स्वात में पुरानी रौनक़ लौटी

  • 8 जुलाई 2010
स्वात घाटी, पाकिस्तान
Image caption स्वात अपनी पुरानी ज़िंदगी की तरफ़

पाकिस्तान की जन्नत कही जाने वाली घाटी स्वात में एक-डेढ़ साल पहले तक कोई ये सोच भी नहीं सकता था कि एक मेले में मर्द और औरतें एक साथ शामिल होकर नाच गाना करेंगे, तेज़ आवाज़ में संगीत का मज़ा लेंगे और पाकिस्तान का स्विट्ज़रलैंड कहलाने वाला ज़िला अपनी पुरानी ज़िंदगी की तरफ़ तेज़ी से लपकता हुआ नज़र आएगा.

इस तरह का नज़ारा पिछले कुछ दिनों से स्वात में दिखाई दे रहा है.

स्वात में पिछले साल सेना के ऑपरेशन की समाप्ति के बाद पहली बार सरकार की तरफ़ से 20 दिनों का अमन मेला आयोजित किया गया है.

पर्यटन को बढ़ावा

इस मेले का उद्देश्य उस इलाक़े में दोबारा पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देना है. इस मेले को स्थानीय प्रशासन और पाकिस्तानी सेना ने मिलकर आयोजित किया है.

स्वात में दाख़िल होते ही मेले का आभास होन लगता है.

सुरक्षा अधिकारियों के चेक पोस्ट बने हुए हैं जहां मेहमानों का पंजीकृण होता है. मेहमानों का स्वागत ख़ास क़िस्म के शरबत से किया जाता है. उन्हें मेले के बारे में सारी जानकारी दी जाती है.

पूरे रास्ते में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं लेकिन पहली जैसी चेकिंग नहीं होती है.

ख़ुशियों का माहौल

मिंगोरा पहुंचते ही ईद के त्योहार जैसा माहौल लगता है. हर तरफ़ चहल पहल, सड़कों और बाज़ारों में लोगों का हुजूम नज़र आता है.

स्थानीय लोगों ने बताया कि ख़ैबर पख़्तूख़ां के गवर्नर के दौरे के कारण तमाम रास्ते बंद कर दिए गए थे. इसलिए सड़कों पर गाड़ियों की तादाद कम हो गई थी.

लेकिन शाम होते ही सड़कों पर दोबारा गाड़ियां दिखने लगीं.

Image caption स्वात की कड़वी हिंसक यादों को भुलाने की एक कोशिश

मिंगोरा में लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र ग्रासी ग्राउंड है जहां दिन के 12 बजे से रात के 12 बजे तक कड़े पहरे में मेला लगा रहता है.

मनोरंजन के लिए कई तरह की चीजें दिखाई पड़ती हैं.

अतीत को भुलाने की कोशिश

ये वही ग्रासी ग्राउंड है जहां पहले प्रतिबंधित संगठन के प्रमुख मौलाना सूफ़ी मोहम्मद और तालिबान डेरे डालकर स्वात की जनता की क़िस्मत का फ़ैसला किया करते थे.

ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की इस जन्नत के रहने वाले लोग इसीलिए यहां जमा हैं कि शायद वो पिछली कड़वी यादों को भुलाना चाहते हैं जब लोगों को सरे आम जान से मार दिया जाता था और उनके शवों को लटका दिया जाता था.महिलाओं को कोड़े मारे जाते थे और उनके पढ़ने पर पाबंदी लगी थी.

इस मेले में पूरे पाकिस्तान से लोग आए हुए हैं लेकिन पंजाब से आने वाले पर्यटकों की तादाद सबसे ज़्यादा है.

मिंगोरा के अलावा अमन मेले का आयोजन कांजू टाउनशीप में भी किया गया है. यही मेला बाद में कालाम में लगेगा.

स्वात में पिछले दो तीन सालों से जारी हिंसा और तालिबान के क़ब्ज़े ने आम लोगों के जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित किया था लेकिन इलाक़े के पर्यटन उद्दोग पर सबसे ज़्यादा असर पड़ा था.

एक अनुमान के मुताबिक़ स्वात में लगभग 50 प्रतिशत लोग अपनी रोज़ी रोटी के लिए पर्यटन पर ही निर्भर हैं.

मई 2009 में फ़ौजी कार्रवाई के बाद से सेना ने अधिकतर इलाक़ो पर अपना वर्चस्व तो क़ायम कर लिया था लेकिन ये पहली दफ़ा है जब सरकारी तौर पर इलाक़े में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास किया गया हो.

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