संबंधों में कोई तल्ख़ी नहीं: क़ुरैशी

क़ुरैशी
Image caption क़ुरैशी की कृष्णा के मुलाक़ात के बाद उनके बयानों से काफ़ी विवाद खड़े हुए हैं

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि वे भारत के साथ 'बातचीत के लिए हर समय तैयार हैं बशर्ते बातचीत अर्थपूर्ण हो और बिना आपत्ति सभी मुद्दों पर चर्चा हो.'

बीबीसी उर्दू के ज़ुल्फ़िकार अली के साथ विशेष बातचीत में क़ुरैशी ने कहा कि हाल की भारत-पाक वार्ता में उन्हें महसूस हुआ कि भारत बातचीत का दायरा सीमित कर केवल अपने मतलब के मुद्दों पर ही बात करना चाहता है.

लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में कोई तल्ख़ी नहीं है और दोनों देश चाहते हैं कि रिश्ते जल्द से जल्द सामान्य हों.

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के क़ुरैशी को भारत आने के निमंत्रण के बारे में उन्होंने कहा, "मैं हर समय एंगेज (संवाद) करने के लिए तैयार हूँ लेकिन बातचीत अर्थपूर्ण होनी चाहिए. उसमें कोई मेंटल रेज़रवेशन (संकोच) नहीं होनी चाहिए. सारे विषयों पर बात होनी चाहिए ताकि वह अर्थूपर्ण हो और कोई नतीजा निकल सके...ताकि ये गुफ़तन-नशस्तन-बर्ख़ास्तन न हो..."

'कोई तल्ख़ी नहीं'

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के पाकिस्तान दौरे के बाद दोनों देशों के संबंधों में नज़र आ रही तल्खी पर वे बोले, "हमारे संबंधों में कोई तल्ख़ी नहीं है. इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है, जो उचित नहीं है. हक़ीकत बयान करने से कोई तल्ख़ी पैदा नहीं हुई है और न होनी चाहिए..दोनों देश संबंधो को सामान्य करना चाहते हैं. अमन चाहते हैं. दोस्ती चाहते हैं."

बातचीत के मुद्दों के बारे में छिड़ी बहस पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री क़ुरैशी का कहना था, "संबंध बेहतर बनाने, लंबित मामलों को सुलझाने के प्रति पाकिस्तान संजीदा है. लेकिन इस सब के बावजूद दोनों देश के बीच कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनसे हम आंख नहीं चुरा सकते....पिछले चार साल से इस पर काम कर रहे हैं. हम चाहते हैं कि इन चार वर्षों की मेहनत बेकार न जाए. थिम्पू में तय किए गए सभी मुद्दे बातचीत में शामिल हों..."

उनका कहना था, "मुझे महसूस हुआ कि हिंदुस्तान कुछ चुनिंदा मुद्दों पर ही बातचीत में दिलचस्पी ले रहा था, मसलन आतंकवाद…हालांकि इसमें हमें कोई एतराज नहीं है. पाकिस्तान इसका शिकार है. हमारे यहाँ पूँजीनिवेश, विकास, सब पर असर हुआ है. हम गंभीरता से इन मुद्दों पर बात करना चाहते हैं."

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "कुछ विषय ऐसे भी हैं जो पाकिस्तान की दिलचस्पी वाले हैं जिनपर भारत को भी खुले दिल से बातचीत करनी चाहिए, हमारा नुक़ता-ए-नज़र सुनना चाहिए...मसलन कश्मीर, सियाचीन, सरक्रिक और पानी के मुद्दे पर दोस्ताना माहौल में बातचीत होनी चाहिए. ये मुद्दे पहले से तय हैं. ऐसा नहीं है कि हम कोई नया मुद्दा जोड़ कर कोई नई मुश्किल खड़ी कर रहे हैं."

उनका कहना था कि भारत-पाकिस्तान की वार्ता से किसी को निराशा नहीं होने चाहिए क्योंकि भारत-पाक रिश्ते जटिल रहे हैं. क़ुरैशी ने कहा कि पिछले 60 सालों में कई बार दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों को लेकर समस्याएं आईं हैं और उन्हें सुलझाया भी गया है और दोनों देशों को निराशा का शिकार नहीं होना चाहिए.

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