तालिबान से बात करें: नवाज़ शरीफ़

नवाज़ शरीफ़
Image caption नवाज़ शरीफ़ ने सुझाव दिया है कि तालिबान से बात की जानी चाहिए

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि उसे देश की शांति और स्थिरता के लिए तालिबान विद्रोहियों से बात करनी चाहिए.

लाहौर में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “यदि वाशिंगटन से यह बात कही जाती है कि तालिबान से उसे बात करनी चाहिए तो इस प्रकार का क़दम इस्लामाबाद को भी उठाना चाहिए.”

उन्होंने आगे कहा, “यह न देखें कि अमरीका हमारी तक़दीर का क्या फैसला लेगा बल्कि हमें अपनी तक़दीर के फैसले ख़ुद करने चाहिए.”

नवाज़ शरीफ़ ने पत्रकारों को बताया, “आतंकवाद और चरमपंथ हमारे घर की समस्या है तो क्यों न हम पहल करें और किसी ओर की तरफ से पहल का इंतज़ार क्यों करें.”

उनके अनुसार आंतकवाद का सीधा संबंध देश की विदेश और राष्ट्रीय नीति से है और यह नीति इस्लामाबाद में बनती है लेकिन उसका ख़ामियाज़ा प्रांतों को भुगतना पड़ता है.

'पहल करें'

उन्होंने कहा, “यह नीति सैन्य शासक के कार्यकाल में बनी थी और मौजूदा सरकार ने इसका इलाज नहीं किया.”

पंजाब के चरमपंथियों की मौजूदगी और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई के बारे में पूछे गए एक सवाल पर नवाज़ शरीफ़ ने कहा, “हम आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध लड़ रहे हैं और आतंकवाद जहाँ से भी उठे उसका मुक़ाबला करना हमारा कर्तव्य है लेकिन यह कह देना कि दक्षिण पंजाब में आतंकवादी संगठन हैं, वे पहले यह तो दिखाएँ कि वे संगठन कहाँ हैं. हमें इस प्रकार के कोई संगठन नहीं दिख रहे हैं.”

एक और सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “यदि मेरी पार्टी के चरमपंथियों के साथ संबंध होते तो फिर लाहौर और पंजाब के अन्य शहरों में आतंकवादी घटनाएँ न होती.”

नवाज़ शरीफ़ ने बताया कि 'आतंकवादी केवल आतंकवादी होते हैं उन्हें पंजाबी,सिंधी या बलोच कहना ठीक नहीं है.'

ग़ौरतलब है कि जब से पंजाब में चरमपंथी हमले हो रहे हैं तो उसके पीछे पंजाबी तालिबान का नाम सामने आ रहा है. नवाज़ शरीफ़ को पंजाबी तालिबान शब्द से आपत्ति है और वह पहले भी यह कह चुके हैं.

उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने उन्हें बताया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और उसके मातहत ख़ुफियाँ एजेंसियाँ पंजाब सरकार को कोई सूचना नहीं दे रही हैं जो चरमपंथियों का मुक़ाबला करने के लिए ज़रूरी है.

नवाज़ शरीफ़ ने प्रस्ताव दिया कि चरमपंथी घटनाओं के ख़ात्मे के लिए एक राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया जाए.

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