बाढ़ की स्थिति में कोई सुधार नहीं

  • 23 अगस्त 2010
रेशमा, बाढ़ पीड़ित
Image caption पाकिस्तान में बाढ़ पीड़ित खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुज़ारने को मजबूर

पाकिस्तान में बाढ़ की स्थिति प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है और लाखों बाढ़ पीड़ित कई समस्याओँ में जूझ रहे हैं.

सरकारी और राहत एजेंसियों के दावों के बावजूद लाखों लोग खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने के लिए मजबूर हैं और खाने पीने का सामान भी बहुत मुश्किल से मिल रहा है.

दक्षिण पंजाब में चनाब नदी के पास रहने वाली रेशमा भी उन लाखों में शामिल हैं जिनके घर भ्यंकर बाढ़ की नज़र हो गए और वे अपने दो बच्चों के साथ जान बचा कर तटबंध पर पहुँची.

खुले आसमान के नीचे ज़िंदगी

उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि चनाब नदी में जलस्तर इतना बढ़ेगा और उनका घर नष्ट हो जाएगा.

वे अपनी पति और दो बच्चों के साथ मुल्तान से सटे बंद बोसन इलाक़े में चनाब नदी के पास रहती थी.

उनके पास चार भैंसें और दो बकरियाँ थी और उनके पति इलाके में मज़दूरी कर अपना और अपने परिवार का पेट पालते थे.

रेशमा ने बीबीसी को बताया कि भ्यंकर बाढ़ उनके घर का समान और माल मवेशी अपने साथ ले गई और वे अब खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं.

दूध के लिए तरसते बच्चे

जो परिवार कुछ हफ्ते पहले पड़ोसियों को दूध देता था, आज उनके बच्चे आधा गिलास दूध के लिए भी तरस रहे हैं.

रेशमा के अनुसार स्थानीय लोग कभी कभी खाना पीना देते हैं. उन्होंने कहा, “खाना पीना पड़ोस वाले कुछ दे रहे हैं लेकिन बच्चों के लिए दूध नहीं मिल रहा है.”

उन्होंने आगे कहा, “मेरा पति कहीं से आधा गिलास दूध ले कर आया था, मैंने उसमें डेढ़ गिलास पानी और नमक मिला कर बच्चों को दिया है.”

रेशमा के दो बेटे हैं और वे दोनों बाढ़ के पानी से हुई बीमारियों के शिकार हो गए हैं. उनके तीन साल के बेटे की त्वचा पर दाने निकलें हैं और इलाज न होने की वजह से स्थिति काफी गंभीर हो रही है.

उन्होंने बताया, “मेरा बेटा रात को रोज़ रोता है और उसे दर्द होता है. मच्छरों की वजह से दोनों बेटे सही तौर पर सो भी नहीं पाते हैं.”

उनके अनुसार इस बाढ़ में इन लोगों का भविष्य बह गया है और अब वे अपने आने वाले दिनों के लिए काफ़ी परेशान हैं.

रेशमा जैसे लाखों परिवार हैं जिनका भविष्य इस बाढ़ की नज़र हो गया.

अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए सबकी नज़रें सरकार पर टिकी हुई हैं और सब इस इतंज़ार में हैं कि कब सरकार उनका घर बना कर देगी.

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