पाकिस्तान में बढ़ती अपहरण की घटनाएँ

  • 14 अक्तूबर 2010
pak police
Image caption पुलिस अपहरणकर्ताओं को तलाश कर रही है.

पाकिस्तान में इन दिनों अपहरण की घटनाओं में ख़तरनाक हद तक बढ़ौतरी देखी जा रही है और केवल ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में इस वर्ष के पहले सात महीनों में करीब 575 लोगों का अपहरण किया गया.

पुलिस के अनुसार अपहरण की कार्रवाइयों में विभिन्न प्रकार के गुट लिप्त हैं जिन के ख़िलाफ पेशावर और प्रांत के अन्य शहरों में अभियान किए जा रहे हैं.

पेशावर में इन दिनों इस्लामिया कॉलेज विश्वविद्यालय के कुलपति अजमल ख़ान और जाने माने डॉक्टर इंतिख़ाब आलम सहित कई वकील, डॉक्टर और व्यापारियों का अपहरण हो चुका है.

पुलिस के मुतिबक इस प्रकार के अपहरण फिरौती के लिए किए गए जा रहे हैं और उन लोगों की रिहाई के लिए कोशिशें की जा रही हैं.

डॉक्टर इंतिख़ाब आलम को दो सप्ताह पहले शहर के केंद्र से उस वक़्त अग़वा किया गया था जब वे अपने क्लीनिक से घर जा रहे थे.

अग़वा का विरोध

इस घटना के ख़िलाफ शहर के बड़े बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों से कम करना छोड़ दिया था और विरोध प्रदर्शन भी किए थे.

इस्लामिया कॉलेज विश्वविद्यालय के कुलपति अजमल ख़ान को सात सितंबर का यूनिवर्सिटी के पास अपहरण हुआ था.

पुलिस ने बताया कि इसी साल अब तक करीब 575 लोगों का प्रांत के विभिन्न शहरों से अपहरण हुआ है जिस में अधिकतर को मुक्त करा लिया गया है.

Image caption पेशावर पुलिस ने कई लोगों को गिफ्तार भी किया है.

पेशावर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लियाक़त ख़ान ने बीबीसी को बताया, “अपहरण की घटनाओं में प्रांत के विभिन्न गुट लिप्त हैं जिन की गिरफ्तारी केलिए पुलिस छापे मार रही है और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है.”

उन्होंने बताया कि अपहरण की घटनाएं पहले भी हो रही थी लेकिन अब जबकि आतंकवाद पर क़ाबू पा लिया है तो अग़वा की ख़बरे सामने आ रही हैं.

फिरौती के लिए अपहरण

उन के अनुसार अधिकतर अपहरण फिरौती केलिए किए जाते हैं और कुछ लोग आपसी दुश्मनी की वजह से लोगों को अग़वा करवाते हैं.

पुलिस अधिकारी लियाक़त अली ने इस बात पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया कि क्या इस अपहरण की घटनाओं में तालिबान विद्रोहियों का हाथ है.

उन्होंने कहा कि अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है कि इस में कौन से गुट लिप्त हैं.

इस्लामिया विश्वविद्यालय के सईद अनवर ने बीबीसी को बताया, “सरकार ने कुलपति अजमल ख़ान को तुरंत रिहा कराने का आश्वासन दिया है.”

उन्होंने कहा कि अजमल ख़ान को पहले इसी तरह की धमकियाँ नहीं मिली थी.

ग़ौरतलब है कि अफग़ानिस्तान के राजदूत अब्दुल ख़ालिक़ फराही को सितंबर 2008 में अग़वा किया गया था जिन को अभी रिहा नहीं करवाया जा सकता है.

पेशावर स्थित इरानी दूतावास के एक वरिष्ठ अधिकारी हशमत अतहरज़ादे का 2008 में पेशावर से अपहरण हुआ था और इरानी मीडिया के अनुसार उन को इरानी ख़ुफिया एजेंसियों ने मई 2010 में मुक्त कराया था.

पूरे प्रांत विशेषकर पेशावर में फरौती केन लिए अपहरण की घटनाएँ आम लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं.

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