पाकिस्तान सुस्त अंतरराष्ट्रीय मदद से परेशान

  • 14 अगस्त 2010
मॉनसून का मानचित्र (नासा की तस्वीर)
Image caption नीले रंग में दिख रहे क्षेत्र में विशेषतौर पर भारी बारिश हुई और कई जगह भीषण बाढ़ आई

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि ज़मीर अकरम ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने पाकिस्तान में हुई तबाही को माना तो है लेकिन उसके लिए अब तक पर्याप्त मदद नहीं की है.

उन्होंने बीबीसी के साथ बातचीत में इस बात को ख़ारिज किया कि 'पाकिस्तान के आतंकवाद' के साथ संबंधों के आरोप अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद आने में देरी का एक कारण हो सकते हैं.

इस बाढ़ से 1.4 करोड़ लोग प्रभावित हैं और लगभग 1600 मारे गए हैं.

उधर भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के साथ फ़ोन पर बातचीत में इस त्रासदी पर संवेदना व्यक्त की है और भारत की ओर से पीड़ितों के लिए 50 लाख डॉलर की राहत सामग्री की पेशकश की है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान की सरकार की ओर से फ़िलहाल इसे स्वीकार करने के बारे में कोई बयान नहीं आया है.

इस त्रासदी को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह को भी रद्द कर दिया है.

'तबाही का दूसरा चरण'

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता माइक वूलरिज के अनुसार अंतरराष्ट्रीय संस्था रेड क्रॉस ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान में बाढ़ के कारण तबाही का दूसरा और ज़्यादा ख़तरनाक चरण शुरु हो सकता है. बाढ़ के पानी से फैलने वाली बीमारियां अब लाखों प्रभावित लोगों को अपनी चपेट में ले सकती हैं.

वर्ल्ड बैंक के एक अनुमान के मुताबिक बाढ़ से मची तबाही से करीब 100 करोड़ डॉलर की फ़सल बर्बाद हो चुकी है.

पाकिस्तान के मौसम विभाग ने चेताया है कि 1600 से ज़्यादा लोगों की मौत का कारण बन चुकी बाढ़ से पीने के पानी की दिक्कतों के साथ-साथ कई बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ रहा है.

रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष पास्कल कटाट का कहना है, "पीने का पानी कम नहीं है, बल्कि पीने का पानी है ही नहीं. और अगर इस स्थिति को जल्द नहीं बदला गया तो और जानें चली जाएंगी. जब हम बात कर रहे हैं, उस समय भी बच्चे मरते जा रहे हैं."

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक ये त्रासदी इतनी भयावह है कि जल्द से जल्द सहायता राशि जुटाने से ही जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून के शनिवार या रविवार को पाकिस्तान का दौरा करने की संभावना है.

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत ज़मीर अक्रम का कहना है कि दुनिया शायद अब भी इस बाढ़ के स्तर को नहीं समझ पाई है, इसीलिए सहायता राशि धीरे-धीरे ही मिल रही है.

संयुक्त राष्ट्र ने इसी हफ़्ते सभी देशों से पाकिस्तान के लिए करीब 46 करोड़ डॉलर की सहायता राशि एकत्र करने का आहवान किया था.

ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के सूचना मंत्री मियां इफ़्तिख़ार हुसैन के अनुसार, "जब से बाढ़ आई है, हम खर्चा कर रहे हैं और अब ये हमारे बजट से बाहर होता जा रहा है. अगर हम अपना पूरा बजट बाढ़ में लगा देंगे तो क़ानून व्यवस्था कायम रखने, सुरक्षा एजंसियों के वेतन, हथियार और प्रशिक्षण के लिए बहुत कम पैसा बचेगा. इससे तो आतंकवाद के खिलाफ़ हमारी लड़ाई पर बहुत असर पड़ेगा."

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार