यूएन कर रहा है ख़तरे की समीक्षा

  • 27 अगस्त 2010
बाढ़ पीड़ित
Image caption लाखों बाढ़ पीड़ित विदेशों से आ रही सहायता पर ही निर्भर हैं

पाकिस्तानी तालिबान की ओर से हमले की चेतावनी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र बाढ़ राहत कार्यों में लगे अपने कर्मियों की सुरक्षा की समीक्षा कर रहा है.

यह समीक्षा एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी की चेतावनी के बाद हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तालिबान विदेशी राहतकर्मियों को निशाना बना सकते हैं.

दूसरी ओर तालिबान के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एपी से हुई बातचीत में कहा है कि विदेशी राहतकर्मी 'स्वीकार्य नहीं हैं'.

लेकिन पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने इसे अफ़वाह बताते हुए कहा है कि उनके पास इस तरह की कोई सूचना नहीं है और यदि कोई ऐसी सूचना देता है तो कार्रवाई की जाएगी.

सदी की सबसे विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहे पाकिस्तान में अब तक विदेशी राहतकर्मियों पर अब तक कोई हमला नहीं हुआ है.

इस बाढ़ के बारे में संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 1.7 करोड़ लोग बाढ़ पीड़ित हैं लेकिन प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी कह चुके हैं कि बाढ़ से दो करोड़ लोग प्रभावित हैं.

इसकी वजह से 12 लाख से ज़्यादा मकान नष्ट हो गए हैं और 50 लाख से अधिक लोग बेघरबार हो गए हैं.

वहाँ बड़ी संख्या में विदेशी कार्यकर्ता राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं.

चेतावनी

बुधवार को एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी ने अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बीबीसी को बताया था कि पाकिस्तानी तालिबान का संगठन तहरीक़-ए-तालिबान विदेशी राहतकर्मियों पर हमले की योजना बना रहा है.

इस अधिकारी ने यह भी कहा था कि तालिबान केंद्रीय और प्रांतीय मंत्रियों को भी निशाना बना सकते हैं.

उन्होंने इससे अधिक विवरण देने से इनकार कर दिया था.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के प्रवक्ता का कहना है कि ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा और बलूचिस्तान में सुरक्षा चिंता की वजह से राहत कार्य प्रभावित होने लगा है.

संयुक्त राष्ट्र की आपात राहत कार्यों के संयोजक जॉन होम्स ने कहा है कि सुरक्षा विशेषज्ञ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ काम कर रहे हैं जिससे कि यह पता चल सके कि ख़तरा कितना है और इससे बचने के लिए कौन से उपाय किए जाने चाहिए.

उन्होंने न्यूयॉर्क में एक पत्रवार्ता में कहा, "हमने इस चेतावनी को गंभीरता से लिया है, हम पहले भी इसे गंभीरता से लेते रहे हैं. हम पर्याप्त एहतियाती क़दम उठाएँगे लेकिन हम पाकिस्तान की उस जनता की सहायता का कार्य नहीं रोक रहे हैं, जो बाढ़ से पीड़ित है."

उन्होंने याद किया कि पिछले साल अक्तूबर में इस्लामाबाद में विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यालय के सामने तहरीक़-ए-तालिबान ने आत्मघाती हमला किया था जिसमें पाँच लोग मारे गए थे.

उधर तहरीक़-ए-तालेबान के प्रवक्ता अज़ाम तारिक़ ने कहा है, "अमरीका और दूसरे देशों के राहतकर्मियों का ध्यान सिर्फ़ बाढ़ पीड़ितों की सहायता पर नहीं है बल्कि उनकी कुछ और मंशाएँ हैं."

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार उन्होंने कहा, "बाढ़ पीड़ित लोगों तक राहत नहीं पहुँच रहा है और जब पीड़ितों को कोई सहायता नहीं मिल रही है तो विदेशियों का यह जमावड़ा हमें मंज़ूर नहीं है."

उन्होंने कहा, "जब हम कहते हैं कि यह हमें मंज़ूर नहीं तो इसका अर्थ जिसे जो लगाना है लगा ले."

पाकिस्तान के एक सेवानिवृत्त जनरल तलत महमूद ने कहा है कि राहत और बचाव कार्य के ज़रिए पश्चिमी देशों को समर्थन मिलता है तो चरमपंथी संगठन ज़रुर इसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे.

पाकिस्तान के बाढ़ पीड़ितों को कई देशों की ओर से सहायता मिल रही है और अमरीका उनमें से एक है.

यूएस एजेंसी फ़ॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएड) का कहना है कि उसने अब तक 15 करोड़ डॉलर की सहायता पाकिस्तान भेजी है.

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