भारत-पाक बातचीत में कोई बड़ा फ़ैसला नहीं

विदेश सचिवों की वार्ता
Image caption वार्ता निर्धारित समय से अधिक समय तक चली और इसकी वजह से प्रेस कॉन्फ़्रेंस का समय बदलना पड़ा

भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के बीच इस्लामाबाद में हुई कई घंटों की बातचीत के बाद कोई ठोस और बड़ा फ़ैसला नहीं हो सका है.

हालांकि दोनों नेताओं ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच आतंकवाद से लेकर कश्मीर तक सभी मुद्दों पर खुली और ईमानदार चर्चा हुई है लेकिन वे यह कहने की स्थिति में नहीं दिखे कि किसी मुद्दे पर कोई ठोस फ़ैसला हुआ है.

बातचीत के बाद हुए संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दोनों नेताओं ने कहा कि वे आगे भी बातचीत जारी रखेंगे और यही गुरुवार को हुई बातचीत का हासिल जान पड़ता है.

संवाददाताओं का कहना है कि दोनों ही नेता साफ़ तौर पर तनाव में नज़र आए और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोपों का सिलसिला प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भी जारी रहा.

मुंबई में नवंबर, 2008 में हुए चरमपंथी हमलों के बाद से यह भारत और पाकिस्तान के बीच अधिकारिक तौर पर पहली वार्ता थी क्योंकि उन हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ चल रही समग्र वार्ता और विश्वास बहाली के प्रयासों को स्थगित कर दिया था.

उम्मीद की जा रही थी कि इस वार्ता से कुछ नतीजे निकलेंगे लेकिन बातचीत का सिलसिला शुरु होने के अलावा इसमें कुछ और नहीं हो सका.

बीबीसी हिंदी के प्रमुख अमित बरूआ का कहना है कि वार्ता के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेस में दोनों देशों के विदेश मंत्री अपने-अपने देशों के लोगों को ध्यान में रखकर अपनी बात कर रहे थे.

उनका कहना है, "जब दो देशों की बातचीत में राष्ट्रीय स्वार्थ का सवाल आ जाता है तो कोई बातचीत आगे नहीं बढ़ती."

तनाव

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा कि पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने आश्वासन दिया है कि डेविड हेडली से पूछताछ के बाद जो तथ्य सामने आए हैं उसके आधार पर जाँच की जाएगी.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि भारतीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने जो तथ्य उपलब्ध करवाए हैं उसके आधार पर जाँच की जाएगी क्योंकि वे आगे बढ़ना चाहते हैं.

लेकिन जब लश्करे तैबा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद के लगातार जारी बयानों पर सवाल हुए तो दोनों नेताओं के बीत मतभेद खुलकर सामने आ गए.

इस सवाल के जवाब में क़ुरैशी ने नाराज़गी भरे स्वर में भारत के गृह सचिव जीके पिल्लई के उस बयान का ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि मुंबई में हुए हमलों में पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का हाथ था.

क़ुरैशी ने इस बयान से समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों पक्षों की ओर से नकारात्मक बयान नहीं दिए जाने चाहिए और ऐसा कुछ नहीं कहा जाना चाहिए जिससे माहौल ख़राब हो. पिल्लई के बयान पर उन्होंने कहा,"हम दोनों (मंत्रियों) की राय थी कि ऐसे बयान की आवश्यकता नहीं थी."

भारत प्रशासित कश्मीर की ताज़ा स्थिति और मानवाधिकार हनन के आरोपों पर पूछे गए सवाल के जवाब में कृष्णा ने कहा कि वहाँ एक निर्वाचित सरकार है और भारत में कहीं भी मानवाधिकार हनन की शिकायतों से निपटने की व्यवस्था है.

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में भारत के हस्तक्षेप पर भी सवाल पूछा गया और इसके जवाब में कृष्णा ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से इसके कोई सबूत नहीं दिए गए हैं. उन्होंने कहा, "बलूचिस्तान में भारत के हस्तक्षेप पर किसी विश्वसनीय सबूत की बात छोड़िए हमें कोई छोटा सबूत भी पाकिस्तान की ओर से नहीं दिया गया है. यदि कोई सबूत दिया गया तो भारत सरकार उस पर ग़ौर करेगी."

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान से अनुरोध किया है कि मुंबई हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ चल रहे मुक़दमे में तेज़ी लाई जाए.

इस पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस बारे में उन्होंने कृष्णा से बातचीत की है.

अगली तारीख़ तय नहीं

इससे पहले 24 जून को भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की इस्लामाबाद में बैठक हुई थी जिसमें दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच होने वाली मुलाक़ात का एजेंडा तय किया गया था.

Image caption भूटान में शीर्ष नेताओं की मुलाक़ात के बाद वार्ता की सहमति बनी थी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने मार्च के अंत में सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान भूटान में मुलाक़ात की थी और विश्वास बहाली पर सहमति जताई थी.

बाद में भूटान से लौटते ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संपर्क की बहाली की दिशा में आशा से बढ़ कर प्रगति हुई थी.

भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की इस बैठक को उसी की अगली कड़ी के रूप में देखा गया.

इस लिहाज से दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ना है. लेकिन इस बैठक के बाद अगली बैठक की कोई तारीख़ तय नहीं हो सकी है.

क़ुरैशी का कहना था, "हम सोचते थे कि नवंबर तक दोनों देश विभिन्न मुद्दों पर इतनी प्रगति कर चुके होंगे और हम इस वर्ष के अंत में एक बार फिर वार्ता के लिए मिलेंगे लेकिन लगता नहीं है कि भारत इसके लिए तैयार है."

कृष्णा ने कहा है कि उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री को अगली वार्ता के लिए भारत आने का निमंत्रण दिया है. हालांकि तारीख़ के विषय में उन्होंने भी कुछ नहीं कहा.

संबंधित समाचार