चरमपंथियों के ख़िलाफ़ जिहाद

  • 23 मई 2010
सलमान अहमद
Image caption सलमान अहमद अपने संगीत के माध्यम से चरमपंथ से लड़ना चाहते हैं

पाकिस्तान में जन्मे रॉक संगीत सितारे सलमान अहमद का कहना है कि वो अपने संगीत के माध्यम से मुस्लिम चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहे हैं.

उनकी संगीत मंडली के दुनिया भर में अब तक तीन करोड़ रेकार्ड बिक चुके हैं और उन्हे दक्षिण एशिया का यू2 कहा जाता है.

सलमान मुसलिम संगठनों के लिए सहिष्णुता और अहिंसा का संदेश लेकर ब्रिटेन आए हैं और साथ ही अपनी आत्मकथा 'रॉक एंड रोल जिहाद' का प्रचार करने.

उनका कहना है कि जिन नौजवानों के लिए वो संगीत रचना करते हैं उन्ही को चरमपंथी भी लक्ष्य कर रहे हैं. लेकिन सलमान को विश्वास है कि कला और संस्कृति चरमपंथ से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

वो कहते हैं, “संगीत में लोगों को एक साथ लाने की शक्ति है और चरमपंथी ये नहीं चाहते”.

डॉक्टर से बने गायक

सलमान अहमद ने यूं तो डॉक्टरी की पढ़ाई की थी लेकिन 1990 में उन्होने ‘जुनून’ नाम से अपनी संगीत मंडली बनाई और संगीत के लिए चिकित्सा के व्यवसाय को छोड़ दिया.

जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़िया उल हक़ के ज़माने में गाने बजाने पर पाबंदी लग गई थी. सलमान बताते हैं कि एक बार वो गुप्त रूप से आयोजित टेलेंट शो में हिस्सा ले रहे थे कि चरमपंथी छात्र वहां घुस आए और उन्होने उनका गिटार तोड़ डाला.

वो कहते हैं, “मेरा गिटार तोड़ने के बाद उन्होने धमकी दी कि अगर मैंने फिर गिटार बजाने की कोशिश की तो वो मुझे गोली मार देंगे”.

सलमान अहमद बीटल्स के प्रशंसकों में से एक हैं और उन्हे लेड ज़ैपलिन से प्रेरणा मिली.

वो अब अमरीका में रहते हैं लेकिन पाकिस्तान आते जाते रहते हैं.

जिहाद का मतलब

अहमद 46 साल के हैं और जिहाद को परिभाषित करते हुए कहते हैं कि जिहाद का मतलब है बेहतरी.

वो कहते हैं, “मुसलिम समुदाय अपनी भाषा और संस्कृति को चरमपंथियों के हाथों अगवा होने दे रहा है”.

सलमान अहमद कहते हैं, “दुनिया में डेढ़ अरब मुसलमान हैं और वो संगीत, कविता, नृत्य और हंसी मज़ाक का आनंद लेते हैं. लेकिन जो तस्वीर दुनिया के सामने उभरती है वो अतिवाद की है. अगर अधिकतर मुसलमानों का दृष्टिकोण अतिवादी होता तो भला मेरे तीन करोड़ रेकार्ड बिक सकते थे”.

सलमान कहते है कि वो इस्लाम के उसूलों पर अमल करने वाले मुसलमान हैं और उन्होने क़ुरान पढ़ी है.

उनकी नज़र में उनका धर्म रचनात्मकता को प्रेरित करता है. उनका कहना है कि चौदह सौ साल की मुसलिम सभ्यता ने दुनिया को सैकड़ों कलाकार, संगीतकार और ख़ूबसूरत प्रेम काव्य दिया है”.

पाकिस्तान में सलमान अहमद के सैकड़ों प्रशंसक हैं लेकिन जब उनकी मंडली ने राजनीतिक भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई और उसपर एक गीत रच डाला तो उनपर प्रतिबंध लग गया.

सलमान आत्मघाती हमलावरों से कहते हैं, “मैं चरमपंथियों से कहता हूं कि तुम इसलाम के लिए नहीं बोलते. तुम मेरी तरफ़ से भी नहीं बोलते. अगर तुम अपने को विस्फोटकों से उड़ा देना चाहते हो तो तुम्हारी मर्ज़ी लेकिन इसे धार्मिक जामा न पहनाओ”.

उनका कहना है कि इसलाम में आत्महत्या करने या बेगुनाह महिलाओं और बच्चों को मारने की इजाज़त नहीं है.

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