पाकिस्तान को अमरीकी सहायता

Image caption हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तान अमरीका वार्ता के बाद सहायता की घोषणा की है

अमरीका ने पाकिस्तान को अगले पाँच वर्ष के लिए दो अरब डॉलर की सैनिक सहायता देने की घोषणा की है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अमरीका-पाकिस्तान सामरिक वार्ता के बाद इसकी घोषणा की, इस सहायता को अमरीकी संसद की मंज़ूरी मिलनी अभी बाक़ी है.

पाकिस्तान को अमरीका 7.5 अरब डॉलर की असैनिक आर्थिक सहायता पहले ही दे रहा है, 2005 में अमरीकी संसद ने पाँच साल की अवधि के लिए सहायता को मंज़ूरी दी थी.

ऐसा माना जा रहा है कि ओबामा प्रशासन पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा रहा है कि वह इस्लामी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई करे.

अमरीकी प्रशासन की कई लोग इस बात को लेकर आलोचना करते रहे हैं कि वह इस आर्थिक सहायता के लिए कड़ी शर्तें नहीं रख रहा है.

अमरीका पाकिस्तान को वर्ष 2005 से औसतन एक अरब डॉलर की वार्षिक सहायता देता रहा है, पिछले वित्त वर्ष में दो अरब डॉलर की मदद दी गई.

अमरीकी अधिकारियों का कहना था कि चरमपंथियों का मुक़ाबला करने के लिए पाकिस्तान को आर्थिक सहायता दिया जाना ज़रूरी है.

इस आर्थिक मदद का इस्तेमाल चरमपंथियों से निबटने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण ख़रीदने और सैनिक अभियान चलाने के लिए किया जाएगा.

अमरीकी विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान मामलों के सलाहकार वली नस्र ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि "पाकिस्तानी सेना ने चरमपंथियों के ख़िलाफ़ जो कामयाबियाँ हासिल की थीं उनमें से ज्यादातर को बाढ़ ने बेकार कर दिया है."

पाकिस्तान पर संदेह

आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा के बावजूद जानकारों का कहना है कि अमरीका को चरमपंथियों से निबटने के मामले में पाकिस्तान की क्षमता और नीयत दोनों पर संदेह करता है.

व्हाइट हाउस ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें पाकिस्तानी सेना की क्षमताओं पर सवाल उठाए गए हैं, रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना ने चरमपंथियों के कब्ज़े से जितना इलाक़ा छीना था वह उस पर नियंत्रण नहीं रख सका.

रिपोर्ट में कहा गया है, "पाकिस्तान की सेना उत्तरी वज़ीरिस्तान में तालिबान और अल क़ायदा से टकराव से कतराती है, कई मामलों में यह जितना राजनीतिक इच्छाशक्ति का मामला है उतना ही सैनिक क्षमताओं की कमी का भी."

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