समझौते के बाद भी हिंसा

  • 8 अगस्त 2010
यूसुफ़ रज़ा गीलानी
Image caption पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने प्रमुख दलों के बीच संधि कराई

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी ने कहा है कि कराची में हुई हिंसा के बाद प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच संधि हो गई है.

लेकिन इस समझौते के बाद भी हिंसा का क्रम नहीं रुका और कम से कम चार लोग और मारे गए हैं.

पिछले सोमवार को मुत्तहिदा क़ौमी महाज़ या एमक्यूएम के एक नेता रज़ा हैदर की हत्या के बाद कराची में हिंसा भड़क उठी थी जिसमें 80 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

प्रधानमंत्री गीलानी ने बताया कि पार्टियों ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना बंद करने और शहर में शांति बनाए रखने के लिए काम करने पर सहमति व्यक्त की.

श्री गीलानी ने ये भी कहा कि रज़ा हैदर की हत्या की जांच एक उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग को करनी चाहिए.

एमक्यूएम के नेता की हत्या

पिछले सोमवार को जब रज़ा हैदर एक मस्जिद में थे तो चार बंदूकधारियों ने उनपर गोलियां चलाईं.

इस गोलीबारी में उनका सुरक्षा गार्ड भी मारा गया.

एमक्यूएम ने इस हमले के लिए अवामी नेशनल पार्टी के सदस्यों पर आरोप लगाया था जिसके बाद शहर में हिंसा भड़क उठी थी.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कराची में इस साल 300 से अधिक राजनीतिक हत्याएँ हो चुकी हैं.

Image caption एमक्यूएम के नेता की हत्या के बाद कराची में भड़की हिंसा

एमक्यूएम विभाजन के बाद भारत से आए लोगों का प्रतिनिधित्व करती है.

ग़ौरतलब है कि एमक्यूएम का नेतृत्व ब्रितानी नागरिक अल्ताफ़ हुसैन करते हैं जो लंदन में रहते हैं.

एमक्यूएम ने पख़्तून पार्टी अवामी नेशनल पार्टी या एएनपी पर हिंसा भड़काने और पख़्तूनख़्वाह प्रान्त से भागकर कराची आए आतंकवादियों को शरण देने का आरोप लगाया है.

समझौते की कोशिश

प्रधानमंत्री गीलानी क़ानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए शुक्रवार को कराची पहुंचे थे जिससे प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कोई समझौता हो सके.

हस्ताक्षर के समय सत्ताधारी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और गठबंधन सरकार के सहयोगी दल अवामी नेशनल पार्टी और मुत्तहिदा क़ौमी महाज़ के नेता शामिल थे.

जिस दस सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं उसमें हथियारों की नुमाइश न करने और मादक पदार्थों के तस्करों, अपराधी गिरोहों और ज़मीन माफ़िया के ख़िलाफ़ क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों की मदद करना शामिल है.

तीनों राजनीतिक दल सिंध प्रांत में शरण ले रहे तालिबान आतंकवादियों की पहचान कराने के लिए भी सहमत हुए.

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