नेता की हत्या के बाद कराची में तनाव

कराची (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption हाल ही में एमक्यूएम के नेता रज़ा हैदर की हत्या के बाद कराची में हिंसा भड़क उठी थी

मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के वरिष्ठ नेता इमरान फ़ारूक़ की लंदन में हत्या के बाद कराची में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

लंदन में निवार्सन में रह रहे फ़ारूक़ की हत्या की ख़बर मिलते ही एमक्यूएम के कार्यकर्ता सड़कों पर निकल आए और विरोध प्रदर्शन किया.

कराची के कुछ इलाक़ों में गोलीबारी की घटनाएं भी हुई हैं लेकिन पुलिस का कहना है कि इस में किसी के हताहत होने की कोई ख़बर नहीं है.

हत्या की ख़बर के बाद कराची स्थित उनके पैतृक घर के बाहर बड़ी संख्या में एमक्यूएम समर्थकों की भीड़ जुट गई.

शहर में पेट्रोल पम्प, सीएनजी स्टेशन और बाज़ार बंद हैं और यातायात भी ठप्प है.

इससे आम लोगों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और सरकारी, निजी दफ्तरों और स्कूलों में उपस्थिति सामान्य से कम है.

ग़ौरतलब है कि कराची में एमक्यूएम ने 10 दिनों के शोक की घोषणा की है.

कराची में समर्थक

एमक्यूएम के निर्वासित नेता इमरान फ़ारूक़ की लंदन में गुरुवार को उनके घर के बाहर हत्या कर दी गई थी. वे एमक्यूएम के अहम नेता थे.

इस पार्टी के पाकिस्तान के कराची शहर में काफ़ी समर्थक हैं.

घटना को लेकर ब्रिटेन की पुलिस का कहना है कि उत्तरी लंदन में एक व्यक्ति की चाकू मार कर हत्या कर दी गई है.

शहर के पुलिस प्रवक्ता ने कहा, ''इस घटना की जानकारी के बाद पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उसने पाया कि एशियाई मूल के एक 50 वर्षीय व्यक्ति पर चाकूओं से कई बार वार किया गया था. उनके सिर पर भी गहरी चोट थी.''

प्रवक्ता का कहना है कि उन्हें तुरंत प्राथमिक चिकित्सा के लिए ले जाया गया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है.

इमरान फ़ारूक़ 1999 से ब्रिटेन में रह रहे थे. 1992 में वो पाकिस्तान से गायब हो गए और 1999 में उन्होंने ब्रिटेन में शरण ली.

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने पाकिस्तान के कराची शहर में एमक्यूएम के नेता रज़ा हैदर की हत्या के बाद कराची में हिंसा भड़क उठी थी जिसमें 80 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

एमक्यूएम ने इस हमले के लिए अवामी नेशनल पार्टी के सदस्यों पर आरोप लगाया था जिसके बाद शहर में हिंसा भड़क उठी थी.

यह संगठन विभाजन के बाद भारत से आए लोगों यानी मुहाजिरों का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका नेतृत्व अल्ताफ़ हुसैन करते हैं. पिछले कई सालों से वे लंदन में रह रहे हैं.

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