सक्खर में हर जगह बाढ़ पीड़ित ही बाढ़ पीड़ित

  • 19 अगस्त 2010
सक्खर , सिंध
Image caption सरकारी राहत केंद्रो में लोगों के रहने की भी जगह नहीं है

गाड़ी रुकते ही कई बाढ़ पीड़ित दौड़ कर इस आस में आते हैं कि शायद कोई राहत सामग्री देने या नामों के पंजीकरण के लिए आया है.

पाकिस्तान के बाढ़ ग्रस्त सिंध प्रांत के उत्तरी ज़िले सक्खर में मुझे कई बार ऐसी स्थिति का समना करना पड़ा जब भूखी महिलाओं और पुरुषों ने घेर लिया.

वे समझ बैठे कि मैं कोई सरकारी कर्मचारी हूँ या किसी एनजीओ का सदस्य हूँ.

सबसे बड़ा शरण स्थल

आजकर सक्खर शहर बाढ़ पीड़ितों के लिए सबसे बड़ा शरण स्थल बना हुआ है. शहर की सभी सड़कों, पुलों और पेड़ों के नीचे बाढ़ पीड़ित ही नज़र आते हैं.

ऐसा लगता है कि यह शहर किसी बड़े शरणार्थी शिविर में बदल गया है.

प्रांतीय सरकार के अनुसार भयंकर बाढ़ से क़रीब 40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं जिनमें से तीन लाख सरकारी राहत केंद्रों में मौजूद हैं और इसका यह अर्थ हुआ कि लोगों की बड़ी संख्या राहत केंद्रों से बाहर है.

सुविधाओं का अभाव

प्रांतीय सूचना एवं प्रसारण विभाग के सलाहकार जमील सूमरो का कहना है कि लोग सरकारी राहत केंद्रों में नहीं आ रहें हैं क्योंकि उनके पास अपना माल मवेशी है.

शहर में स्थित सरकारी राहत केंद्रों में प्रशासन का कोई अधिकारी नहीं दिखता जो पीड़ितों की समस्याएँ सुने और उसके समाधान का कोई रास्ता निकाले.

एक तंबू में छह से सात लोग रहते हैं जो ज़मीन पर एक कपड़ा डाल कर सोते हैं. बाढ़ पीढ़ितों के लिए शौचालय की कोई सुविधा नहीं है जिससे लोगों को बहुत दिक्कतें हो रही हैं.

सिंध में सिंधु नदी से सटा हुआ इलाक़ा क़रीब 900 वर्ग मील में फैला हुआ है जिसमें 80 प्रतिशत ज़मीन पर फ़सलें लगाई जाती हैं.

बाढ़ पीड़ितों में अधिकतर ऐसे हैं जो किसान हैं और जिनकी फ़सलें नष्ट हो गई हैं.

निज़ाम तुनयो भी ऐसे ही किसान हैं जिनकी क़रीब 10 एकड़ों पर लगी फ़सल बाढ़ की नज़र हो गई है.

उन्होंने बताया कि फ़सलों से चार लाख रुपए आने की उम्मीद थी जिससे जीवन और बेहतर होता. उनके अनुसार अब तो ज़मीन पर तीन चार महीने पानी रहेगा और कोई छह महीने बाद गेहूँ की फ़सल लगेगी और उस वक़्त तक वे क्या खाएँगे.

लोगों का पलायन

सक्खर में पीड़ितों की संख्या बढ़ने और सुविधाएँ न होने से बहुत सारे लोग दूसरे शहरों का रुख़ कर रहें हैं.

सिंध सरकार ने कराची में कई पीड़ितों के लिए राहत केंद्र बनाए हैं.

पाकिस्तान की सबसे बड़ी कल्याणकारी संस्था ईधी फाऊंडेशन के पदाधिकारी फ़ैसल ईधी का कहना है कि स्थिति प्रतिदिन ख़राब होती जा रही है और उन्हें डर है कि हज़ारों लोग भूख और बीमारी से न मर जाएँ.

उन्होंने कहा कि पीड़ितों के लिए जितनी सहायता की ज़रूरत है वह नहीं मिल रही है और केवल 15 प्रतिशत पीड़ितों तक ही मदद पहुँच पा रही है.

सिंधु नदी में जलस्तर अभी भी बढ़ा हुआ है और बाढ़ का पानी प्रांत में तबाही मचाता हुआ आगे की ओर बढ़ रहा है.

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