इस्लामाबाद में भारत विरोधी रैली

जमात-उद-दावा की रैली
Image caption इस्लामाबाद में जमात-उद-दावा की रैली

पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठन जमात-उल-दावा की ओर से भारत के ख़िलाफ़ और कश्मीरियों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया.

जमात-उल-दावा की ओर से तीन दिन पहले कश्मीरियों के समर्थन में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के शहर मीरपुर से एक रैली निकाली थी जो घाटी के विभिन्न शहरों से होती हुई बुधवार को राजधानी इस्लामाबाद पहुँची.

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर उठा रखे थे जिन पर भारत विरोधी और कश्मीर की आज़ादी के लिए नारे लिखे हुए थे.

यह प्रदर्शन पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के मुख्यालय के पास हुआ इसलिए सुरक्षा व्यावस्था कड़ी कर दी गई थी और रैली की जगह की ओर आने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए थे.

इस प्रदर्शन में जमात-उल-वादा के वरिष्ठ नेता अब्दुर्रहमान मक्की, अमीर हमज़ा, जमाते इस्लामी के प्रमुख मुनव्वर हसन, जमीयत उलेमाए इस्लाम समी गुट के मौलाना समीऊलहक़ सहित विभिन्न संगठनों के वरिष्ठ नेताओं ने भाषण दिया.

जेहाद

जमात-उल-दावा के वरिष्ठ नेता अब्दुर्रहमान मक्की ने प्रदर्शनकारियों को भारत के ख़िलाफ जेहाद छेड़ने के लिए प्रोत्साहित किया.

उन्होंने कहा, “अगर कश्मीर मुद्दा कश्मीरियों की इच्छा के मुताबिक हल नहीं होता तो फिर तलवार चलेगी, जेहाद उठेगा और कश्मीर आज़ाद होगा और श्रीनगर पर इस्लाम का झंडा लहराया जाएगा. इस्लाम का प्रचार किया जाएगा और पाकिस्तान को बचाया जाएगा.”

जब वे भाषण दे रहे थे तो उस समय पास की मस्जिदों में मग़रिब की आज़ान हो रही और उन्होंने अज़ान का उल्लेख देते हुए कहा, “यह अज़ान तुम को कहती है कि इस आवाज़ को श्रीनगर की गलियों में पहुँचा दो और यही तुम्हारी ज़िंदगी का उद्देश्य है.”

उन्होंने पाकिस्तान सराकरी की कश्मीर नीति पर कड़ी आलोचना की और कहा कि सरकार की ख़ामोशी उस की बुज़दिली को दर्शाती है.

जमाते इस्लामी के प्रमुख मुनव्वर हसन ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुआ कहा, “हमारा रास्ता जेहाद का रास्ता है और शहादत हमारी मंज़िल है.”

उन्होंने आगे कहा, “हम ने कई बार शांति की बात कही है और कश्मीर मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में मौजूद है. अगर घी सीधी उंगली से नहीं निकले तो उंगली टेढी करनी पड़ती है.”

Image caption रैली में लोग भारत विरोधी बैनरों के साथ पहुंचे थे

इस रैली में विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के नेता सिद्दीक़ुल फारुक़ ने भी बात की और कहा कि उन की पार्टी कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्वक ढंग से समाधान चाहती है और शांतिपूर्वक संघर्ष का समर्थन करती है.

ग़ौरतलब है कि ‘तहरीके आज़ादी जम्मू व कश्मीर’ के नाम से शुरु किए गए इस अभियान में लश्करे तैबा, जमात-उल-दावा, जैशे मोहम्म्द, मुस्लिम कांफ्रंस, जमाते इस्लामी और कई अन्य गुट शामिल थे.

यह रैली रविवार को मीरपुर से शुरु की गई थी और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के शहरों कोटली, बाग़ और मुज़फर्राबाद से होती हुई बुधवार को इस्लामाबाद पहुँची.

इस रैली में जमात-उल-दावा के प्रमुख हाफिज़ सईद का बेटा तलहा, अब्दुल रहमान मक्की, मौलाना अमीर हमज़ा और हाफिज़ सैफुल्लाह सहित कई विभिन्न जेहादी गुटों के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे.

अभियान का विरोध

इस बीच ‘जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ़्रंट’ ने जेहादी गुटों के इस अभियान का विरोध किया है.

इस्लामाबाद से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैबा और जेश-ए-मोहम्मद की गतिविधियाँ चिंताजनक हैं और यह आज़ादी के आंदोलन को नुक़सान पहुँचा सकती हैं.

पार्टी के प्रमुख राजा ग़ुलाम मुज़्तबा ने अपने बयान में कहा, “कश्मीरियों की ओर से शुरु किया गया कश्मीर छोड़ो आंदोलन अपने चरम पर पहुँच चुका है तो ऐसे में प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियाँ आंदोलन के ख़िलाफ साज़िश है.”

राजा ग़ुलाम के अनुसार प्रतिबंधित जेहादी गुट पाकिस्तानी ख़ुफिया एजेंसियों के इशारे पर कश्मीर की आज़ादी के लिए हो रहे आंदोलन को नुक़सान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने सरकार ने मांग की है कि वह पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जेहादी गुटों पर प्रतिबंध लगा दे.

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