क्रिकेट देखने का इस्लामी तरीका !

  • 16 मई 2010
Image caption बम और बंदूक वाले भी क्रिकेट का शौक रखते हैं.

पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों में मौजूद एक पंजाबी तालिबान से टेलीफोन पर बातचीत के दौरान उस समय अचानक आश्चर्य हुआ जब उन्होंने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के टी 20 वर्ल्ड कप के सेमी-फ़ाइनल में पहुँचने के बारे में पूछा.

मैंने पूछा कि क्या वो भी क्रिकेट में रुचि रखते हैं तो उनका कहना था, “हाँ, बचपन में मदरसे के बाहर खुले मैदान में क्रिकेट ही खेला करते थे. लेकिन अब वज़ीरिस्तान में टीवी तक पहुँच तो संभव नहीं है इसलिए इंटरनेट पर ही स्कोर का पता कर लेते हैं.”

इस संक्षिप्त बातचीत के बाद मैंने सोचा कि अगर तालिबान भी पाकिस्तानी क्रिकेट में रूचि रखते हैं तो उनके लिए इस खेल को देखने का इस्लामी तरीक़ा क्या हो सकता है? मेरे इस सवाल का जवाब ईमेल पर मिला और एक घोषणा भेजी गई.

मुफ़्ती आशिक़ हुसैन क्रिकेटवी जलाली नामक एक व्यक्ति ने यह ईमेल भेजी जो आप की ख़िदमत में हाज़िर है.

इस्लामी तरीका

हमेशा की तरह इस बार भी क़ौमी क्रिकेट टीम जनता की दुआओं से सेमी फ़ाइनल में पहुँच गई है. अब सेमी फ़ाइनल देखते समय इन बातों का ख़याल रखा जाए.

1. मैच से एक घंटा पहले अपने (लेकिन अपने से ज़्यादा अपने खिलाड़ियों के) पापों के लिए माफ़ी मांगना शुरु कर दें.

2. मैच हमेशा वज़ू के साथ और मुस्सले पर बैठ कर देखें.

3. मैच के दौरान क्रिकेट की बजाए दुआओं में रुचि रखें.

4. कैच गिरने पर तुरंत लाहौल-विला क़ूव्वत कहें और बार बार दोहराएं.

5. कमज़ोर दिल लोग मैच सजदे की हालत में सुनें.

6. सेमी फाइनल देखते समय आप को रोज़ा रखना चाहिए.

7. अगली टीम के बेहतर प्रदर्शन को अमेरिका, ब्लैकवॉटर और शैतान की चाल समझें.

नोट:

फाइनल में पहुँचने का यह मतलब नहीं कि आप की दुआएँ क़बूल हुईँ और पाप माफ़ हुए बल्कि इसकी वजह से सट्टेबाज़ों के कारोबार में मंदी भी आ सकती है.

पाकिस्तानी टीम के फाइनल में पहुँचने की सूरत में करीबी इस्लामी मदरसे में बीस तालिबों को दो वक्त का खाना खिलाएँ और उन से दुआ मंगवाएँ.

आमीन

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