सिंध के 'संदेश' की परेशानी

संदेश
Image caption संदेश पाकिस्तान में हिंदुओं का पहला समाचार पत्र है

पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के लिए निकलने वाला पहला समाचार पत्र आर्थिक संकट से जूझ रहा है. सिंध के शहर हैदाराबाद से निकलने वाला यह साप्ताहिक समाचार पत्र 'संदेश' का आग़ाज़ इस साल की शुरुआत में हुआ था.

इस समाचार पत्र की सिंध की दलित बिरादरी, छात्रों और राजनीतिक क्षेत्रों में काफ़ी सराहना हुई थी.

इससे पहले हिंदू समुदाय के लिए देश में धार्मिक पत्रिकाएं निकलती रही है, लेकिन कोई बाक़ायदा अख़बार कभी भी नहीं निकला.

अख़बार के संपादक हरजी लाल एक अनुभवी पत्रकार हैं और सिंधी दैनिक 'इबरत' से जुड़े हुए हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि जब सिंध में कोई हिंदू लड़की का बलात्कार होता है तो सिंधी अख़बार दो कॉलम की ख़बर लगाते हैं और उसे भूल जाते हैं और यह भी नहीं बताते कि अभियुक्त पकड़ा गया है या नहीं.

वो आगे कहते हैं कि पिछले साल दिसंबर में जब थरपाकर के इलाक़े ननगरपाकर में कस्तूरी कोहली नामक एक लड़की का बलात्कार हुआ तो मीडिया दो कॉलम की ख़बर देकर भूल गया.

ग़द्दार समझा जाता है

हरजी लाल में इस बरस जब संदेश निकाला तो कस्तूरी की कहानी को प्रमुखता दी और इसकी कॉपी राजनेताओं और अधिकारियों को अख़बार की कॉपियां भेजीं जिसके बाद मीडिया ने ये मामला दोबारा उठाया और प्रशासन को इस मुक़दमे को दोबारा खोलने पर मजबूर होना पड़ा.

इसी तरह कुछ महीने पहले जब मीरवाह गोरचानी में एक हिंदू परिवार अपनी तीन बेटियों के साथ ख़ुदकुशी की तो मीडिया ने इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन संदेश ने इस ख़बर को दलितों में बढ़ते अंधविश्वास के रुप में अच्छी खासी जगह दी.

एक अंदाज़े के अनुसार में पाकिस्तान में लगभग 20 लाख हिंदू हैं. जिनमें 12 लाख से अधिक सिंध प्रांत में रहते हैं.

हरजी लाल का कहना है कि सिंध में हिंदुओं की समस्याएं गंभीर हैं.

वो कहते हैं, "मुसलमान हमें शक की नज़र से देखते हैं, ऊंची जाति के हिंदू भी भेदभाव में विश्वास करते हैं, ख़ुद दलितों भी इस तरह की भावनाएं हैं. वो आपस में एक दूसरे से अपने से नीचा समझते हैं."

हरजी लाल का कहना है कि संदेश का बुनियादी मक़सद हीन भावना से ग्रसित हिंदुओं को बाहर निकलाना है. उनका कहना है कि वो अपने अख़बार में हर धर्म का प्रचार नहीं करते बल्कि नौजवानों में राजनीतिक समझ पैदा करने की कोशिश करते हैं.

संदेश से जुड़े एक अन्य सदस्य मुकेश मीघोड़ा कहते हैं जब से पाकिस्तान बना है कभी कोई दलित हिंदू देश के खिलाफ़ किसी कार्रवाई में शामिल नहीं रहा है. फिर भी हिंदुओं को ग़द्दार समझा जाता है.

उनका कहना है कि बाबरी मस्जिद भारत में गिराई गई थी लेकिन इसका मलबा पाकिस्तानी हिंदुओं पर गिरता है.

मुकेश का कहना है कि पाकिस्तान में हिंदुओं के बारे में अनेक भ्रांतियां हैं और उसे दूरे करने की ज़रूत है.

इसलिए वो अपने अख़बार में मुसलमानों से लेख लिखवाने की कोशिश करते हैं.

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