पाक मीडिया पर 'शिकंजा कसने' की तैयारी

  • 30 जून 2010
जीयो टीवी का एक कार्यक्रम
Image caption इस विधेयक में टीवी, रेडियो और इंटरनेट पर ख़बरो के कार्यक्रमों से संबंधित कड़े प्रावधान हैं

पाकिस्तान की संसद में एक ऐसा विधेयक लाया गया है जिसके पारित होने से स्वतंत्र मीडिया पर सरकार को शिकंजा कसने का मौका मिल सकता है. ये विधेयक के दायरे में ब्रॉडकास्ट और ऑनलाइन संस्थाएँ आएँगी.

सरकार की मंशा पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़ द्वारा मीडिया संगठनों के कामकाज को संचालित करने के लिए बनाए गए एक क़ानून में संशोधन करने की है.

राजनीतिक पर्यवेक्षकों को डर है कि यदि विधेयक पारित होता है तो उसके इस्तेमाल से सररकार की आलोचना करने वाली संस्थाओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो सकती है.

'राष्ट्र के ख़िलाफ़ सामग्री नहीं'

मीडिया विधेयक: मुख्य बातें आत्मघाती हमलों, चरमपंथियों या फिर शिकार हुए लोगों के शवों की तस्वीरें दिखाने पर मनाहीउग्रवादी गतिविधियों से संबंधित चरमपंथियों के बयान, भाषण और उनकी गतिविधियाँ दिखाने पर रोककिसी कार्यक्रम में ऐसी सामग्री न हो जिससे चरमपंथी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेपाकिस्तान की विचारधारा, सर्वोच्च हितों, स्वतंत्रता और सुरक्षा के विरोध में कार्यक्रम प्रसारित नहीं हो सकते

रेडियो, टीवी और इंटरनेट पर समाचार देने वाली संस्थाओं से संबंधित इस विधेयक पर कुछ ही दिनों में मतदान होगा. प्रिंट मीडिया यानी अख़बारों और पत्रिकाओं पर इस विधेयक का कोई असर नहीं होगा.

उधर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेतृत्व वाली केंद्रीय सरकार ने इन संस्थाओं के सेंसरशिप के डर को घटाने के मक़सद से दावा किया है कि जो संशोधन लाए जा रहे हैं, वे सैन्य शासन के समय लाए गए कड़े प्रावधानों में कुछ ढील लाने के लिए हैं.

पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी एक्ट पर संसद की मीडिया समिति विचार कर रही है और फिर इसे वोटिंग के लिए संसद के समक्ष रखा जाएगा.

इस विधेयक के तहत मीडिया को आत्मघाती हमलों, चरमपंथियों या फिर ऐसी घटनाओं के शिकार हुए लोगों के शवों की तस्वीरें दिखाने की इजाज़त नहीं होगी.

इस विधेयक में ऐसे प्रावधान भी हैं जिनसे उग्रवादी गतिविधियों से संबंधित चरमपंथियों के बयान, भाषण और उनकी अन्य गतिविधियों को दिखाने पर रोक लग सकती है.

ब्रॉडकास्टर को सरकार को आश्वासन देने होगा कि उसके किसी भी कार्यक्रम से चरमपंथी गतिविधियों या फिर किसी के प्रति घृणा को बढ़ावा नहीं मिलेगा.

ग़ौरतलब है कि विधेयक में प्रावधान है कि ऐसे कार्यक्रम जो पाकिस्तान की विचारधारा, सर्वोच्च हितों, स्वतंत्रता और सुरक्षा का विरोध करते हों, उनका प्रसारण नहीं किया जाएगा.

जो कंपनी इसका उल्लंघन करती है उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा. इसी के साथ ऐसी कंपनियों और उसके अधिकारियों पर एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना और उन्हें तीन साल तक की जेल हो सकती है.

महत्वपूर्ण है कि कुछ समय पहले पाकिस्तान की सरकार ने गूगल, याहू, यूट्यूब, आमेज़न, एमएसएन, हॉटमेल और बिंग, वेब साइटों पर प्रकाशित होने वाली सामग्री पर निगरानी रखने की घोषणा की थी. साथ ही ये भी कहा था कि इसके अलावा 17 अन्य वेबसाइटों को ब्लॉक किया जाएगा.

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