बच्चे और पिता पानी में बह गए

गुलन बंगलानी का परिवार
Image caption गुलन बंगलानी का परिवार अब सक्खर में है

उनकी आँखों के सामने उनके तीन बच्चे और बूढ़े पिता पानी के रेले में बह गए मगर वे कुछ नहीं कर सके.

गुलन बंगलानी और उनके परिवार के 13 लोगों को आठ दिन तक पानी में फंसे रहने के बाद पाकिस्तानी फ़ौज के हेलिकॉप्टर ने बचाया.

गुलन बंगलानी ठल तहसील के जोंगल गांव के निवासी हैं जो सिंधु नदी के पास स्थित है. ठोरी बांध पर दरार पड़ने के कारण इस गांव में पानी भर गया था.

इस समय गुलन बंगलानी का परिवार सक्खर के पास दादू कनाल के किनारे अपने बाक़ी बच्चों के साथ मौजूद है.

गुलन ने बताया कि अधिकारियों की ओर से उन्हें किसी ख़तरे की जानकारी नहीं दी गई थी. वे नींद में सो रहे थे कि अचानक गांव में पानी घुस आया और वे बच्चों के लेकर बाहर निकल पड़े.

गुलन बंगलानी किसान हैं और उनकी दो पत्नियां और 12 बच्चे थे जिनमें से तीन पानी में बह गए. इसके अलावा उनके पिता भी बाढ़ में बह गए.

उनकी पत्नी सुतन ने बताया, "अपने बेटों मुहिब अली और तुराब अली को मैंने अपने कंधे पर उठा रखा था कि अचानक पानी का एक तेज़ रेला आया और मैं पानी में ग़ोते खाने लगी, बच्चे मेरे हाथ से निकल कर पानी में बह गए."

ऐसे ही गुलन की दूसरी पत्नी की बेटी बाढ़ के पानी का शिकार हो गई.

सरकार ने जानकारी नहीं दी

गुलन का कहना है कि अगर सरकार उन्हें समय पर जानकारी देती तो इतना नुक़सान न होता, "कौन अपने बच्चों को मरवाना चाहता है. हम यहां से निकल जाते."

गुलन की मां नबीयत बंगलानी ने पारंपरिक बलूची कपड़े पहने हुए थे जो कंधों से फट चुके हैं.

उनके अनुसार वे लोग आठ दिनों तक कभी किसी दीवार पर चढ़ जाते तो कभी पानी का बहाव उन्हें दूसरी तरफ़ ले जाता था. पानी उनके कंधों तक पहुंच चुका था.

इसी बीच उनका पति बादल बंगलानी भी पानी में बह गया.

Image caption पाकिस्तान में आई बाढ़ में दो करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं

उन्होंने बताया कि दो रोज़ के बाद हेलिकॉप्टर देखने में आया, जिससे कुछ पैकेट गिराए गए जिनमें से अधिकतर पानी में बह जाते थे, उन पैकेटों में भुने हुए चने, खजूर, और दूध के पैकेट वग़ैरह होते थे.

सत्रह लोगों के इस परिवार के लगभग सभी लोग ज़ख़्मी हैं. उनके अनुसार पानी में बहती लकड़ियों और कांटों से उन्हें घाव लगे हैं.

नबीयत बंगलानी का कहना है कि पूरे आठ दिन उन्होंने अपने सरों पर क़ुरान उठा रखा था.

ख़ुदा के हवाले

जब भी हेलिकॉप्टर नज़र आता वे उन्हें क़ुरान का वास्ता देते और आख़िर आठ दिन बाद उन्हें रहम आया और पानी से पूरे परिवार को बाहर निकाला.

सत्तर वर्षीय मुसम्मात नबीयत को जब पानी से निकाला गया उस समय तक वह बेहोश हो चुकी थीं. उनके अनुसार ख़ुराक की कमी के कारण कमज़ोरी आई थी और अभी तक उन्हें चक्कर आते हैं.

उनके परिवार के नौ बच्चों को अभी तक ग्लूकोज़ की ड्रिप लगाई जा रही है.

इस परिवार को सक्खर में लाकर छोड़ दिया गया है जहां वे खुले आसमान के नीचे अन्य बाढ़ पीड़ितों के साथ बैठे हुए हैं.

गुलन बंगलानी बताते हैं कि उनकी क़रीब 40 भैंसें और गायें थीं जो सारी पानी में बह गईं. अब वे कंगले हो चुके हैं. जब वे पानी में थे तो उन्होंने ख़ुद को ख़ुदा के हवाले कर दिया था अब भी वे ख़ुद को उसी के रहमो-करम पर समझते हैं.

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