ख़ौफ़ के साए में स्वात घाटी

स्वात में दुकानें
Image caption स्वात में हर दीवार और हर दुकान के द्वार पर पाकिस्तान का राष्ट्र ध्वज पेंट किया हुआ है

आतंकवाद और चरमपंथ से प्रभावित पाकिस्तान के उत्तरी इलाक़े स्वात घाटी में जन-जीवन यूँ तो सामान्य है लेकिन इलाक़े में अनिश्चितता का माहौल है और स्थानीय लोगों में चरमपंथ का डर भी है.

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के तीन ज़िलों स्वात, शांगला और बुनैर में पाकिस्तानी सेना ने इसी साल के शुरुआत में तालिबान विद्रोहियों के ख़िलाफ व्यापक स्तर पर अभियान चला इलाक़ों पर अपना नियंत्रण कर लिया था.

स्वात, शांगला और बुनैर में करीब एक साल पहले तालिबान विद्रोहियों का सिक्का चलता था और उनकी मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था.

इस समय इन ज़िलों पर पाकिस्तानी सेना का नियंत्रण है और मेंगोरा, सेयदू शरीफ़ और चार बाग़ सहित कई शहरों में भारी संख्या में सैनिक और पुलिसकर्मी तैनात हैं.

स्वात घाटी के प्रवेश द्वार पर सैनिक हर आने वाले व्यक्ति की तलाशी लेते हैं और पहचान पत्र देख कर जाने की अनुमति मिलती है.

शहर की हर चेक पोस्ट पर उन तालिबान विद्रोहियों की तस्वीरों के साथ सूची लगी हुई है जो फ़रार हो चुके हैं और जिनकी सेना को तलाश है.

लोगों में नाराज़गी

हर चेक पोस्ट पर सैनिक के पास एक उपकरण होता है जिससे वह पता लगाते हैं कि शहर में दाख़िल होने वाली गाड़ी में कोई विस्फोटक पदार्थ तो नहीं है.

शहर की गलियों में सैनिकों का गश्त हर समय जारी रहता है और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ लिया जाता है.

स्वात घाटी में घूमते हुए आपको लगेगा कि यह इलाक़ा पाकिस्तान का हिस्सा नहीं था और सेना ने इस पर विजय प्राप्त कर पाकिस्तान से जोड़ दिया है.

शहर की हर दीवार और हर दुकान के द्वार पर पाकिस्तान का राष्ट्र ध्वज पेंट किया हुआ है और साथ में बड़े शब्दों में लिखा हुआ है ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद और पाकिस्तानी सेना को सलाम.’

जितने ध्वज मैंने स्वात घाटी में देखे इतने ध्वज पाकिस्तान के स्वतंत्र दिवस पर कराची में भी नहीं होते.

सेना के वाहन ऊँची आवाज़ में पाकिस्तानी राष्ट्र गीत चला कर शहर की गलियों में घूम रहे थे.

स्थानीय लोग इलाक़े में सेना की भारी संख्या में मौजूदगी की कड़ी आलोचना करते हैं. स्वात घाटी के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार शाहनवाज़ ख़ान ने बताया, “जब तक यहाँ सेना मौजूद है तब तक अनिश्चिता का माहौल रहेगा.”

उन्होंने आगे कहा, “अगर यहाँ के सभी अधिकार सिविल प्रशासन को दिए जाते हैं तो संभावना है कि स्थिति बहतर हो जाए दूसरी सूरत में ख़तरा बना रहेगा.”

शाह नवाज़ ने बताया कि लोगों में सेना का डर है और जब स्थानीय लोग सेना के वाहन को देखते हैं तो वह भाग जाते हैं.

उन्होंने कहा कि इस शहर का हर व्यक्ति किसी न किसी सूरत में सेना की हिंसा का निशाना बना है और सेना ने कई लोगों को पकड़ कर मार दिया है.

स्वात घाटी के एक ओर पत्रकार ग़ुलाम फारूक़ भी शाह नवाज़ से सहमत हैं. उन्होंने बताया कि लोगों में सेना का इतना डर है कि कई ज़रूरी वस्तुएँ मँहगे दामों मिल रही हैं लेकिन फिर भी वह आवाज़ नहीं उठाते.

आम लोग न तो तालिबान विद्रोहियों के बारे में बात करना चाहते हैं और न ही सेना के बारे में. दोनों ने अपनी सत्ता बरक़रार रखने के लिए लोगों में ऐसा डर पैदा कर दिया है जिसकी मिसाल पाकिस्तान में नहीं मिलती.

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