क्यों हुई है ड्रोन हमलों में बढ़ोतरी

ड्रोन विमान
Image caption पिछले कुछ हफ्तों से लगातार ड्रोन हमले हो रहे हैं.

पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े उत्तर वज़ीरिस्तान में अमरीकी मनवरहित विमानों के हमलों में बढ़तरी पर जानकार मानते हैं कि इन इलाक़ों में अमरिका ने चरमपंथियों के ख़िलाफ कार्रवाई की ज़िम्मेदारी निश्चित रुप से ख़ुद संभाल ली है.

पिछले कुछ सालों की तुलना में इस वर्ष अमरीकी ड्रोन विमानों के हमलों में ने केवल बढ़ोतरी हुई है बल्कि कई ड्रोन विमान दिन रात क़बायली इलाक़ों की जासूसी करते रहते हैं.

जानकार मानते हैं कि वज़ीरिस्तान में ड्रोन विमानों के हमलों में बढ़ोतरी का एक कारण अमरीका में होने वाले मध्यावधि चुनाव हैं जिन से पहले अमरीकी प्रशासन अपनी जनता को आतंकवाद के ख़िलाफ युद्ध में अल-क़ायदा के किसी वरिष्ठ नेता की मौत की ख़बर सुनाना चाहती है.

दूसरा कारण यह कि पाकिस्तान के सुरक्षाबलों ने उत्तर वज़ीरिस्तान में हाफिज़ गुल बहादुर गुट के स्थानीय तालिबान और अफग़ान कमांडर जलालुद्दीन हक़्क़ानी के ख़िलाफ कार्रवाई नहीं की है इसलिए अमरीका ने ख़ुद उसी इलाक़ों में उन गुटों के ख़िलाफ कार्रवाई शुरु कर दी है.

फाटा रिसर्च सेंटर के प्रमुख डॉक्टर अशरफ अली का कहना है, “क़बायली इलाक़ों में चरमपंथियों के ख़िलाफ कार्रवाई में जितने भी महत्वपूर्ण नेता मारे गए हैं वह इन्हीं ड्रोन विमानों के हमलें से मारे गए हैं उन में देशी और विदेशी दोनों शामिल हैं.”

ग़ौरतलब है कि वरिष्ठ तालिबान कमांडर बैतुल्लाह महसूद भी अमरीकी ड्रोन विमानों की कार्रवाई में मारा गया था.

ड्रोन से नुक़सान ज़्यादा

डॉक्टर अशरफ ने बताया, “अमरिका को अब पता चल चुका है कि चरमपंथियों को जितना नुक़सान ड्रोन विमानों के हमलों से पहुँच सकता है वह दूसरे तरीक़ों से नहीं पहुँचाया जा सकता.”

Image caption वज़ीरिस्तान में ड्रोन हमलों के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं.

उन्होंने कहा कि अमरिका ख़ुद पाकिस्तानी इलाक़ों में ज़मीनी कार्रवाई तो नहीं कर सकता लेकिन ड्रोन हमलों के ज़रिए अपने लोगों को यह बताना चाहता है कि आतंकवाद के ख़िलाफ अमरिकी युद्ध कामयाबी से जारी है.

डॉक्टर अशरफ का यह भी कहना है कि ड्रोन हमलों में बढ़ोतरी का एक कारण यह भी है कि अमरिका चाहता है कि तालिबान विद्रोहियों को बातचीत केलिए विवश किया जा सके.

क़बायली मामलों के जाने-माने विश्लेषक जानकार रुस्तम शाह मोहमंद ने कहा, “ड्रोन हमलों को लेकर अमरिका केलिए मैदान साफ है और पाकिस्तानी सरकार की ओर से पूरा सहयोग है. ड्रोन विमान पाकिस्तान से उड़ाए जाते हैं और हमले किए जाते हैं.”

उन के अनुसार पाकिस्तान ने उत्तर वज़ीरिस्तान में हाफिज़ गुल बहादुर और जलालुद्दीन हक़्क़ानी के ख़िलाफ सैन्य अभियान की बात नहीं मानी क्योंकि वह पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर हमले नहीं करते.

उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान ने इन गुटों के ख़िलाफ कार्रवाई नहीं की तो अमरीका ने इस को अपने हाथ में संभाल लिया.

रुस्तम शाह का कहना है कि अमरीका समझता है कि क़बायली इलाक़ों में जितने भी लोग अमरीका के ख़िलाफ हैं वह दक्षिण और उत्तर वज़ीरिस्तान में इकट्ठे हो रहे हैं.

अमरीका की नज़र

उन के अनुसार सुरक्षाबलों ने औरकज़ई एजेंसी को चरमपंथियों से सुरक्षित किया गया जबकि मोहमंद, बाजौड़ और कुर्रम एजेंसी में कार्रवाई जारी है इसलिए वज़ीरिस्तान में चरमपंथियों के शरण मिल सकती है.

उन्होंने कहा कि अमरीका की नज़र भी अब वज़ीरिस्तान के उन इलाक़ों पर है जहाँ चरमपंथियों से शरण ले रखी है.

अधिकतर जानकार मानते हैं कि ड्रोन हमलों के रुकने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि पाकिस्तान ने इन हमलों के ख़िलाफ ख़ामोश रह कर अपनी रज़ामंदी ज़ाहिर की है.

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