ईरान-पाक गैस समझौते पर दस्तख़त

  • 14 जून 2010
ईरानी और पाकिस्तानी अधिकारी
Image caption ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन पर तेहरान में समझौता करते अधिकारी

ईरान ने पाकिस्तान को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति देने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया है.

लगभग सात अरब डॉलर की लागत वाली इस गैस परियोजना के तहत ईरान वर्ष 2014 से पाकिस्तान को गैस देना शुरू कर देगा.

तेहरान में क़रार पर दस्तख़त करने के बाद ईरान के तेल उपमंत्री जवाद ओउजी ने कहा कि ईरान पाकिस्तान को प्रतिदिन दो करोड़ दस लाख घन मीटर गैस का निर्यात करेगा.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चिंता जतानेवाला अमरीका इस समझौते का विरोध करता है.

पहले इस गैस परियोजना में भारत भी शामिल था और ईरान की गैस को पाकिस्तान के रास्ते भारत तक लाए जाने की योजना थी.

लेकिन क़ीमतों को लेकर मतभेद, पाकिस्तान से गैस ले जाने के किराए और संभवतः अमरीका के दबाव के कारण भारत इस समझौते से अलग हो गया.

गैस पाइपलाइन

ये समझौता अरबों डॉलर की उस परियोजना के तहत हुआ है जिसके तहत ईरान के दक्षिण फ़ार्स स्थित विशाल गैस क्षेत्र को पाकिस्तान के बलूचिस्तान और सिंध प्रांत से पाइपलाइनों से जोड़ा जाना है.

पाकिस्तान की ऊर्जा ज़रूरतों के लिए इस समझौते को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

ईरान से निर्यात की जानेवाली गैस पाकिस्तान में अभी उत्पादित हो रही गैस के 20 प्रतिशत हिस्से के बराबर होगी.

गैस बिक्री का ये समझौता 25 साल के लिए हुआ है जिसे और पाँच साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है.

ईरान के पास रूस के बाद दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार है मगर राजनीतिक उथल-पुथल, पश्चिमी देशों की पाबंदियों और दूसरे कारणों से ईरान अपने तेल और गैस क्षेत्र का ढंग से विकास नहीं कर पाया है.

समझा जा रहा है कि ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन से गैस के बाज़ार में ईरान की पकड़ मज़बूत होगी.

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