सप्ताह के भीतर स्वयं बंद हो जाता है. नीचे वाले कोष्ठकों के बीच के पर्दे में जो छेद होता है वह प्राय जन्म के बाद होता है. यह भी तीन चार साल में बंद हो जाता. लेकिन अगर ये बंद न हो और आकार में बड़ा हो तो दिल को ख़ून पम्प करने में दिक्कत होती है. इस स्थिति में शल्य चिकित्सा करके इसे बंद कर दिया जाता है.

गुर्दे के ख़राब हो जाने पर ख़ून किस मशीन से साफ़ करते हैं. जानना चाहते हैं ग्राम राजन, गया बिहार से साधु साव सज्जन.

गुर्दे के स्थाई या अस्थाई रूप से काम बंद करने बाद, जिस मशीन का उपयोग किया जाता है उसे डायलिसिस कहते हैं. गुर्दे शरीर में पानी और खनिज के भीतरी संतुलन को बनाए रखते हैं. रक्त में जो ज़हरीले पदार्थ होते हैं गुर्दे उन्हें छानने और उसे पेशाब के रूप में शरीर से निकाल बाहर करने का काम करते हैं. शरीर का सारा ख़ून प्रतिदिन सात आठ बार गुर्दों से होकर गुज़रता है. लेकिन अगर ये काम करना बंद कर दें तो इनका काम डायलिसिस की मशीन से करना पड़ता है. इसमें रोगी के ख़ून को बहुत सी नलियों द्वारा शरीर से निकालकर छाना जाता है और वापस डाला जाता है. लेकिन रोगी को सप्ताह में तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है जिसमें हर बार तीन से चार घंटे लगते हैं.

ग्राम चेतनपुर, गाज़ीपुर उत्तर प्रदेश से पंकज तिवारी ने पूछा है कि सूर्य में जो परमाणु ईंधन होता है उसमें हीलियम होता है या हाइड्रोजन.

जैसा कि आप जानते हैं सूर्य विभिन्न गैसों का जलता हुआ गोला है. इसका 74 प्रतिशत द्रव्यमान हाइड्रोजन का है और कोई 25 प्रतिशत हीलियम का.

पटना से कमलेश कुमार ने पूछा है कि क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा शहर कौन सा है दिल्ली या मुंबई.

दिल्ली सबसे बड़ा शहर है जिसका क्षेत्रफल है 1483 वर्ग किलोमीटर जबकि मुम्बई का क्षेत्रफल है 603.4 वर्ग किलोमीटर.

नवानगर, बक्सर बिहार से राजीव कुमार ने पूछा है कि अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का पेशा क्या था.

राजनेता होने के अलावा अब्राहम लिंकन एक सफल वकील थे. उन्होंने 23 साल वकालत की जिस दौरान अकेले इलिनॉय राज्य में ही उन्होंने छोटे बड़े 5100 मुक़दमे लड़े और 400 बार राज्य के सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए.