पाक की मुद्राकोष से राहत पर चर्चा

  • 24 अगस्त 2010
बाढ़ पीड़ित
Image caption विस्थापन का सिलसिला अभी भी जारी है

सदी की सबसे विनाशकारी बाढ़ से पीड़ित पाकिस्तान के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से क़रीब 11 अरब डॉलर यानी लगभग 500 अरब रुपए के अल्पावधि कर्ज़ की शेष राशि पर चर्चा शुरु की है.

वर्ष 2008 से ही स्वीकृत इस कर्ज़ की 7.5 अरब डॉलर की राशि पहले ही पाकिस्तान को दी जा चुकी है और अब 3.5 अरब डॉलर और दिए जाने हैं.

मुद्राकोष के एशियाई मामलों के निदेशक मसूद अहमद ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा है कि संस्था ऐसे किसी रास्ते की तलाश कर रही है जिससे कि 'ऐसे कठिन वक़्त में पाकिस्तान की मदद' की जा सके.

उन्होंने कहा कि वे पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ चर्चा में यह रास्ता तलाश करने की कोशिश करेंगे जिससे कि पाकिस्तान को रियायत दी जा सके और वह प्राकृतिक आपदा के लिए मिलने वाली सहायता हासिल कर सके.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी बाढ़ पीड़ितों की स्थिति को गंभीर बताया है.

अधिकारियों ने कहा है कि बाढ़ पीड़ितों की आपात सहायता के लिए ज़रुरी 46 करोड़ डॉलर की राशि में से 70 प्रतिशत राशि एकत्रित कर ली गई है.

उनका कहना है कि पहले तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आने वाली सहायता धीमी थी लेकिन दूसरे हफ़्ते इसमें तेज़ी आई है.

इस बीच पाकिस्तान के अधिकारियों और सहायता एजेंसियों ने कहा है कि सिंध प्रांत में बाढ़ पीड़ितों में से 80 प्रतिशत लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं.

केंद्रीय बाढ़ आयोग ने कहा है कि सिंध के हैदराबाद में सिंधु नदी का जल स्तर पिछले 50 सालों में सबसे अधिक दिख रहा है और मंगलवार को इसके और अधिक होने की आशंका है.

इस बाढ़ से अब तक दो करोड़ लोग प्रभावित हो चुके हैं और कम से कम 1600 लोगों की मौत हुई है.

आर्थिक चुनौतियाँ

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के निदेशक मसूद अहमद ने बीबीसी से कहा है कि पाकिस्तान को अब अपने बजट और आर्थिक संभावनाओं पर फिर से विचार करना होगा.

उन्होंने कहा, "हमारे सामने दो लक्ष्य हैं एक तो इस कठिन दौर में अर्थव्यवस्था को संभाला जा सके और दूसरा एक ऐसा आधार तैयार किया जा सके जिससे कि विकास लगातार होता रहे."

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने वर्ष 2008 में मदद देनी शुरु की थी. इस कर्ज़ की राशि 10.6 करोड़ डॉलर है.

मसूद अहमद कहते हैं, "इस भीषण बाढ़ से पहले भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने एक गंभीर चुनौती थी और वह चुनौतियाँ अभी बनी हुई हैं."

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान को अपने खर्चों की पूर्ति के लिए आय बढ़ानी होगी. सरकार को टैक्स के ज़रिए मिलने वाला राजस्व बहुत कम है और हमें ऐसे कठिन समय में उनकी सहायता के रास्ते तलाश करने होंगे."

बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता एंड्र्यू वॉकर का कहना है कि पाकिस्तान को पहले मुद्राकोष ने सहायता इसीलिए दी थी कि वह अपने बजट घाटे को कम कर सके.

अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ की वजह से विकास की संभावित दर को घटा दिया गया है क्योंकि इस बाढ़ की वजह से कृषि बुरी तरह से प्रभावित हुई है. उनका कहना है कि 17 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल को इस बाढ़ ने प्रभावित किया है.

इससे पहले राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा था कि पाकिस्तान को इस त्रासदी से हुए नुक़सान से उबरने में कम से कम तीन साल का वक़्त लगेगा और इसमें 15 अरब डॉलर का खर्च आ सकता है.

ख़तरा बरक़रार

Image caption दक्षिणी पाकिस्तान के शहरों से भी दसियों लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा है

अब बाढ़ की वजह से पाकिस्तान के दक्षिणी हिस्से में लाखों लोगों के सामने बाढ़ का ख़तरा मंडरा रहा है.

सिंध प्रांत के सक्खर में अब तक कोई चालीस लाख लोग विस्थापित हुए हैं.

दक्षिणी शहर शहदादकोट में अधिकांश लोग घर-बार छोड़कर जा चुके हैं और वहाँ बाढ़ का पानी कुछ कम हुआ है लेकिन ख़तरा अभी भी बना हुआ है.

इस बीच सिंधु नदी में जल-स्तर 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुका है और अधिकारी आशंका जता रहे हैं कि मंगलवार को यह और बढ़ सकता है.

इसकी वजह से अब हैदराबाद शहर में ख़तरा बढ़ गया है.

इस बीच ठट्ठा ज़िले से भी लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर ले जाने का कार्य शुरु किया गया है.

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