भारत-पाक युद्ध विकल्प नहीं: ज़रदारी

ज़रदारी
Image caption ज़रदारी ने कहा कि मुंबई हमलों के बाद भारत के रवैये से वे निराश हैं

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध कोई विकल्प नहीं है और शांति ही इस क्षेत्र का भविष्य है.

अमरीकी पत्रिका 'न्यूज़वीक' को दिए गए अपने साक्षात्कार में उन्होंने उन तत्वों की कड़े शब्दों में निंदा की जो भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित नहीं होने देते.

उन्होंने कहा, “नए दौर के आतंक ने ऐसा माहौल बना दिया है कि कुछ लोग दोनों देशों के बीच युद्ध का कारण बन सकते हैं.”

उन्होंने कहा, “इनके संबंध को पाकिस्तान, भारत या बांग्लादेश से जोड़ा जाना अनावश्यक है. सच्चाई यह है कि ये राज्य से जु़डे तत्व नहीं हैं और सरकार को सरकार की तरह व्यवहार करना चहिए.”

परिपक्वता की उम्मीद

नवंबर, 2008 में हुए मुंबई हमलों के बाद भारत सरकार के रवैये पर बात करते हुए राष्ट्रपति आसिफ ज़रदारी ने कहा, “मैं नई दिल्ली के रवैये से निराश हूँ.”

मुंबई हमलों के दौरान गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी नागरिक अजमल कसाब के प्रत्यर्पण पर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा, “मुझे आशा थी कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र देश परिपक्व ढंग से बर्ताव करेगा.”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका रवैया भारत के प्रति सख़्त हो गया है, उन्होंने जवाब दिया, "ऐसी कोई बात नहीं है और मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा."

उन्होंने कहा, "मैं स्वभाव से उदारवादी हूँ और लोकतंत्र के सिद्धांतों पर विश्वास रखता हूँ. और जहाँ तक भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों का प्रश्न है तो दोनों देशों के सामने युद्ध कोई विकल्प नहीं है."

एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ व्यापार करने का इच्छुक है और वह इस संदर्भ में किसी के दबाव में नहीं आएगा.

संघर्ष

न्यूयॉर्क में नाकाम बम हमले के बाद क़बायली इलाकों में चरमपंथियों के ख़िलाफ सैन्य अभियान करने के लिए बढ़ते अमरीकी दबाव पर उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तान को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं."

उन्होंने कहा, "हम जानना चाहते हैं कि अफग़ानी और पाकिस्तानी तालेबान को धन कौन दे रहा है."

पाकिस्तान में न्यायपालिका और कार्यपालिका में बढ़ते टकराव की स्थिति पर राष्ट्रपति ज़रदारी ने कहा कि इस संकट से उनकी सरकार को कोई ख़तरा नहीं है.

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका अपनी सीमाओं में रहते हुए अपना कर्तव्य निभाएँगे और संकट जल्दी ही ख़त्म हो जाएगा.

संबंधित समाचार