'दिल का रिश्ता बड़ा ही प्यारा है'

एसएम कृष्णा और शाह महमूद कुरैशी
Image caption भारत और पाकिस्तान के गृहमंत्री 15 जुलाई को इस्लामाबाद में मिलेंगे.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मंगलवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाल हो रहा है और वे आशान्वित हैं.

उनके भारतीय समकक्ष एसएम कृष्णा ने भी कहा कि वे भी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर आशान्वित हैं.

कुछ महीने पहले दोनों देशों की ओर से बड़े सख़्त बयान सामने आ रहे थे. एक दूसरे पर तीखा प्रहार किया जा रहा था.

भूटान में हुए सार्क शिखर सम्मेलन के कुछ दिन पहले और बाद में दोनों देशों के रवैयों पर पड़ा परिवर्तन देखा जा रहा है.

भारत और पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान में कुछ चेहरे अब एक ही स्वर में बात कर रहे हैं.

इसको देख कर मुझे एक घटना याद आ रही है. मार्च के में अंत में मैं भारत गया था और लाहौर से दिल्ली तक की यात्रा सड़कमार्ग से की थी.

दोस्ती का सफ़र

लाहौर से वाघा सीमा तक टैक्सी में गया. टैक्सी ड्राइवर ख़लील अहमद ने शहर की भीड़ से जान छुड़ाते ही कहा,''सर जी, गाना चला लूँ तो आप को तकलीफ तो नहीं होगी.''

मैंने कहा,''नहीं मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी.''

उन्होंने जो गाना चलाया उसके बोल कुछ इस तरह थे. ''दिल का रिश्ता बड़ा ही प्यारा है, कितना पागल यह दिल हमारा है, हम तो इक दूसरे पर मरते हैं, जानता यह जहान सारा है.''

ख़लील वाघा सीमा के पास एक गाँव में रहते हैं. विभाजन से पहले उनका परिवार अंबाला के पास एक गाँव में रहता था.

ख़लील कभी भारत नहीं गए. केवल वाघा सीमा से भारत के दृश्य देखे हैं. वे भारत जाना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि जब दोनों देशों के बीच संबंध ओर बेहतर होंगे तो वे ज़रूर जाएँगे.

ख़लील अहमद को ख़ुदा हाफिज़ कह कर मैंने भारतीय सीमा में प्रवेश किया. वहाँ से मैंने अमृतसर के लिए टैक्सी ली.

हम जैसे ही थोड़ा आगे बढ़े तो टैक्सी ड्राइवर प्रकाश सिंह ने कहा,''सर जी, गाना चलने से आप को कोई दिक्कत तो नहीं होगी.''

मैंने कहा नहीं. यह वहीं वाक्य था जो लाहौर के ड्राइवर ने कहा था.

प्रकाश सिंह ने वही गाना चलाया जो लाहौर से वाघा आते हुए ख़लील अहमद ने चलाया था. मैंने प्रकाश सिंह को बताया कि सरदार जी यह बड़ा अजीब संयोग है कि ख़लील ने भी यही गाना चलाया था.

तो प्रकाश सिंह ने मेरी ओर देखते हुए कहा, ''सर जी, कोई संयोग नहीं है और हम दोनों एक ही हैं. दोनों लोगों का आपस में दिल का रिश्ता है. आप यही समझ लो कि ख़लील ही आपको अमृतसर ले आया है. मैं ख़लील भी हूँ और प्रकाश भी.''

सीमा के दोनों तरफ देखने से लगता है कि राजनीति ने किस तरह दोनों तरफ के लोगों को अलग कर दिया है लेकिन यह आज भी सत्य है कि जब संगीत सीमा के उस पार बजता है तो इस पार के लोग नाचते हैं.

अब जबकि दोनों देश शांति प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं तो दोनों को चाहिए कि मुद्दों को हल के लिए कोई दीर्घकालीन समाधान तलाश करें.

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