सत्तर हज़ार बच्चों की जान को ख़तरा

लाखों बाढ़ पीड़ित पलायन करते हुए

पाकिस्तान में मौजूद संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लगभग 70 हज़ार बच्चे गंदे पानी से होने वाली बीमारियों से मर सकते हैं. पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा एक महीने से चल रही भीषण बाढ़ की चपेट में है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार पूरे देश में बाढ़ से 1.7 करोड़ लोग प्रभावित हैं और 80 लाख लोगों को खाद्य पदार्थों और शरण की सख़्त ज़रूरत है. इस बाढ़ के कारण 12 लाख घर तबाह हो गए हैं और 50 लाख लोग बेघर हो गए हैं. पाकिस्तान की सरकार के अनुसार अब तक मारे गए लोगों की संख्या 1600 है.

इस अंतरराष्ट्रीय संगठन के अनुसार पाकिस्तान में कुल उपजाऊ भूमि का 14 प्रतिशत यानी लगभग 32 लाख हैक्टेयर भूमि क्षतिग्रस्त है.

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जल्द से जल्द और कारगर क़दम उठाने की ज़रूरत है ताकि लाखों बच्चों को बचाया जा सके क्योंकि वे संक्रमित पानी से घिरे हुए हैं और अधिकतर के पास पीने के लिए कुछ भी नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय राहत संयोजक मार्टिन मोगवानजा ने कहा, "यदि कुछ नहीं किया जाता तो बाढ़ ग्रस्त इलाक़े में कुपोषण का शिकार हुए लगभग 72 हज़ार बच्चों के मर जाने का ख़तरा है."

सिंध के 23 में से 19 ज़िले प्रभावित

दक्षिणी पाकिस्तान में सिंधु नदी के तटबंध अनेक जगहों पर टूट गए हैं और कराची से 70 किलोमीटर पूर्व में स्थित थट्टा शहर को बचाने की कोशिशें की जा रही हैं. संयुक्त राष्ट्र के एक दफ़्तर का कहना है कि सिंधु नदीं में सामान्य के मुकाबले में 40 गुना अधिक पानी बह रहा है.

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सरकार ने पहले ही लाखों लोगों को उस इलाक़े को खाली करने का आदेश दिया था और वहाँ से लगाता पलायन जारी है.

केवल सिंध प्रांत में ही 70 लाख लोग विस्थापित हुए हैं जिनमें से 10 लाख लोग तो पिछले कुछ दिनों में घर छोड़कर भागे हैं.

सिंध प्रांत के 23 ज़िलों में से 19 ज़िले प्रभावित हैं.

सिंध के सिंचाई मंत्री जाम सैफ़ुद्दीन धारेजो ने कहा है कि शनिवार थट्टा शहर के लिए महत्वपूर्ण है. उनका कहना है, "हम अपने पूरे संसाधन झोंक कर पानी को थट्टा शहर की ओर जाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं. थट्टा के बाहरी बेलो इलाक़े में 10 हज़ार लोगों रहते हैं और वह डूब चुका है."

प्रांत के मुख्यमंत्री सईद क़ईम अली शाह के अनुसार दो या तीन दिन में टूटे तटबंधों की मरम्मत हो जाने की संभावना है लेकिन ख़तरा बना हुआ है.

अधिकारियों के अनुसार थट्टा शहर के तीन लाख लोगों में से 1.75 लाख नागरिक शहर छोड़कर बाहर जा चुके हैं.

थल सेना और नौसेना हज़ारों अन्य लोगों को शहर से बाहर निकालने के काम में जुटे हुए हैं.

उधर बाढ़ से पीड़ित लोगों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है.

शनिवार को कई बाढ़ पीड़ितों ने प्रदर्शन किए, सिंध के प्रभावित इलाक़े में कुछ सड़कों को रोका और अपर्याप्त खाद्य और राहत सामग्री की शिकायत की है.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार एक पीड़ित महिला अमता बीबी ने कहा, "कोई हमारी मदद नहीं कर रहा है. हम ग़रीब हैं, बेसहारा हैं. यदि कोई हमारी मदद करे तो मैं उसके लिए दुआ माँगूंगी."

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